{"_id":"5d3771228ebc3e6caa3bb03c","slug":"elephants-four-bigha-crops-of-chhat-paddy-rishikesh-news-drn313952410","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रतीतनगर में हाथी ने चट की धान की फसल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रतीतनगर में हाथी ने चट की धान की फसल
विज्ञापन
प्रतीतनगर रायवाला में हाथी द्वारा धान की फसल को पहुंचाया गया नुकसान
- फोटो : RISHIKESH
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजाजी टाईगर रिजर्व की सीमा से सटे प्रतीतनगर मेें जंगली हाथी नेेे जमकर उत्पात मचाया। हाथियों के झुंड ने देर रात जंगल की सीमा से सटी करीब चार बीघा धान की फसल चट कर दी।
मंगलवार सुबह प्रतीतनगर निवासी बलबीर सिंह, जगमोहन सिंह चौहान, प्यार सिंह कैंतुरा अपने खेतों में गए तो उन्होंने देखा कि उनकी धान की फसल हाथियों के झुंड ने चट कर दी। पीड़ित किसानों ने इसकी सूचना राजाजी टाईगर रिजर्व के रेंज अधिकारी को दी। इसके बाद मौके पर पहुंचे वनकर्मी ने किसानों को हुए फसली नुकसान का जायजा लिया और मुआवजा प्रक्रिया के लिए आवेदन करने की जानकारी दी। जिस पर किसान भड़क गए। उन्होंने वनकर्मी से वर्षों पुराने लंबित मुआवजे का भुगतान नहीं होने पर आक्रोश व्यक्त किया।
राजाजी टाईगर रिजर्व की सीमा से सटे गांवों के किसान जंगली जानवरों से हो रहे फसली नुकसान के चलते दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं। बीते पांच सालों से किसानों को दिया जाने वाला फसली नुकसान का मुआवजा लटका हुआ है। जिससे किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
सीमा से सटे किसानों को फसलों को बचाने के लिये रातभर जागकर जंगली जानवारों से सुरक्षा करने को मजबूर होना पड़ता है। किंतु इसके बाद भी जानवरों के झुंड खेतों में घुसकर फसल चट कर जाते हैं। इसके बाद फसली नुकसान का दंश झेल रहे किसानों को वन विभाग मुआवजे के लिए दौड़ाता है। बावजूद इसके किसानों को मुआवजा नहीं मिल पाता है। वन विभाग फसली मुआवजे के नाम पर बजट नहीं होने का हवाला देकर साल दस साल लटका रहा है। इसके चलते किसान चार सालों से मुआवजे के लिए आवेदन भी नहीं कर पा रहे हैं। खांडगावं के किसान और पूर्व ग्राम प्रधान रविंद्र सिंह नेगी ने बताया कि 2014 से किसानों को फसली मुआवजा नहीं दिया गया है। जबकि मुआवजा प्रक्रिया को और जटिल बनाया दिया गया है। इको विकास समिति प्रतीतनगर के अध्यक्ष राजेश जुगलान ने बताया कि किसानों की समस्य और पीड़ा से वन मंत्री को पत्र के माध्यम से अवगत कराया जाएगा।
विज्ञापन
मंगलवार सुबह प्रतीतनगर निवासी बलबीर सिंह, जगमोहन सिंह चौहान, प्यार सिंह कैंतुरा अपने खेतों में गए तो उन्होंने देखा कि उनकी धान की फसल हाथियों के झुंड ने चट कर दी। पीड़ित किसानों ने इसकी सूचना राजाजी टाईगर रिजर्व के रेंज अधिकारी को दी। इसके बाद मौके पर पहुंचे वनकर्मी ने किसानों को हुए फसली नुकसान का जायजा लिया और मुआवजा प्रक्रिया के लिए आवेदन करने की जानकारी दी। जिस पर किसान भड़क गए। उन्होंने वनकर्मी से वर्षों पुराने लंबित मुआवजे का भुगतान नहीं होने पर आक्रोश व्यक्त किया।
विज्ञापन
राजाजी टाईगर रिजर्व की सीमा से सटे गांवों के किसान जंगली जानवरों से हो रहे फसली नुकसान के चलते दोहरी मार झेलने को मजबूर हैं। बीते पांच सालों से किसानों को दिया जाने वाला फसली नुकसान का मुआवजा लटका हुआ है। जिससे किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
सीमा से सटे किसानों को फसलों को बचाने के लिये रातभर जागकर जंगली जानवारों से सुरक्षा करने को मजबूर होना पड़ता है। किंतु इसके बाद भी जानवरों के झुंड खेतों में घुसकर फसल चट कर जाते हैं। इसके बाद फसली नुकसान का दंश झेल रहे किसानों को वन विभाग मुआवजे के लिए दौड़ाता है। बावजूद इसके किसानों को मुआवजा नहीं मिल पाता है। वन विभाग फसली मुआवजे के नाम पर बजट नहीं होने का हवाला देकर साल दस साल लटका रहा है। इसके चलते किसान चार सालों से मुआवजे के लिए आवेदन भी नहीं कर पा रहे हैं। खांडगावं के किसान और पूर्व ग्राम प्रधान रविंद्र सिंह नेगी ने बताया कि 2014 से किसानों को फसली मुआवजा नहीं दिया गया है। जबकि मुआवजा प्रक्रिया को और जटिल बनाया दिया गया है। इको विकास समिति प्रतीतनगर के अध्यक्ष राजेश जुगलान ने बताया कि किसानों की समस्य और पीड़ा से वन मंत्री को पत्र के माध्यम से अवगत कराया जाएगा।