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गंगा की तरह पवित्र होता है संतों का हृदय- मुरारी बापू
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ब्रह्मपुरी स्थित रामस्थली आश्रम में संतों ने किया मोरारी बापू का स्वागत
ऋषिकेश। विश्व प्रसिद्ध संत मोरारी बापूू ब्रह्मपुरी स्थित रामस्थली आश्रम पहुंचे, जहां पर अखिल भारतीय संत समिति विरक्त वैष्णव मंडल के सभी महामंडलेश्वर और महंतों ने मुरारी बापू का स्वागत किया। मोरारी बापू ने कहा कि संतों का हृदय गंगा की तरह पवित्र होता है। आश्रम के संस्थापक अध्यक्ष महामंडलेश्वर दयाराम दास की अध्यक्षता में ऋषि कुमारों ने मोरारी बापू पर पुष्प वर्षा की।
महामंडलेश्वर दयाराम दास और महामंडलेश्वर ईश्वर दास ने समस्त संत समाज की ओर से मुरारी बापू को तुलसी का पौधा भेंट किया। इसके बाद मुरारी बापू ने ब्रह्मपुरी में गंगा तट पूजा अर्चना, दुग्धाभिषेक और मां गंगा की आरती की। मुरारी बापू ने कहा कि संत समागम, हरि कथा, संतों का जहां भी सत्संग हो, जहां भी संतों का दर्शन हो वह स्थान कभी भी किसी मानव को छोड़ना नहीं चाहिए। तुरंत संतों के दर्शन कर लेना चाहिए, यह बड़े भाग्य से प्राप्त होते हैं। संतों का ह्रदय गंगा के जैसे पवित्र निर्मल व सरल रहता है, बापू ने रामकथा में देवप्रयाग जाने से पूर्व ब्रह्मपुरी में सभी संतो के साथ बैठकर राम नाम संकीर्तन किया। इस अवसर पर महामंडलेश्वर अभिराम दास, महंत महावीर दास, महंत सुरेश दास, महंत चक्रपाणि दास, महंत लोकेश दास, पंडित रवि शास्त्री, दीपक दास, अभिषेक शर्मा आदि उपस्थित थे।
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ऋषिकेश। विश्व प्रसिद्ध संत मोरारी बापूू ब्रह्मपुरी स्थित रामस्थली आश्रम पहुंचे, जहां पर अखिल भारतीय संत समिति विरक्त वैष्णव मंडल के सभी महामंडलेश्वर और महंतों ने मुरारी बापू का स्वागत किया। मोरारी बापू ने कहा कि संतों का हृदय गंगा की तरह पवित्र होता है। आश्रम के संस्थापक अध्यक्ष महामंडलेश्वर दयाराम दास की अध्यक्षता में ऋषि कुमारों ने मोरारी बापू पर पुष्प वर्षा की।
महामंडलेश्वर दयाराम दास और महामंडलेश्वर ईश्वर दास ने समस्त संत समाज की ओर से मुरारी बापू को तुलसी का पौधा भेंट किया। इसके बाद मुरारी बापू ने ब्रह्मपुरी में गंगा तट पूजा अर्चना, दुग्धाभिषेक और मां गंगा की आरती की। मुरारी बापू ने कहा कि संत समागम, हरि कथा, संतों का जहां भी सत्संग हो, जहां भी संतों का दर्शन हो वह स्थान कभी भी किसी मानव को छोड़ना नहीं चाहिए। तुरंत संतों के दर्शन कर लेना चाहिए, यह बड़े भाग्य से प्राप्त होते हैं। संतों का ह्रदय गंगा के जैसे पवित्र निर्मल व सरल रहता है, बापू ने रामकथा में देवप्रयाग जाने से पूर्व ब्रह्मपुरी में सभी संतो के साथ बैठकर राम नाम संकीर्तन किया। इस अवसर पर महामंडलेश्वर अभिराम दास, महंत महावीर दास, महंत सुरेश दास, महंत चक्रपाणि दास, महंत लोकेश दास, पंडित रवि शास्त्री, दीपक दास, अभिषेक शर्मा आदि उपस्थित थे।
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