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Rishikesh News: 28 दिनों में 11 जिंदगी निगल चुकी है गंगा की लहरें
Fri, 29 May 2026 02:11 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Fri, 29 May 2026 02:11 AM IST
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योग नगरी ऋषिकेश में गंगा तटों पर नहाने के दौरान हो रही लगातार दुर्घटनाएं चिंता का विषय बनती जा रही हैं। बीते 28 दिनों में गंगा में डूबने से 11 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें अधिकांश पर्यटक और युवा श्रद्धालु शामिल हैं, जो घूमने या स्नान के लिए घाटों और तटों पर पहुंचे थे। हादसों के पीछे प्रशासनिक लापरवाही के साथ-साथ पर्यटकों की असावधानी भी बड़ी वजह बन रही है।
गंगा का तेज बहाव और गहराई कई तट व घाटों को बेहद संवेदनशील बनाती है, लेकिन इसके बावजूद पर्यटक चेतावनियों को नजरअंदाज कर जान जोखिम में डाल रहे हैं। कोई सेल्फी लेने के दौरान संतुलन खो बैठता है तो कोई पानी में गिरे मोबाइल या चश्मे को निकालने के प्रयास में बहाव की चपेट में आ जाता है।
कई लोग निर्धारित सीमाओं से आगे जाकर स्नान करते हैं, जिससे हादसे हो रहे हैं। हाल के दिनों में मालाकुंठी, भागीरथी घाट, नमामि गंगे घाट और अन्य स्थानों पर डूबने की घटनाएं सामने आई हैं। कई मामलों में युवाओं ने दोस्तों के साथ मस्ती करते हुए गहरे पानी में छलांग लगा दी, जो उनके लिए जानलेवा साबित हुई।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि कई घाटों पर सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त नहीं हैं। संवेदनशील स्थानों पर चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग, लाइफ जैकेट और गोताखोरों की तैनाती की जानी चाहिए। शाम के समय और छुट्टियों में घाटों पर भारी भीड़ उमड़ती है, लेकिन निगरानी व्यवस्था कमजोर दिखाई देती है।
हालांकि प्रशासन और जल पुलिस लगातार लोगों से सावधानी बरतने की अपील कर रहे हैं, मगर पर्यटक निर्देशों को गंभीरता से नहीं ले रहे। कई बार पुलिसकर्मी घाटों से लोगों को हटाते हैं, लेकिन उनके जाते ही लोग दोबारा खतरनाक क्षेत्रों में उतर जाते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासनिक इंतजाम बढ़ाने के साथ ही लोगों को भी जिम्मेदारी समझनी होगी।
गंगा का बहाव सामान्य नदी जैसा नहीं है। थोड़ी सी लापरवाही भी जिंदगी छीन सकती है। गर्मी बढ़ने के साथ ऋषिकेश में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यदि सुरक्षा व्यवस्था और जागरूकता पर गंभीरता से काम नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में हादसों का आंकड़ा और बढ़ सकता है।
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कब-कब हुई गंगा में डूबने की घटनाएं
- 1 मई को 18 वर्षीय वंश निवासी निजामपुर, दिल्ली मालाकुंठी क्षेत्र में गंगा में डूब गया।
- 9 मई को 20 वर्षीय हर्षित उपाध्याय निवासी भिकियासैंण, अल्मोड़ा भागीरथी घाट पर गंगा में डूब गया।
- 14 मई को 16 वर्षीय आशीष कुमार निवासी सागरपुर, जनकपुरी पांडू पत्थर के समीप गंगा में डूब गया।
- 14 मई को साईं घाट पर 30 वर्षीय सोनू वर्मा निवासी सराय, मालवीय नगर गंगा में डूब गया।
- 16 मई को नमामि गंगे घाट पर 24 वर्षीय वेद प्रकाश निवासी चचियावास, राजस्थान गंगा में डूब गया।
- 21 मई को अमरोहा के दो युवक मोहम्मद कैफ व मोहम्मद फैजान लक्ष्मण झूला के समीप गंगा में बह गए।
- 24 मई को दून निवासी आयुष थापा (17) त्रिवेणीघाट के समीप गंगा में डूब गया था।
- 25 मई को तपोवन स्थित सच्चा धाम घाट पर नहाते समय नोएडा निवासी चंदन यादव (21) डूब गया था।
- 28 मई को सिंगटाली में मेरठ के पर्यटक ऋतु (30) निवासी मेरठ तथा नरेश उपाध्याय (42) निवासी मेरठ गंगा बह गए।
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इन बातों का विशेष ध्यान रखें
