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ट्रैकिंग के लिए पुराना बदरीनाथ यात्रा मार्ग है तैयार, एक बार तो आइए
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साहसिक पर्यटन के शौकीन हैं तो ट्रैकिंग के लिए बदरीनाथ का पुराना यात्रा मार्ग सबसे बेहतरीन विकल्प है। इस रूट पर जहां जन्नत सी खूबसूरती दिखेगी, वहीं घाटियों के बीच इठलाती गंगा नदी नजर आएगी। 10 किलोमीटर लंबे रूट पर ट्रैकिंग के लिए कई टूर ऑपरेटर दल-बल के साथ पहुंच चुके हैं। दूर दराज से आने वाले ट्रैकरों को गंगा नदी के किनारे का ट्रैक काफी पसंद आ रहा है।
तीर्थनगरी में पूरे साल पर्यटकों का आवागमन लगा रहता है, सबसे ज्यादा भीड़ गर्मियों और वीकेंड पर उमड़ती है। आजकल गंगा नदी में पानी बढ़ने से राफ्टिंग का संचालन बंद कर दिया गया है, जिसकी वजह से यहां आने वाले रोमांच के शौकीन मायूस हो रहे हैं। अगर आप ट्रैकिंग का शौक रखते हैं तो ऋषिकेश से 35 किलोमीटर दूर (बदरीनाथ मार्ग पर) महादेवचट्टी धार में जाकर ट्रैकिंग शुरू कर सकते हैं। ट्रैकिंग का जो 10 किलोमीटर का रूट है, उसका प्रयोग 90 के दशक तक बदरीनाथ की यात्रा पर जाने वाले साधु संत पैदल यात्रा के लिए करते थे। इस ट्रैकिंग रूट का रखरखाव लोनिवि लैंसडौन की ओर से किया जाता है। रूट की चौड़ाई करीब नौ फीट है। यदि कोई दल ऋषिकेश से महादेवचट्टी पहुंचकर वहां से ट्रैकिंग शुरू करता है तो 10 किमी बाद जहां ट्रैकिंग रूट खत्म होता है, वहां से ट्रैकर्स टैक्सी में बैठकर आगे ब्यासचट्टी, देवप्रयाग होते हुए वापस ऋषिकेश आ सकते हैं।
कैसे पहुंचे ट्रैकिंग रूट तक
- ऋषिकेश से प्राइवेट बस या टैक्सी से (एनएच 58) 35 किमी आगे महादेव चट्टी।
- महादेवचट्टी में उतरकर नीचे गंगा नदी की ओर से 1.50 किमी ट्रैक से महादेवचट्टी झूला पुल तक पहुंचना होगा।
- यह झूला पुल करीब 150 मीटर लंबा है।
- इस झूला पुल को पार करते ही गंगापार(पौड़ी जिले की साइड) बदरीनाथ पैदल यात्रा पर मार्ग मिलेगा।
- इस पैदल यात्रा मार्ग पर आगे देवप्रयाग की ओर ट्रैकिंग शुरू कर सकते हैं।
- ट्रैकिंग रूट पर पहले रामपाटी, कोटली भेल वाटर फॉल, कोटली भेल पहाड़ी होते आगे सिमालू गांव तक पहुंचा जा सकेगा।
- 10 किलोमीटर का यह ट्रैकिंग रूट गंगा नदी के किनारे है।
ट्रैकिंग रूट की खासियत
लोग ऋषिकेश से गरतांग गली (उत्तरकाशी) देखने के लिए 350 किलोमीटर दूर जाते हैं। इसी ट्रैकिंग रूट पर गरतांग गली की तरह खड़ी पहाड़ी को काटकर रास्ता बनाया गया है। इस खड़ी पहाड़ी के नीचे गंगा नदी बहती है। इस पहाड़ी को कोटली भेल के नाम से जाता है। इस रास्ता का निर्माण ब्रिटिश शासनकाल में 1905 में किया गया था। कई पर्यटक इस पहाड़ी को देखने के लिए भी आते हैं। कई विदेशी पर्यटक इस पहाड़ी पर डाक्यूमेंट्री बना चुके हैं।
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क्या कहते हैं स्थानीय लोग
