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बिना सुरक्षा उपकरणों के कर्मचारियों की सीवर लाइन में उतारा तो दर्ज होगा मुकदमा: बबन रावत
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ऋषिकेश। राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष बबन रावत ने नगर निगम सभागार में सफाई कर्मचारियों की समस्याओं को सुना। इस दौरान उन्होंने कहा कि यदि बिना सुरक्षा उपकरणों को किसी भी कार्यदायी संस्था ने कर्मचारियों को सीवर लाइन में उतारा तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। सफाई कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण न देने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई होगी। सीवर लाइन में काम के दौरान अनहोनी होने पर 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।
शुक्रवार को ऋषिकेश पहुंचने पर राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष बबन रावत ने लोनिवि के गेस्ट हाउस में नगर निगम के अधिकारियों से वार्ता की। इसके बाद उन्होंने नगर निगम सभागार में कर्मचारियों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान जल संस्थान की सीवर विंग के अधिकारी और नगर निगम को आउटसोर्स के माध्यम कर्मचारी उपलब्ध कराने वाले ठेकेदार से भी वार्ता की। उन्होंने कहा कि यदि ठेकेदार सफाई कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण नहीं देता है तो उस ठेकेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। इस दौरान उन्होंने जल संस्थान की सीवर विंग के सहायक अभियंता हरीश बंसल से भी सफाई कर्मचारियों को विभागीय ठेकेदार की ओर से उन्हें दी रही सुविधाओं के बारे में जानकारी हासिल की। उन्होंने कहा कि ठेकेदार के माध्यम से काम करने वाले सफाई कर्मियों की सभी सुविधाओं की मॉनिटरिंग अधिकारी समय-समय पर करें। यदि सफाई कर्मचारियों को सीवर की लाइन में उतारा जाता है तो उनके पास ऑक्सीजन सिलिंडर, बूट और उपकरण हो। काम के दौरान यदि कर्मचारी की मौत हो जाती है तो परिजनों को विभाग की ओर से 10 लाख की आर्थिक सहयता दी जाएगी। उत्तराखंड में सिर पर मैला ढोने की प्रथा अब समाप्त हो गई है। केंद्र और राज्य सरकार सफाई कर्मचारियों के लिए जितनी भी योजनाएं चला रही हैं उनका शत-प्रतिशत अनुपालन होना चाहिए, जो सफाई कर्मी निकाय से दूर रह रहे हैं, उनके लिए आवास की सुविधा के लिए सरकार को सुझाव दिया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सफाई कर्मचारियों को भी सम्मानित किया। बैठक में मुख्य नगर आयुक्त एनएस क्वीरियाल, सहायक नगर आयुक्त एलम दास, विनोद लाल, सफाई निरीक्षक सचिन रावत, डीडी सेमवाल, अभिषेक मल्होत्रा, रविंद्र बिरला, कुलदीप भारती, गौरी, मीना, लक्ष्मी, पुष्पा आदि थे।
विज्ञापन की प्रतियां जलाई
राज्य कर्मचारी चयन आयोग की ओर से शहरी विकास विभाग में पर्यावरण पर्यवेक्षकों (सुपरवाइजर के पद) के 291 पदों के लिए जो विज्ञप्ति निकाली गई है, उसमें इंटरमीडिएट विज्ञान से स्नातक उत्तीर्ण होना मांगा गया है। जबकि सफाई कर्मचारियों का कहना था कि प्रदेश के अलग निकायों में जो सफाई नायक काम कर रहे हैं, उनका प्रमोशन कर उन्हें इन पदों पर समायोजित किया जाए। बाकी जो पद बचते हैं उन पर सरकार भर्ती कर सकती है।
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पांच सूत्रीय मांग पत्र सौंपा
संयुक्त संघर्ष समिति सफाई कर्मचारी नगर निगम ऋषिकेश की ओर से राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष बबन रावत को पांच सूत्रीय मांग पत्र सौंपा गया। मोहल्ला स्वच्छता समिति में काम कर रहे कर्मचारियों को 9500 रुपये वेतन देने, आउटसोर्स से काम कर रहे कर्मचारियों को 350 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान करने, 16 संविदा कर्मचारियों को जिन्हें आउटसोर्स में लिया गया था उन्हें दोबारा संविदा में लेने, निकायों में ठेका प्रथा बंद करने करने, पर्यावरण प्रेक्षकों की 291 पदों पर सफाई हवलदारों को पदोन्नति देने की मांग गई।
