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ज्ञान, योग और ध्यान की परंपरा को आगे बढ़ाने की जरूरत

Fri, 15 Jul 2016 01:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश
ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश Updated Fri, 15 Jul 2016 01:45 AM IST
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El conocimiento necesario para seguir la tradición del yoga y la meditación
- फोटो : filephoto

हिमालयन इंस्टीट्यूट हास्पिटल ट्रस्ट (एचआईएचटी) के संस्थापक डॉ. स्वामी राम के शिष्य ब्रहमलीन महामंडलेश्वर स्वामी वेद भारती महाराज का पहला महासमाधि वार्षिक समारोह धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान उनके अनुयायियों और संतों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान में ज्ञान, योग और ध्यान की परंपरा को बढ़ाने की जरूरत है। 

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बृहस्पतिवार को महासमाधि वार्षिक समारोह का शुभारंभ ब्रहमलीन स्वामी वेद भारती को श्रद्धांजलि के साथ किया गया। करवीर पीठ के निवर्तमान शंकराचार्य स्वामी विद्या नृसिंह भारती ने कहा कि स्वामी वेद भारती ज्ञान की प्रतिमूर्ति थे। उनके संस्मरणों को याद करते हुए उन्होंने वेद भारती को योग का मुख्य प्रवर्तक बताया। पद्मश्री योगाचार्य भारत भूषण ने स्वामी वेद भारती को याद करते हुए कहा कि स्वामी मौन साधक थे। वे मौन में ध्यान की उच्चतम स्थिति का अनुभव कराते थे।
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साधक ग्राम के प्रमुख स्वामी ऋतुवान भारती ने बताया कि 56 देशों में स्वामी वेद भारती की योग की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। स्वामी राम हिमालयन विवि के कुलपति डा. विजय धस्माना ने कहा कि वर्तमान समय की जरूरत ज्ञान, योग और ध्यान की पंरपरा को आगे बढ़ाने की है। मौके पर पूर्व सांसद मनोहरकांत ध्यानी, डा.सुनील सैनी आदि उपस्थित थे। संचालन आश्रम के सचिव भोला शंकर डबराल ने किया।

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