- महादेवचट्टी से सिमालू गांव तक बदरीनाथ यात्रा मार्ग पर ट्रैकिंग शुरू होने की सूचना का प्रचार नहीं होने से यहां बहुत कम टूर ऑपरेटर ही अपने दल को लाते हैं। यदि पर्यटन विभाग इस ट्रैकिंग रूट का प्रचार-प्रसार करे तो यहां सैकड़ों पर्यटक आ सकते हैं। सबसे नजदीक और सबसे अच्छा है।
- राजीव बिष्ट, स्थानीय निवासी
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तीर्थनगरी में पूरे साल पर्यटकों का आवागमन लगा रहता है, सबसे ज्यादा भीड़ गर्मियों और वीकेंड पर उमड़ती है। आजकल गंगा नदी में पानी बढ़ने से राफ्टिंग का संचालन बंद कर दिया गया है, जिसकी वजह से यहां आने वाले रोमांच के शौकीन मायूस हो रहे हैं। अगर आप ट्रैकिंग का शौक रखते हैं तो ऋषिकेश से 35 किलोमीटर दूर (बदरीनाथ मार्ग पर) महादेवचट्टी धार में जाकर ट्रैकिंग शुरू कर सकते हैं। ट्रैकिंग का जो 10 किलोमीटर का रूट है, उसका प्रयोग 90 के दशक तक बदरीनाथ की यात्रा पर जाने वाले साधु संत पैदल यात्रा के लिए करते थे। इस ट्रैकिंग रूट का रखरखाव लोनिवि लैंसडौन की ओर से किया जाता है। रूट की चौड़ाई करीब नौ फीट है। यदि कोई दल ऋषिकेश से महादेवचट्टी पहुंचकर वहां से ट्रैकिंग शुरू करता है तो 10 किमी बाद जहां ट्रैकिंग रूट खत्म होता है, वहां से ट्रैकर्स टैक्सी में बैठकर आगे ब्यासचट्टी, देवप्रयाग होते हुए वापस ऋषिकेश आ सकते हैं।
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कैसे पहुंचे ट्रैकिंग रूट तक
- ऋषिकेश से प्राइवेट बस या टैक्सी से (एनएच 58) 35 किमी आगे महादेव चट्टी।
- महादेवचट्टी में उतरकर नीचे गंगा नदी की ओर से 1.50 किमी ट्रैक से महादेवचट्टी झूला पुल तक पहुंचना होगा।
- यह झूला पुल करीब 150 मीटर लंबा है।
- इस झूला पुल को पार करते ही गंगापार(पौड़ी जिले की साइड) बदरीनाथ पैदल यात्रा पर मार्ग मिलेगा।
- इस पैदल यात्रा मार्ग पर आगे देवप्रयाग की ओर ट्रैकिंग शुरू कर सकते हैं।
- ट्रैकिंग रूट पर पहले रामपाटी, कोटली भेल वाटर फॉल, कोटली भेल पहाड़ी होते आगे सिमालू गांव तक पहुंचा जा सकेगा।
- 10 किलोमीटर का यह ट्रैकिंग रूट गंगा नदी के किनारे है।
ट्रैकिंग रूट की खासियत
लोग ऋषिकेश से गरतांग गली (उत्तरकाशी) देखने के लिए 350 किलोमीटर दूर जाते हैं। इसी ट्रैकिंग रूट पर गरतांग गली की तरह खड़ी पहाड़ी को काटकर रास्ता बनाया गया है। इस खड़ी पहाड़ी के नीचे गंगा नदी बहती है। इस पहाड़ी को कोटली भेल के नाम से जाता है। इस रास्ता का निर्माण ब्रिटिश शासनकाल में 1905 में किया गया था। कई पर्यटक इस पहाड़ी को देखने के लिए भी आते हैं। कई विदेशी पर्यटक इस पहाड़ी पर डाक्यूमेंट्री बना चुके हैं।
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क्या कहते हैं स्थानीय लोग
- महादेवचट्टी से सिमालू गांव तक बदरीनाथ यात्रा मार्ग पर ट्रैकिंग शुरू होने की सूचना का प्रचार नहीं होने से यहां बहुत कम टूर ऑपरेटर ही अपने दल को लाते हैं। यदि पर्यटन विभाग इस ट्रैकिंग रूट का प्रचार-प्रसार करे तो यहां सैकड़ों पर्यटक आ सकते हैं। सबसे नजदीक और सबसे अच्छा है।
- राजीव बिष्ट, स्थानीय निवासी