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- वन्यजीवों के हमले में मृत व्यक्ति के परिजनों को मिले 25 लाख और नौकरी
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ऋषिकेश। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कहा कि वन्यजीवों के हमले में मृत व्यक्ति के परिजनों को 25 लाख रुपये और एक परिवार को सरकारी नौकरी मिलनी चाहिए। 2006 का फॉरेस्ट एक्ट लागू कर जंगलों पर स्थानीय लोगों का हक होना चाहिए। गांव में प्रत्येक परिवार को प्रतिमाह एक गैस सिलिंडर मुफ्त में दिया जाना चाहिए।
व्यापार सभा भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कहा कि सभी ग्रामीणों को उनके गांव के पास स्थित जंगल पर अधिकार मिलने चाहिए। एक यूनिट मकान बनाने के लिए लकड़ी, बजरी, मिट्टी और पत्थर वन भूमि से उठाने की अनुमति मिलनी चाहिए। वन संपदा जैसी जड़ी बूटियों पर भी हमारा अधिकार होने चाहिए। शिक्षा और चिकित्सा सेवा निशुल्क हो। राज्य में चकबंदी को जल्द लागू किया जाए। जंगली जानवरों के हमले में किसी व्यक्ति के मारे जाने पर उसके परिजनों को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के व्यक्ति को सरकारी नौकरी दी जाए। अभी वर्तमान में मौत होने पर तीन लाख रुपये दिए जाने का प्रावधान है। जंगली जानवरों की ओर से फसलों को नुकसान करने के बदले पांच हजार प्रति नाली के हिसाब से भुगतान किया जाए। केंद्रीय नौकरियों में उत्तराखंड मूल के लोगों को आरक्षण दिया जाए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से एक कमेटी बनाई है, उसमें पेड़ से एक साल में प्राप्त होने वाली प्राणदायक वायु के बारे में अध्ययन किया जा रहा है।
इस अवसर पर एआईसीसी के सदस्य जयेंद्र रमोला, विनोद सकलानी, अरविंद जैन, मदन मोहन शर्मा, जगदीश सिंह जग्गी, ऋतिक, संतोष पैन्यूली, विजयपाल रावत, यश अरोड़ा और सरोज देवराड़ी आदि मौजूद थे।
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व्यापार सभा भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने कहा कि सभी ग्रामीणों को उनके गांव के पास स्थित जंगल पर अधिकार मिलने चाहिए। एक यूनिट मकान बनाने के लिए लकड़ी, बजरी, मिट्टी और पत्थर वन भूमि से उठाने की अनुमति मिलनी चाहिए। वन संपदा जैसी जड़ी बूटियों पर भी हमारा अधिकार होने चाहिए। शिक्षा और चिकित्सा सेवा निशुल्क हो। राज्य में चकबंदी को जल्द लागू किया जाए। जंगली जानवरों के हमले में किसी व्यक्ति के मारे जाने पर उसके परिजनों को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के व्यक्ति को सरकारी नौकरी दी जाए। अभी वर्तमान में मौत होने पर तीन लाख रुपये दिए जाने का प्रावधान है। जंगली जानवरों की ओर से फसलों को नुकसान करने के बदले पांच हजार प्रति नाली के हिसाब से भुगतान किया जाए। केंद्रीय नौकरियों में उत्तराखंड मूल के लोगों को आरक्षण दिया जाए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से एक कमेटी बनाई है, उसमें पेड़ से एक साल में प्राप्त होने वाली प्राणदायक वायु के बारे में अध्ययन किया जा रहा है।
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इस अवसर पर एआईसीसी के सदस्य जयेंद्र रमोला, विनोद सकलानी, अरविंद जैन, मदन मोहन शर्मा, जगदीश सिंह जग्गी, ऋतिक, संतोष पैन्यूली, विजयपाल रावत, यश अरोड़ा और सरोज देवराड़ी आदि मौजूद थे।
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