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यात्रा से लौटने पर चेकपोस्ट पर करानी होगी इंट्री
आलोक पंवार/ऋषिकेश।
Updated Sat, 15 Apr 2017 01:56 AM IST
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चारधाम यात्रा
- फोटो : Demo Pic
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पिछले वर्ष चारधाम यात्रा में वाहनों की कमी से तीर्थयात्रियों को हुई परेशानी से सबक लेते हुए राज्य परिवहन विभाग ने इस बार नई व्यवस्था लागू की है। इस बार एक धाम, दो धाम, तीन धाम और चार धाम यात्रा से लौटने पर प्रत्येक वाहन चालक को भद्रकाली और ब्रह्मपुरी स्थित विभाग के अस्थायी चेकपोस्ट पर इंट्री करानी होगी।
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इस व्यवस्था से चारधाम यात्रा में कितने वाहन संचालित हो रहे हैं इसकी सटीक जानकारी रहेगी। यही नहीं यात्रा में संचालित डग्गामार वाहनों पर भी रोक लग सकेगी। चारधाम यात्रा में परिवहन व्यवस्था का जिम्मा संयुक्त रोटेशन यात्रा व्यवस्था समिति पर है। समिति के अधीन नौ परिवहन कंपनियों के करीब 1400 सौ वाहन चारधाम यात्रा में संचालित होते हैं।
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राज्य परिवहन विभाग का मानना है यात्रा में समिति के वाहनों का संचालन मनमाने तरीके से होने के कारण यात्राकाल में वाहनों की कमी हो जाती है। इसका खामियाजा बाहरी प्रांतों से आने वाले तीर्थयात्रियों को भुगतना पड़ता है।
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संभागीय परिवहन अधिकारी सुधांशु गर्ग ने बताया कि वर्ष 2017 की चारधाम यात्रा में बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम से लौटने के बाद वाहन चालक को चेकपोस्ट पर इंट्री करानी होगी। इस व्यवस्था से जानकारी मिलेगी कि चारधाम यात्रा पूरी करने के बाद कितने वाहन लौटे हैं और यात्रा पर जाने के लिए कितने वाहनों की डिमांड है।
इससे वाहनों के मनमाने संचालन पर भी रोक लगेगी। परिवहन विभाग ने चारधाम यात्रा में संभावित हादसे की रोकथाम के लिए यात्रा रूट के सभी वाहन चालक, जो 40 वर्ष से अधिक हैं, उनका स्वास्थ्य परीक्षण अनिवार्य किया है।
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी डा. अनिता चमोला ने बताया कि कार्यालय में एक डाक्टर की तैनाती रहेगी, जो ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के तहत 40 वर्ष की आयु पार कर चुके वाहन चालक का स्वास्थ्य परीक्षण करेंगे। स्वास्थ्य परीक्षण में किसी तरह की कमी मिलने पर चालक को रोक दिया जाएगा।
मैदान और पहाड़ के सड़कों की भौगोलिक परिस्थितियां भिन्न हैं। संभावित हादसे की रोकथाम के लिए परिवहन विभाग चारधाम यात्रा पर यात्रा वाहन लेकर जाने वाले मैदानी क्षेत्र के चालक, जिनके पास हिल ड्राइविंग लाइसेंस नहीं हैं। उन्हें हरिद्वार बाईपास मार्ग स्थित सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय में डाक्यूमेंट्री फिल्म के माध्यम से पर्वतीय क्षेत्र की सड़कों के बारे में रूबरू कराया जाएगा।