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Rishikesh News: नीलकंठ क्षेत्र में धड़ल्ले से की जा रही है अवैध बोरिंग
Tue, 25 Feb 2025 01:33 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Tue, 25 Feb 2025 01:33 AM IST
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विकासखंड के नीलकंठ क्षेत्र में बिना अनुमति के बोरिंग की जा रही है। जिसका प्रभाव भूमिगत जलस्तर पर पड़ रहा है। वहीं क्षेत्र में की जा रही अंधाधुंध बोरिंग पर प्रशासन भी कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहा है।
यमकेश्वर के नीलकंठ, बैरागढ़, मोहन चट्टी, घट्टू गाड, नैल, दिउली, जुलेडी, कोठार, भौंन, पीपल कोटी, जुड्डा, खैरखाल, त्याड़ो आदि क्षेत्रों में पिछले पांच वर्षों में सैकड़ों बोरिंग की गई हैं। मोहन चट्टी हैंवल घाटी क्षेत्र में 200 से अधिक रिजॉर्ट व होटल हैं। पेयजल के लिए यहां प्रत्येक रिजॉर्ट में एक या दो बोरिंग की गई हैं। इसके लिए जल संस्थान से कोई अनुमति नहीं ली जाती है।
मई-जून माह में सबसे ज्यादा पानी की समस्या नीलकंठ, दिउली, जुलेडी, बुकंडी, पीपलकोटी क्षेत्रों में रहती है। पानी के लिए दर्जनों गांवों के लोगों को टैंकरों के सहारे रहना पड़ता है। वर्ष 2024 में लगभग दो माह तक दिउली नीलकंठ क्षेत्र में टैंकरों से जलापूर्ति की गई थी। बावजूद इसके इसी क्षेत्र में सबसे अधिक अवैध बोरिंग की गई है।
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नियमानुसार पहाड़ी क्षेत्रों में एक बोरिंग के 300 मीटर के दायरे तक दूसरी बोरिंग नहीं करवा सकते। यहां इस नियम को भी नजर अंदाज किया जा रहा है।
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बोरिंग का कार्य रुकवाया
राजस्व उप निरीक्षक भूपेंद्र सिंह ने सोमवार को बुकंडी गांव के बेलवाला क्षेत्र में हो रही बोरिंग को रुकवाया। यहां रविवार देर शाम से बोरिंग की जा रही थी। राजस्व उप निरीक्षक ने बताया कि बेलवाला में बोरिंग करवा रहा व्यक्ति कोई अनुमति कागजात नहीं दिखा पाया।
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- यमकेश्वर के नीलकंठ, बैरागढ़, घट्टू गाड, दिउली, जुलेडी आदि क्षेत्रों से जल संस्थान के पास अनुमति के लिए पिछले पांच वर्षों से कोई आवेदन नहीं आया है। जो भी बोरिंग हुई है वह अवैध हैं। क्षेत्र से केवल भवन निर्माण अनुमति के लिए कुछ आवेदन मिले हैं। - शूरवीर सिंह चौहान, अवर सहायक अभियंता जल संस्थान, कोटद्वार
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- निजी भूमि पर बोरिंग के लिए जल संस्थान से अनुमति लेनी अनिवार्य है। बिना अनुमति बोरिंग करने पर जुर्माना सहित कार्रवाई की जा सकती है। - अनिल चिन्याल एसडीएम यमकेश्वर
यमकेश्वर के नीलकंठ, बैरागढ़, मोहन चट्टी, घट्टू गाड, नैल, दिउली, जुलेडी, कोठार, भौंन, पीपल कोटी, जुड्डा, खैरखाल, त्याड़ो आदि क्षेत्रों में पिछले पांच वर्षों में सैकड़ों बोरिंग की गई हैं। मोहन चट्टी हैंवल घाटी क्षेत्र में 200 से अधिक रिजॉर्ट व होटल हैं। पेयजल के लिए यहां प्रत्येक रिजॉर्ट में एक या दो बोरिंग की गई हैं। इसके लिए जल संस्थान से कोई अनुमति नहीं ली जाती है।
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मई-जून माह में सबसे ज्यादा पानी की समस्या नीलकंठ, दिउली, जुलेडी, बुकंडी, पीपलकोटी क्षेत्रों में रहती है। पानी के लिए दर्जनों गांवों के लोगों को टैंकरों के सहारे रहना पड़ता है। वर्ष 2024 में लगभग दो माह तक दिउली नीलकंठ क्षेत्र में टैंकरों से जलापूर्ति की गई थी। बावजूद इसके इसी क्षेत्र में सबसे अधिक अवैध बोरिंग की गई है।
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नियमानुसार पहाड़ी क्षेत्रों में एक बोरिंग के 300 मीटर के दायरे तक दूसरी बोरिंग नहीं करवा सकते। यहां इस नियम को भी नजर अंदाज किया जा रहा है।
बोरिंग का कार्य रुकवाया
राजस्व उप निरीक्षक भूपेंद्र सिंह ने सोमवार को बुकंडी गांव के बेलवाला क्षेत्र में हो रही बोरिंग को रुकवाया। यहां रविवार देर शाम से बोरिंग की जा रही थी। राजस्व उप निरीक्षक ने बताया कि बेलवाला में बोरिंग करवा रहा व्यक्ति कोई अनुमति कागजात नहीं दिखा पाया।
- यमकेश्वर के नीलकंठ, बैरागढ़, घट्टू गाड, दिउली, जुलेडी आदि क्षेत्रों से जल संस्थान के पास अनुमति के लिए पिछले पांच वर्षों से कोई आवेदन नहीं आया है। जो भी बोरिंग हुई है वह अवैध हैं। क्षेत्र से केवल भवन निर्माण अनुमति के लिए कुछ आवेदन मिले हैं। - शूरवीर सिंह चौहान, अवर सहायक अभियंता जल संस्थान, कोटद्वार
- निजी भूमि पर बोरिंग के लिए जल संस्थान से अनुमति लेनी अनिवार्य है। बिना अनुमति बोरिंग करने पर जुर्माना सहित कार्रवाई की जा सकती है। - अनिल चिन्याल एसडीएम यमकेश्वर