{"_id":"5e011b6e8ebc3e881275123d","slug":"marking-between-warnings-noises-arguments-postponed-to-26-december-rishikesh-news-drn330390244","type":"story","status":"publish","title_hn":"26 दिसंबर तक अतिक्रमण की कार्रवाई स्थगित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
26 दिसंबर तक अतिक्रमण की कार्रवाई स्थगित
विज्ञापन
नगर निगम सभागार में एनएच अधिकारियों को दस्तावेज दिखाते भरत मंदिर के वरुण शर्मा।
- फोटो : RISHIKESH
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ऋषिकेश। नगर निगम सभागार में आयोजित बैठक में तहसील प्रशासन, एनएच के आला अधिकारियों पर व्यापारियों का गुस्सा फूट पड़ा। व्यापारियों ने विभाग पर तानाशाही, मनमानी के आरोपों की झड़ी लगा दी। बहंसबाजी इतनी तीखी हो गई कि व्यापारियों ने मनमाने तरीके से कार्रवाई करने पर आंदोलन की चेतावनी दी। मौके पर उपस्थित उपजिलाधिकारी की अपील पर व्यापारियों का गुस्सा ठंडा हुआ। इसके बाद आगामी 26 दिसंबर तक अतिक्रमण चिह्नीकरण की कार्रवाई को स्थगित करने का निर्णय लिया गया। एलडीएम ने अतिक्रमण कार्रवाई से संबंधित दस्तावेज जुटाने के निर्देश दिए हैं।
बता दें, बीते रविवार को लक्ष्मणझूला मार्ग पर एनएच विभाग की चिह्नीकरण कार्रवाई के विरोध में व्यापारी सड़क पर उतर गए थे। इस दौरान उन्होंने अतिक्रमण चिह्नीकरण की कार्रवाई को रुकवा दिया था। मामला बढ़ता देख स्वयं तहसीलदार और कोतवाल को बीच मेें आना पड़ा था। इसी क्रम में सोमवार को नगर निगम सभागार में उपजिलाधिकारी और एनएच विभाग के अधिशासी अभियंता के साथ नगर के व्यापारियों की बैठक बुलाई गई थी।
बैठक के दौरान नगर निगम सभागार मेें उपजिलाधिकारी प्रेमलाल और एनएच के अधिशासी अभियंता ओपी सिंह, जीएमवीएन उपाध्यक्ष केके सिंघल सहित शहर भर के व्यापारी इकट्ठा हुए। बैठक शुरू होते ही व्यापारियों का गुस्सा एनएच विभाग के अधिकारियों पर फूट पड़ा। उन्होंने विभाग के खिलाफ मनमानी का आरोप लगाया। किसी ने सरकारी विभाग में समन्वय की कमी तो किसी ने सड़क चौड़ीकरण नोटिफिकेशन में तानाशाही रवैये का आरोप लगाया। माहौल तब नाजुक हो गया जब एक व्यापारी अधिशासी अभियंता के समक्ष पहुंचा और कार्रवाई को व्यापारियों का उत्पीड़न करार देने लगा। इस दौरान व्यापारी ने चेतावनी दी कि अफसरों की उत्पीड़नकारी कार्रवाई से किसी को हार्ट अटैक हुआ तो जिम्मेदारी विभाग को उठानी पड़ेगी।
विज्ञापन
इस दौरान भरत मंदिर की ओर से वरुण शर्मा ने संपत्ति से जुड़े दस्तावेज उपजिलाधिकारी और अधिशासी अभियंता के समक्ष रखे। उन्होंने अवगत कराया कि पूर्व में समस्त भूमि भरत मंदिर ट्रस्ट की थी। इसमें कुछ रोड के लिए दी गई थी। इस दौरान अन्य व्यापारियों ने भी उपजिलाधिकारी के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत किए। इस पर मौके पर उपस्थित अधिकारियों ने वार्ता कर 26 दिसंबर तक अतिक्रमण की कार्रवाई को स्थगित करने का निर्णय लिया। उपजिलाधिकारी ने सबसे सौहार्द पूर्ण व्यवहार करने की अपील की और इस संबंध में दस्तावेज जुटाने की बात कही।
----
परिचर्चा
-नगर निगम सभागार मेें हुई बैठक में एनएच विभाग के आला अधिकारियों के पास अतिक्रमण बताने वाले पर्याप्त दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। पहले बताया गया था कि 110 फीट पर अतिक्रमण फैला हुआ है। व्यापारियों के दस्तावेज प्रस्तुत करने पर वही दूरी 79 फीट हो गई। सरकार व्यापारियों के साथ है।
-कृष्ण कुमार सिंघल, उपाध्यक्ष, राज्य मंत्री
