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Rishikesh: कीटनाशक के अधिक प्रयोग से मूत्राशय के कैंसर की चपेट में आ रहे किसान, एम्स के शोध में खुलासा

Sun, 10 Dec 2023 02:04 PM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Sun, 10 Dec 2023 02:04 PM IST
सार

किसान खेतों में जिन कीटनाशकों का प्रयोग करते हैं वह कीटनाशक रिसकर भूमिगत जल में मिल रहे हैं। किसान खेतों या घरों के आस-पास कुएं, सबमर्सिबल व बोरवेल के पानी का प्रयोग पेयजल के रूप में करते हैं। यह पानी फिल्टर नहीं होता है। जिससे इसमें कीटनाशक की मात्रा शामिल रहती है। यही कीटनाशक वाला पानी किसानों में मूत्राशय के कैंसर का कारण बन रहा है।

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Farmers falling prey to bladder cancer due to excessive use of pesticides Rishikesh AIIMS Uttarakhand news
एम्स, ऋषिकेश - फोटो : Social Media

विस्तार

खेतों में अत्यधिक कीटनाशक का प्रयोग किसानों में मूत्राशय के कैंसर का कारण बन रहा है। कीटनाशक खेतों से रिसकर भूमिगत जल में मिल रहा है। कुंए, हैंंडपंप, बोरवेल व सबमर्सिबल के पानी का प्रयोग पेयजल के रूप में करने वाले किसान मूत्राशय के कैंसर से ग्रसित हो रहे हैं।

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एम्स के मेडिकल ओंकोलॉजी विभाग के चिकित्सकों ने मूत्राशय के कैंसर से ग्रसित 94 मरीजों पर शोध किया था। सभी मरीज उत्तराखंड व पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तराई वाले क्षेत्रों से थे। शोध में स्पष्ट हुआ कि मूत्राशय के कैंसर से ग्रसित मरीजों में 64 फीसदी लोग धूम्रपान करते हैं। जबकि 73 फीसदी लोग तराई वाले इलाकों से हैं जिनका मुख्य व्यवसाय कृषि है।
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शोधकर्ता व एम्स के हेमेटोलॉजी विभाग के डाॅ. दीपक सुंद्रियाल ने कहा कि किसान खेतों में जिन कीटनाशकों का प्रयोग करते हैं वह कीटनाशक रिसकर भूमिगत जल में मिल रहे हैं। किसान खेतों या घरों के आस-पास कुएं, सबमर्सिबल व बोरवेल के पानी का प्रयोग पेयजल के रूप में करते हैं। यह पानी फिल्टर नहीं होता है। जिससे इसमें कीटनाशक की मात्रा शामिल रहती है।
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डाॅ. दीपक ने बताया कि यही कीटनाशक वाला पानी किसानों में मूत्राशय के कैंसर का कारण बन रहा है। एम्स के चिकित्सकों का यह शोध इंडियन जर्नल ऑफ सर्जिकल ओंकोलॉजी में वर्ष 2022 में प्रकाशित हुआ है। शोध दल में डाॅ. दीपक के अलावा डाॅ. प्रमोद कुमार, डाॅ. अनिल सहरावत आदि शामिल थे।
 

मूत्राशय के कैंसर के कारण
मूत्राशय कैंसर का सबसे प्रमुख कारण धूम्रपान है। इसके साथ ही बिना फिल्टर किया गया पानी भी इसका कारण बन रहा है, जो तेजी से बढ़ रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि जो लोग धूम्रपान करते हैं उनमें धूम्रपान न करने वाले लोगों की तुलना में मूत्राशय कैंसर होने की संभावना कम से कम 3 गुना अधिक होती है। मूत्राशय के लगभग आधे कैंसर का कारण धूम्रपान है।

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मूत्राशय के कैंसर के लक्षणI
पेशाब में रक्त आना, मूत्राशय खाली करने में दिक्कत आना, पेशाब करते समय जलन, बार-बार पेशाब आना, पेशाब करते समय दर्द, पेट के निचले हिस्से या पीठ में दर्द आदि मूत्राशय के कैंसर के प्रमुख लक्षण हैं। डाॅ. दीपक कहते हैं कि इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं। प्राथमिक चरण में मूत्राशय के कैंसर का पता चलने पर 70 फीसदी ठीक होने की संभावना रहती है। जबकि बाद में यह संभावना 40 फीसदी ही रह जाती है।

लगातार बढ़ रहा आंकड़ाI
चिकित्सकों का कहना है कि भारत में प्रतिवर्ष 22 हजार मूत्राशय के कैंसर के मामले आते हैं। यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।

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