{"_id":"1bffdd3824bd331896c5c778ca1880c9","slug":"gangajal-use-in-mobile-toilet-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मोबाइल टॉयलेट में हो रहा गंगा जल का प्रयोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मोबाइल टॉयलेट में हो रहा गंगा जल का प्रयोग
मनोज सिंह राणा/अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 22 Feb 2016 04:32 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गंगा स्नान के विशेष महात्म्य को लेकर आयोजित अर्द्धकुंभ मेले में मोक्षदायिनी का महत्व कम होता दिख रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मेला क्षेत्र में मोबाइल टॉयलेट की व्यवस्था तो गई, लेकिन इनके उपयोग और हाथ धोने के लिए पानी का प्रबंध नहीं किया गया।
विज्ञापन
लिहाजा शौच के लिए लोग गंगा जल का इस्तेमाल कर रहे हैं। इतना ही नहीं शौच के बाद लोग नदी में ही हाथ धो रहे हैं। इससे मोक्षदायिनी प्रदूषित हो रही है। लेकिन इस ओर कुंभ मेला प्रशासन, गंगा स्वच्छता के गीत गाने वाली सरकारी, गैर सरकारी संगठन उदासीन बने हुए हैं।
विज्ञापन
कहां गया करोड़ों का खर्च
कुंभ मेला प्रशासन ने तीर्थ क्षेत्र में उमड़ने वालों श्रद्धालुओं की सुविधा के नाम पर करोड़ों खर्च करने का दावा किया है। लेकिन धरातल पर सुविधाओं के नाम पर सब कुछ शून्य सा लगता है। हर जगह अव्यवस्थाओं का आलम इसकी गवाही दे रहा है। मेला प्रशासन की ओर से तीर्थाटकों की सुविधा के लिए मुनिकीरेती में खारा स्रोत के समीप नदी तट पर दस सीटर मोबाइल टॉयलेट लगाया गया है। लेकिन इसमें शौचालय का इस्तेमाल करने वाले लोगों को साफ-सफाई के लिए पानी का कोई प्रबंध नहीं किया। लिहाजा शौचालय में गंदगी व्याप्त है।
विज्ञापन
इससे आसपास दुर्गंध और संक्रामक बीमारियों का फैलने का खतरा बना हुआ है। स्थानीय राफ्ट संचालकों और नागरिकों की मानें तो मोबाइल टॉयलेट को यहां लगे हुए एक सप्ताह से अधिक का समय बीत चुका है। लेकिन शौचालय में उपयोग और साफ-सफाई के लिए पानी की व्यवस्था नहीं जुटाई गई है। लिहाजा लोग टॉयलेट में गंगाजल का प्रयोग करने को मजबूर हैं और पतित पावनी में प्रदूषण बढ़ रहा है।
इनका है कहना
मामला संज्ञान में नहीं आया है। यदि ऐसा है तो जल्द मोबाइल टॉयलेट में पानी का प्रबंध कराया जाएगा। ताकि गंगा में प्रदूषण न हो।
-अवधेश कुमार, अपर मेलाधिकारी, अर्द्धकुंभ मेला