-अतिक्रमण चिह्नीकरण कार्रवाई के दौरान एनएच विभाग बार-बार मानक बदल रहे हैं। अधिकारियों को व्यापारियों के संग बैठकर कोई रास्ता निकालना चाहिए। शहर तभी रहेगा, जब व्यापारी होंगे। अतिक्रमण की ऐसी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए कि किसी के साथ भी अन्याय हो।
-जयेंद्र रमोला, एआईसीसी सदस्य
-पेपर वर्क में एनएच विभाग शून्य है। विभाग को पता नहीं है कि पुराना बद्रीनाथ मार्ग लोक निर्माण विभाग की संपत्ति है कि नहीं। अतिक्रमण की कार्रवाई अवश्य करें, मगर पहले कागज तो पूरे कर लें।
-पंकज गुप्ता, व्यापारी
-पहले विभाग ने अतिक्रमण चिन्ह्नीकरण की कार्रवाई 40 फीट पर की। उसके बाद 66 फीट पर की और नोटिस भी जारी किए। इसके बाद बीते दिनों 96 फीट पर निशान लगाए जा रहे थे। इससे तो यहां का पूरा बाजार खत्म हो जाएगा। अतिक्रमण चिह्नित करने के लिए एनएच विभाग गलत निशान लगा रहा है।
-जयदत्त शर्मा, व्यापारी
-एनएच विभाग मानकों को लेकर स्वयं ही आश्वस्त नहीं है। ऐसे में आधी अधूरी तैयारियों के साथ अतिक्रमण को चिह्नित करना व्यापारियों के हित में नहीं होगा। पहले विभाग कहता है कि उनके पास 5.85 एकड़ भूमि है। देहरादून और रेलवे रोड भी तो लोक निर्माण विभाग का ही है।
-वरुण शर्मा, भरत मंदिर
-एनएच विभाग की यह कार्रवाई मनमानी पूर्ण और नाजायज है। पूर्व में समय में स्वयं डीएम ने यहां के नक्शे पास किए हैं। उन्हें एनएच विभाग कतई अवैध नहीं ठहरा सकता। एनएच विभाग को अतिक्रमण कार्रवाई में पारदर्शिता पूर्ण रवैया अपनाना आवश्यक है।
-दीप शर्मा, पूर्व पालिकाध्यक्ष
-एनएच विभाग दस्तावेजों के आधार पर नहीं बल्कि अनुमान के हिसाब से कार्रवाई कर रहा है। पहले 40 फिर 66 और फिर 96 फीट पर चिह्नीकरण किया जा रहा है। विभाग अपनी कार्रवाई को लेकर खुद ही स्पष्ट नहीं है। ऐसे में बेवजह व्यापारियों का उत्पीड़न किया जा रहा है।
-ललित मोहन मिश्र, व्यापारी
-पूर्व में यहां के नक्शे स्वयं जिलाधिकारी ने पास किए हैं। मगर एनएच विभाग अलग-अलग मानकों के आधार पर अतिक्रमण अभियान को हवा देने में लगा है। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार अतिक्रमण मुक्ति की कार्रवाई की होनी चाहिए। कार्रवाई के नाम पर दहशत न फैलाई जाए। क्षेत्र रोड में भी पूर्व में व्यापारियों ने स्वयं अतिक्रमण हटाया है।
-संदीप गुप्ता, पूर्व राज्य मंत्री
विज्ञापन
बता दें, बीते रविवार को लक्ष्मणझूला मार्ग पर एनएच विभाग की चिह्नीकरण कार्रवाई के विरोध में व्यापारी सड़क पर उतर गए थे। इस दौरान उन्होंने अतिक्रमण चिह्नीकरण की कार्रवाई को रुकवा दिया था। मामला बढ़ता देख स्वयं तहसीलदार और कोतवाल को बीच मेें आना पड़ा था। इसी क्रम में सोमवार को नगर निगम सभागार में उपजिलाधिकारी और एनएच विभाग के अधिशासी अभियंता के साथ नगर के व्यापारियों की बैठक बुलाई गई थी।
विज्ञापन
बैठक के दौरान नगर निगम सभागार मेें उपजिलाधिकारी प्रेमलाल और एनएच के अधिशासी अभियंता ओपी सिंह, जीएमवीएन उपाध्यक्ष केके सिंघल सहित शहर भर के व्यापारी इकट्ठा हुए। बैठक शुरू होते ही व्यापारियों का गुस्सा एनएच विभाग के अधिकारियों पर फूट पड़ा। उन्होंने विभाग के खिलाफ मनमानी का आरोप लगाया। किसी ने सरकारी विभाग में समन्वय की कमी तो किसी ने सड़क चौड़ीकरण नोटिफिकेशन में तानाशाही रवैये का आरोप लगाया। माहौल तब नाजुक हो गया जब एक व्यापारी अधिशासी अभियंता के समक्ष पहुंचा और कार्रवाई को व्यापारियों का उत्पीड़न करार देने लगा। इस दौरान व्यापारी ने चेतावनी दी कि अफसरों की उत्पीड़नकारी कार्रवाई से किसी को हार्ट अटैक हुआ तो जिम्मेदारी विभाग को उठानी पड़ेगी।
