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Rishikesh News: फर्जी नियुक्ति पत्र मामले में पांचवें आरोपी की जमानत खारिज
Fri, 25 Sep 2026 06:13 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Fri, 25 Sep 2026 06:13 PM IST
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- चार आरोपियों की पूर्व में हो चुकी है जमानत खारिज
- एम्स किच्छा सेटेलाइट सेंटर में नौकरी लगवाने के नाम पर रकम लेने का आरोप
ऋषिकेश। एम्स के किच्छा स्थित सेटेलाइट सेंटर में नौकरी लगवाने के नाम पर धनराशि लेने और कथित तौर पर फर्जी नियुक्तिपत्र जारी करने के मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने पांचवें आरोपी दीपक गुसाईं की जमानत अर्जी भी खारिज कर दी है। चार आरोपियों की जमानत याचिका अदालत पूर्व में ही खारिज कर चुकी है।
दीपक गुसाईं ने जमानत के लिए अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विनोद कुमार बर्मन की अदालत में प्रार्थनापत्र दायर किया था। अभियोजन की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि आरोपियों ने अन्य सहआरोपियों के साथ मिलकर एम्स के किच्छा स्थित सेटेलाइट सेंटर में भर्ती के नाम पर अभ्यर्थियों से धनराशि ली और उन्हें कथित रूप से फर्जी नियुक्तिपत्र जारी किए। अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी से फर्जी भर्ती के नाम पर ली गई 2 लाख की धनराशि भी बरामद की गई है। जमानत के लिए दोनों पक्षों को सुनने और पुलिस की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने कहा कि आरोपी के विरुद्ध लगाए गए अपराध की प्रकृति गंभीर है। मामले के तथ्यों व परिस्थितियों को देखते हुए जमानत का पर्याप्त आधार नहीं बनता। आरोपी सुब्रत बछाड़, दीपना हलदार, दीपांशु मंडल और गणेश निसार की ओर से अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विनोद कुमार बर्मन की अदालत में जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल किए गए थे जिन्हें पूर्व में ही खारिज किया जा चुका है। पांचों आरोपियों को 17 सितंबर को गिरफ्तार किया था।
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- एम्स किच्छा सेटेलाइट सेंटर में नौकरी लगवाने के नाम पर रकम लेने का आरोप
ऋषिकेश। एम्स के किच्छा स्थित सेटेलाइट सेंटर में नौकरी लगवाने के नाम पर धनराशि लेने और कथित तौर पर फर्जी नियुक्तिपत्र जारी करने के मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने पांचवें आरोपी दीपक गुसाईं की जमानत अर्जी भी खारिज कर दी है। चार आरोपियों की जमानत याचिका अदालत पूर्व में ही खारिज कर चुकी है।
दीपक गुसाईं ने जमानत के लिए अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विनोद कुमार बर्मन की अदालत में प्रार्थनापत्र दायर किया था। अभियोजन की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि आरोपियों ने अन्य सहआरोपियों के साथ मिलकर एम्स के किच्छा स्थित सेटेलाइट सेंटर में भर्ती के नाम पर अभ्यर्थियों से धनराशि ली और उन्हें कथित रूप से फर्जी नियुक्तिपत्र जारी किए। अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी से फर्जी भर्ती के नाम पर ली गई 2 लाख की धनराशि भी बरामद की गई है। जमानत के लिए दोनों पक्षों को सुनने और पुलिस की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने कहा कि आरोपी के विरुद्ध लगाए गए अपराध की प्रकृति गंभीर है। मामले के तथ्यों व परिस्थितियों को देखते हुए जमानत का पर्याप्त आधार नहीं बनता। आरोपी सुब्रत बछाड़, दीपना हलदार, दीपांशु मंडल और गणेश निसार की ओर से अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विनोद कुमार बर्मन की अदालत में जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल किए गए थे जिन्हें पूर्व में ही खारिज किया जा चुका है। पांचों आरोपियों को 17 सितंबर को गिरफ्तार किया था।
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