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Rishikesh News: ऐपण को सजावट से बाजार तक पहुंचाएगी मुनि की रेती पालिका
Fri, 11 Sep 2026 05:32 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Fri, 11 Sep 2026 05:32 PM IST
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खुशबू गौतम
- पालिका ने ली ऐपण को प्रमोट करने की जिम्मेदारी, स्थानीय महिलाओं को रोजगार की आस
- मुनि की रेती में ऐपण कला से संवरेंगे कार्यालय, स्थानीय महिलाओं को मिलेगा काम
ढालवाला। नगर पालिका परिषद मुनि की रेती अब ऐपण कला को नई पहचान दिलाने की तैयारी में है। उत्तराखंड की इस पारंपरिक लोककला को सार्वजनिक स्थलों पर जगह देने के साथ ही पालिका इसे नई पीढ़ी से जोड़कर स्थानीय कलाकारों के लिए आजीविका के अवसर भी विकसित करेगी। लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्द्धन की दिशा में पालिका की यह पहल नई मिसाल बन सकती है।
नगर पालिका मुनि की रेती ने कार्यालय कक्षों और सभी विभागीय पहचान बोर्डों को पारंपरिक ऐपण कला से सजाया है। ऐपण युक्त प्रत्येक बोर्ड पर करीब 1,500 रुपये खर्च आया है जबकि सामान्य बोर्ड की लागत लगभग 500 रुपये है। पालिका के अनुसार यह महज सौंदर्यीकरण नहीं बल्कि लोककला संरक्षण और स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहन देने की पहल है। योजना का सबसे अहम पहलू महिला सशक्तीकरण है जिसके जरिये स्थानीय महिलाओं को ऐपण कला के माध्यम से रोजगार और आय के अवसर मिल रहे हैं।
कोट
इन सभी बोर्डों का निर्माण किसी बाहरी व्यावसायिक कंपनी से कराने के बजाय स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं से करवाया गया है। इससे क्षेत्र की महिलाओं को सीधे तौर पर रोजगार मिला। इस पहल ने पारंपरिक कला को एक व्यावसायिक मंच प्रदान किया है साथ ही महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है और वह आर्थिक रूप से अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बन रहीं हैं। नीलम बिजल्वाण, पालिका अध्यक्ष, मुनि की रेती।
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- पालिका ने ली ऐपण को प्रमोट करने की जिम्मेदारी, स्थानीय महिलाओं को रोजगार की आस
- मुनि की रेती में ऐपण कला से संवरेंगे कार्यालय, स्थानीय महिलाओं को मिलेगा काम
ढालवाला। नगर पालिका परिषद मुनि की रेती अब ऐपण कला को नई पहचान दिलाने की तैयारी में है। उत्तराखंड की इस पारंपरिक लोककला को सार्वजनिक स्थलों पर जगह देने के साथ ही पालिका इसे नई पीढ़ी से जोड़कर स्थानीय कलाकारों के लिए आजीविका के अवसर भी विकसित करेगी। लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्द्धन की दिशा में पालिका की यह पहल नई मिसाल बन सकती है।
नगर पालिका मुनि की रेती ने कार्यालय कक्षों और सभी विभागीय पहचान बोर्डों को पारंपरिक ऐपण कला से सजाया है। ऐपण युक्त प्रत्येक बोर्ड पर करीब 1,500 रुपये खर्च आया है जबकि सामान्य बोर्ड की लागत लगभग 500 रुपये है। पालिका के अनुसार यह महज सौंदर्यीकरण नहीं बल्कि लोककला संरक्षण और स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहन देने की पहल है। योजना का सबसे अहम पहलू महिला सशक्तीकरण है जिसके जरिये स्थानीय महिलाओं को ऐपण कला के माध्यम से रोजगार और आय के अवसर मिल रहे हैं।
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इन सभी बोर्डों का निर्माण किसी बाहरी व्यावसायिक कंपनी से कराने के बजाय स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं से करवाया गया है। इससे क्षेत्र की महिलाओं को सीधे तौर पर रोजगार मिला। इस पहल ने पारंपरिक कला को एक व्यावसायिक मंच प्रदान किया है साथ ही महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है और वह आर्थिक रूप से अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बन रहीं हैं। नीलम बिजल्वाण, पालिका अध्यक्ष, मुनि की रेती।
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