विज्ञापन
इस दौरान भरत मंदिर की ओर से वरुण शर्मा ने संपत्ति से जुड़े दस्तावेज उपजिलाधिकारी और अधिशासी अभियंता के समक्ष रखे। उन्होंने अवगत कराया कि पूर्व में समस्त भूमि भरत मंदिर ट्रस्ट की थी। इसमें कुछ रोड के लिए दी गई थी। इस दौरान अन्य व्यापारियों ने भी उपजिलाधिकारी के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत किए। इस पर मौके पर उपस्थित अधिकारियों ने वार्ता कर 26 दिसंबर तक अतिक्रमण की कार्रवाई को स्थगित करने का निर्णय लिया। उपजिलाधिकारी ने सबसे सौहार्द पूर्ण व्यवहार करने की अपील की और इस संबंध में दस्तावेज जुटाने की बात कही।
----
परिचर्चा
-नगर निगम सभागार मेें हुई बैठक में एनएच विभाग के आला अधिकारियों के पास अतिक्रमण बताने वाले पर्याप्त दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। पहले बताया गया था कि 110 फीट पर अतिक्रमण फैला हुआ है। व्यापारियों के दस्तावेज प्रस्तुत करने पर वही दूरी 79 फीट हो गई। सरकार व्यापारियों के साथ है।
-कृष्ण कुमार सिंघल, उपाध्यक्ष, राज्य मंत्री
-अतिक्रमण चिह्नीकरण कार्रवाई के दौरान एनएच विभाग बार-बार मानक बदल रहे हैं। अधिकारियों को व्यापारियों के संग बैठकर कोई रास्ता निकालना चाहिए। शहर तभी रहेगा, जब व्यापारी होंगे। अतिक्रमण की ऐसी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए कि किसी के साथ भी अन्याय हो।
-जयेंद्र रमोला, एआईसीसी सदस्य
-पेपर वर्क में एनएच विभाग शून्य है। विभाग को पता नहीं है कि पुराना बद्रीनाथ मार्ग लोक निर्माण विभाग की संपत्ति है कि नहीं। अतिक्रमण की कार्रवाई अवश्य करें, मगर पहले कागज तो पूरे कर लें।
-पंकज गुप्ता, व्यापारी
-पहले विभाग ने अतिक्रमण चिन्ह्नीकरण की कार्रवाई 40 फीट पर की। उसके बाद 66 फीट पर की और नोटिस भी जारी किए। इसके बाद बीते दिनों 96 फीट पर निशान लगाए जा रहे थे। इससे तो यहां का पूरा बाजार खत्म हो जाएगा। अतिक्रमण चिह्नित करने के लिए एनएच विभाग गलत निशान लगा रहा है।
-जयदत्त शर्मा, व्यापारी
-एनएच विभाग मानकों को लेकर स्वयं ही आश्वस्त नहीं है। ऐसे में आधी अधूरी तैयारियों के साथ अतिक्रमण को चिह्नित करना व्यापारियों के हित में नहीं होगा। पहले विभाग कहता है कि उनके पास 5.85 एकड़ भूमि है। देहरादून और रेलवे रोड भी तो लोक निर्माण विभाग का ही है।
-वरुण शर्मा, भरत मंदिर
-एनएच विभाग की यह कार्रवाई मनमानी पूर्ण और नाजायज है। पूर्व में समय में स्वयं डीएम ने यहां के नक्शे पास किए हैं। उन्हें एनएच विभाग कतई अवैध नहीं ठहरा सकता। एनएच विभाग को अतिक्रमण कार्रवाई में पारदर्शिता पूर्ण रवैया अपनाना आवश्यक है।
-दीप शर्मा, पूर्व पालिकाध्यक्ष
-एनएच विभाग दस्तावेजों के आधार पर नहीं बल्कि अनुमान के हिसाब से कार्रवाई कर रहा है। पहले 40 फिर 66 और फिर 96 फीट पर चिह्नीकरण किया जा रहा है। विभाग अपनी कार्रवाई को लेकर खुद ही स्पष्ट नहीं है। ऐसे में बेवजह व्यापारियों का उत्पीड़न किया जा रहा है।
-ललित मोहन मिश्र, व्यापारी
-पूर्व में यहां के नक्शे स्वयं जिलाधिकारी ने पास किए हैं। मगर एनएच विभाग अलग-अलग मानकों के आधार पर अतिक्रमण अभियान को हवा देने में लगा है। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार अतिक्रमण मुक्ति की कार्रवाई की होनी चाहिए। कार्रवाई के नाम पर दहशत न फैलाई जाए। क्षेत्र रोड में भी पूर्व में व्यापारियों ने स्वयं अतिक्रमण हटाया है।
-संदीप गुप्ता, पूर्व राज्य मंत्री