इंतजार करवाने पर भड़के कर्मचारी
नगर निगम सभागार में राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष बबन रावत का प्रोटोकॉल में सुबह दस बजे का समय था, इस दौरान सफाई कर्मचारी नगर निगम सभागार में उपाध्यक्ष का इंतजार करते रहे। इस दौरान कर्मचारी भड़क गए। दो बजे वह नगर निगम सभागार पहुंचे और कर्मचारियों की समस्याएं सुनीं।
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शुक्रवार को ऋषिकेश पहुंचने पर राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष बबन रावत ने लोनिवि के गेस्ट हाउस में नगर निगम के अधिकारियों से वार्ता की। इसके बाद उन्होंने नगर निगम सभागार में कर्मचारियों की समस्याएं सुनीं। इस दौरान जल संस्थान की सीवर विंग के अधिकारी और नगर निगम को आउटसोर्स के माध्यम कर्मचारी उपलब्ध कराने वाले ठेकेदार से भी वार्ता की। उन्होंने कहा कि यदि ठेकेदार सफाई कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण नहीं देता है तो उस ठेकेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा। इस दौरान उन्होंने जल संस्थान की सीवर विंग के सहायक अभियंता हरीश बंसल से भी सफाई कर्मचारियों को विभागीय ठेकेदार की ओर से उन्हें दी रही सुविधाओं के बारे में जानकारी हासिल की। उन्होंने कहा कि ठेकेदार के माध्यम से काम करने वाले सफाई कर्मियों की सभी सुविधाओं की मॉनिटरिंग अधिकारी समय-समय पर करें। यदि सफाई कर्मचारियों को सीवर की लाइन में उतारा जाता है तो उनके पास ऑक्सीजन सिलिंडर, बूट और उपकरण हो। काम के दौरान यदि कर्मचारी की मौत हो जाती है तो परिजनों को विभाग की ओर से 10 लाख की आर्थिक सहयता दी जाएगी। उत्तराखंड में सिर पर मैला ढोने की प्रथा अब समाप्त हो गई है। केंद्र और राज्य सरकार सफाई कर्मचारियों के लिए जितनी भी योजनाएं चला रही हैं उनका शत-प्रतिशत अनुपालन होना चाहिए, जो सफाई कर्मी निकाय से दूर रह रहे हैं, उनके लिए आवास की सुविधा के लिए सरकार को सुझाव दिया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सफाई कर्मचारियों को भी सम्मानित किया। बैठक में मुख्य नगर आयुक्त एनएस क्वीरियाल, सहायक नगर आयुक्त एलम दास, विनोद लाल, सफाई निरीक्षक सचिन रावत, डीडी सेमवाल, अभिषेक मल्होत्रा, रविंद्र बिरला, कुलदीप भारती, गौरी, मीना, लक्ष्मी, पुष्पा आदि थे।
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राज्य कर्मचारी चयन आयोग की ओर से शहरी विकास विभाग में पर्यावरण पर्यवेक्षकों (सुपरवाइजर के पद) के 291 पदों के लिए जो विज्ञप्ति निकाली गई है, उसमें इंटरमीडिएट विज्ञान से स्नातक उत्तीर्ण होना मांगा गया है। जबकि सफाई कर्मचारियों का कहना था कि प्रदेश के अलग निकायों में जो सफाई नायक काम कर रहे हैं, उनका प्रमोशन कर उन्हें इन पदों पर समायोजित किया जाए। बाकी जो पद बचते हैं उन पर सरकार भर्ती कर सकती है।
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पांच सूत्रीय मांग पत्र सौंपा
संयुक्त संघर्ष समिति सफाई कर्मचारी नगर निगम ऋषिकेश की ओर से राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष बबन रावत को पांच सूत्रीय मांग पत्र सौंपा गया। मोहल्ला स्वच्छता समिति में काम कर रहे कर्मचारियों को 9500 रुपये वेतन देने, आउटसोर्स से काम कर रहे कर्मचारियों को 350 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान करने, 16 संविदा कर्मचारियों को जिन्हें आउटसोर्स में लिया गया था उन्हें दोबारा संविदा में लेने, निकायों में ठेका प्रथा बंद करने करने, पर्यावरण प्रेक्षकों की 291 पदों पर सफाई हवलदारों को पदोन्नति देने की मांग गई।
इंतजार करवाने पर भड़के कर्मचारी
नगर निगम सभागार में राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष बबन रावत का प्रोटोकॉल में सुबह दस बजे का समय था, इस दौरान सफाई कर्मचारी नगर निगम सभागार में उपाध्यक्ष का इंतजार करते रहे। इस दौरान कर्मचारी भड़क गए। दो बजे वह नगर निगम सभागार पहुंचे और कर्मचारियों की समस्याएं सुनीं।