{"_id":"69fe502aa32ed3d884070a84","slug":"do-not-ignore-blemishes-on-your-face-rishikesh-news-c-5-1-drn1046-966220-2026-05-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rishikesh News: चेहरे के दाग-धब्बों को न करें नजरअंदाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rishikesh News: चेहरे के दाग-धब्बों को न करें नजरअंदाज
Sat, 09 May 2026 02:35 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Sat, 09 May 2026 02:35 AM IST
विज्ञापन
आजकल चेहरे पर भूरे या काले धब्बों की समस्या तेजी से बढ़ रही है, खासकर महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है। कई लोग इसे सामान्य टैनिंग मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार यह मेलाज्मा नामक पिगमेंटेशन की समस्या भी हो सकती है। यह बीमारी भले ही संक्रामक न हो, लेकिन लंबे समय तक बने रहने पर व्यक्ति के आत्मविश्वास और मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकती है।
मेलाज्मा में गालों, माथे, नाक और ऊपरी होंठ के आसपास गहरे रंग के धब्बे दिखाई देते हैं। हिमालयन अस्पताल जॉलीग्रांट में त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रश्मि जिंदल बताती हैं कि इसका सबसे बड़ा कारण सूर्य की पराबैंगनी किरणें हैं, जो त्वचा में मेलानिन बनने की प्रक्रिया को बढ़ा देती हैं। आधुनिक जीवनशैली भी इस समस्या को बढ़ाने में भूमिका निभा रही है।
मोबाइल, लैपटॉप और लेड स्क्रीन से निकलने वाली लाइट भी त्वचा पर असर डाल सकती है। डॉ. जिंदल बताती हैं कि इसके अलावा गर्भावस्था, हार्मोनल बदलाव, थायरॉयड की समस्या, गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन और आनुवंशिक कारण भी मेलाज्मा को बढ़ावा दे सकते हैं। बिना सलाह लंबे समय तक स्टेरॉयड युक्त फेयरनेस क्रीम का इस्तेमाल करने से यह समस्या और अधिक गंभीर तथा जिद्दी हो सकती है। गर्मी, प्रदूषण और त्वचा में बार-बार होने वाली जलन भी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
विज्ञापन
मेलाज्मा से बचाव के लिए नियमित सनस्क्रीन सबसे प्रभावी उपाय है। तेज धूप से बचना, टोपी या छाते का उपयोग करना और त्वचा पर नींबू जैसे कठोर घरेलू नुस्खे लगाने से बचना जरूरी है। मेलाज्मा का उपचार धैर्य और सही देखभाल मांगता है। वैज्ञानिक उपचार, नियमित सन प्रोटेक्शन और जागरूकता के जरिए इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। सही समय पर विशेषज्ञ से सलाह लेना ही स्वस्थ और साफ त्वचा की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
विज्ञापन
मेलाज्मा में गालों, माथे, नाक और ऊपरी होंठ के आसपास गहरे रंग के धब्बे दिखाई देते हैं। हिमालयन अस्पताल जॉलीग्रांट में त्वचा रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रश्मि जिंदल बताती हैं कि इसका सबसे बड़ा कारण सूर्य की पराबैंगनी किरणें हैं, जो त्वचा में मेलानिन बनने की प्रक्रिया को बढ़ा देती हैं। आधुनिक जीवनशैली भी इस समस्या को बढ़ाने में भूमिका निभा रही है।
विज्ञापन
मोबाइल, लैपटॉप और लेड स्क्रीन से निकलने वाली लाइट भी त्वचा पर असर डाल सकती है। डॉ. जिंदल बताती हैं कि इसके अलावा गर्भावस्था, हार्मोनल बदलाव, थायरॉयड की समस्या, गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन और आनुवंशिक कारण भी मेलाज्मा को बढ़ावा दे सकते हैं। बिना सलाह लंबे समय तक स्टेरॉयड युक्त फेयरनेस क्रीम का इस्तेमाल करने से यह समस्या और अधिक गंभीर तथा जिद्दी हो सकती है। गर्मी, प्रदूषण और त्वचा में बार-बार होने वाली जलन भी इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
विज्ञापन
मेलाज्मा से बचाव के लिए नियमित सनस्क्रीन सबसे प्रभावी उपाय है। तेज धूप से बचना, टोपी या छाते का उपयोग करना और त्वचा पर नींबू जैसे कठोर घरेलू नुस्खे लगाने से बचना जरूरी है। मेलाज्मा का उपचार धैर्य और सही देखभाल मांगता है। वैज्ञानिक उपचार, नियमित सन प्रोटेक्शन और जागरूकता के जरिए इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। सही समय पर विशेषज्ञ से सलाह लेना ही स्वस्थ और साफ त्वचा की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है।