- केवल निर्धारित और सुरक्षित घाटों पर ही स्नान करें, तेज बहाव वाले क्षेत्रों और गहरे पानी में जाने से बचें, चेतावनी बोर्ड और पुलिस-प्रशासन के निर्देशों का पालन करें, सेल्फी लेने या वीडियो बनाने के दौरान नदी के किनारे अत्यधिक आगे न जाएं, पानी में गिरे मोबाइल, चश्मा या अन्य सामान निकालने के लिए गहराई में न उतरें, बच्चों को अकेला नदी किनारे न छोड़ें और उन पर लगातार नजर रखें, नशे की हालत में गंगा में उतरने से बचें, बारिश या जलस्तर बढ़ने की स्थिति में नदी से दूरी बनाए रखें, यदि तैरना नहीं आता तो कम पानी वाले क्षेत्र में ही रहें, समूह में स्नान करें और किसी आपात स्थिति में तुरंत पुलिस या जल पुलिस को सूचना दें।
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गंगा का तेज बहाव और गहराई कई तट व घाटों को बेहद संवेदनशील बनाती है, लेकिन इसके बावजूद पर्यटक चेतावनियों को नजरअंदाज कर जान जोखिम में डाल रहे हैं। कोई सेल्फी लेने के दौरान संतुलन खो बैठता है तो कोई पानी में गिरे मोबाइल या चश्मे को निकालने के प्रयास में बहाव की चपेट में आ जाता है।
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कई लोग निर्धारित सीमाओं से आगे जाकर स्नान करते हैं, जिससे हादसे हो रहे हैं। हाल के दिनों में मालाकुंठी, भागीरथी घाट, नमामि गंगे घाट और अन्य स्थानों पर डूबने की घटनाएं सामने आई हैं। कई मामलों में युवाओं ने दोस्तों के साथ मस्ती करते हुए गहरे पानी में छलांग लगा दी, जो उनके लिए जानलेवा साबित हुई।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि कई घाटों पर सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त नहीं हैं। संवेदनशील स्थानों पर चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग, लाइफ जैकेट और गोताखोरों की तैनाती की जानी चाहिए। शाम के समय और छुट्टियों में घाटों पर भारी भीड़ उमड़ती है, लेकिन निगरानी व्यवस्था कमजोर दिखाई देती है।
हालांकि प्रशासन और जल पुलिस लगातार लोगों से सावधानी बरतने की अपील कर रहे हैं, मगर पर्यटक निर्देशों को गंभीरता से नहीं ले रहे। कई बार पुलिसकर्मी घाटों से लोगों को हटाते हैं, लेकिन उनके जाते ही लोग दोबारा खतरनाक क्षेत्रों में उतर जाते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासनिक इंतजाम बढ़ाने के साथ ही लोगों को भी जिम्मेदारी समझनी होगी।
गंगा का बहाव सामान्य नदी जैसा नहीं है। थोड़ी सी लापरवाही भी जिंदगी छीन सकती है। गर्मी बढ़ने के साथ ऋषिकेश में पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यदि सुरक्षा व्यवस्था और जागरूकता पर गंभीरता से काम नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में हादसों का आंकड़ा और बढ़ सकता है।
कब-कब हुई गंगा में डूबने की घटनाएं
- 1 मई को 18 वर्षीय वंश निवासी निजामपुर, दिल्ली मालाकुंठी क्षेत्र में गंगा में डूब गया।
- 9 मई को 20 वर्षीय हर्षित उपाध्याय निवासी भिकियासैंण, अल्मोड़ा भागीरथी घाट पर गंगा में डूब गया।
- 14 मई को 16 वर्षीय आशीष कुमार निवासी सागरपुर, जनकपुरी पांडू पत्थर के समीप गंगा में डूब गया।
- 14 मई को साईं घाट पर 30 वर्षीय सोनू वर्मा निवासी सराय, मालवीय नगर गंगा में डूब गया।
- 16 मई को नमामि गंगे घाट पर 24 वर्षीय वेद प्रकाश निवासी चचियावास, राजस्थान गंगा में डूब गया।
- 21 मई को अमरोहा के दो युवक मोहम्मद कैफ व मोहम्मद फैजान लक्ष्मण झूला के समीप गंगा में बह गए।
- 24 मई को दून निवासी आयुष थापा (17) त्रिवेणीघाट के समीप गंगा में डूब गया था।
- 25 मई को तपोवन स्थित सच्चा धाम घाट पर नहाते समय नोएडा निवासी चंदन यादव (21) डूब गया था।
- 28 मई को सिंगटाली में मेरठ के पर्यटक ऋतु (30) निवासी मेरठ तथा नरेश उपाध्याय (42) निवासी मेरठ गंगा बह गए।
इन बातों का विशेष ध्यान रखें
- केवल निर्धारित और सुरक्षित घाटों पर ही स्नान करें, तेज बहाव वाले क्षेत्रों और गहरे पानी में जाने से बचें, चेतावनी बोर्ड और पुलिस-प्रशासन के निर्देशों का पालन करें, सेल्फी लेने या वीडियो बनाने के दौरान नदी के किनारे अत्यधिक आगे न जाएं, पानी में गिरे मोबाइल, चश्मा या अन्य सामान निकालने के लिए गहराई में न उतरें, बच्चों को अकेला नदी किनारे न छोड़ें और उन पर लगातार नजर रखें, नशे की हालत में गंगा में उतरने से बचें, बारिश या जलस्तर बढ़ने की स्थिति में नदी से दूरी बनाए रखें, यदि तैरना नहीं आता तो कम पानी वाले क्षेत्र में ही रहें, समूह में स्नान करें और किसी आपात स्थिति में तुरंत पुलिस या जल पुलिस को सूचना दें।