{"_id":"68b8a8e8919e9c1903072ce5","slug":"environmental-protection-collective-responsibility-rishikesh-news-c-5-1-drn1046-779971-2025-09-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"पर्यावरण संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी : जुगलान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पर्यावरण संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी : जुगलान
विज्ञापन
खदरी श्यामपुर स्थित हैप्पी होम मोंटेसरी स्कूल में स्वच्छ वायु दिवस जन जागरूकता सप्ताह कार्यशाला का आयोजन किया गया।
नगर निगम ऋषिकेश के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर और जिला गंगा संरक्षण समिति के सदस्य विनोद जुगलान ने कहा कि बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो रहा है। वास्तव में इन आपदाओं को बढ़ाने में हम सब भी जिम्मेदार हैं। पर्यावरण संरक्षण हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। जन जागरूकता से वायु और जल प्रदूषण को कम किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि देव भूमि उत्तराखंड में पर्यटन को नहीं तीर्थाटन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। पहाड़ में विकास की योजनाएं पहाड़ के अनुरूप बननी चाहिए। वायु प्रदूषण को कम करना है तो कार्बन उत्सर्जन करने वाले वाहनों के स्थान पर बैटरी चालित वाहन प्रयोग में लाने होंगे। हमारे हिमालयी प्रदेशों में परंपरागत शैली के घर बनाने के लिए एक पेड़ को काटने से पहले वन देवता की पूजा-अर्चना कर आज्ञा ली जाती थी। उच्च हिमालयी पहाड़ों में सीटी बजाने पर प्रतिबंध था।
कक्षा नौवीं की छात्रा मुस्कान ने कहा कि असल में विद्यार्थियों के साथ-साथ आम जनमानस को भी जागरूक करने की आवश्यकता है। लोग जागरूक होंगे तो देश की दिशा और दशा अवश्य बदलेगी। इस मौके पर विद्यालय निदेशक रमन शरण, प्रधानाचार्य रेनू शरण, कोमल घिल्डियाल, धनेश्वरी देवी, शिक्षक देवेन्द्र शुक्ला, अशोक कुमार, शुभम् मल्होत्रा आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
नगर निगम ऋषिकेश के स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर और जिला गंगा संरक्षण समिति के सदस्य विनोद जुगलान ने कहा कि बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो रहा है। वास्तव में इन आपदाओं को बढ़ाने में हम सब भी जिम्मेदार हैं। पर्यावरण संरक्षण हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। जन जागरूकता से वायु और जल प्रदूषण को कम किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि देव भूमि उत्तराखंड में पर्यटन को नहीं तीर्थाटन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। पहाड़ में विकास की योजनाएं पहाड़ के अनुरूप बननी चाहिए। वायु प्रदूषण को कम करना है तो कार्बन उत्सर्जन करने वाले वाहनों के स्थान पर बैटरी चालित वाहन प्रयोग में लाने होंगे। हमारे हिमालयी प्रदेशों में परंपरागत शैली के घर बनाने के लिए एक पेड़ को काटने से पहले वन देवता की पूजा-अर्चना कर आज्ञा ली जाती थी। उच्च हिमालयी पहाड़ों में सीटी बजाने पर प्रतिबंध था।
विज्ञापन
कक्षा नौवीं की छात्रा मुस्कान ने कहा कि असल में विद्यार्थियों के साथ-साथ आम जनमानस को भी जागरूक करने की आवश्यकता है। लोग जागरूक होंगे तो देश की दिशा और दशा अवश्य बदलेगी। इस मौके पर विद्यालय निदेशक रमन शरण, प्रधानाचार्य रेनू शरण, कोमल घिल्डियाल, धनेश्वरी देवी, शिक्षक देवेन्द्र शुक्ला, अशोक कुमार, शुभम् मल्होत्रा आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन