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आपदा एक्ट से होगा वैकल्पिक मार्ग का रास्ता साफ
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रानीपोखरी में क्षतिग्रस्त पुल का निरीक्षण करते जिलाधिकारी डॉ. आर राजेश कुमार।
- फोटो : RISHIKESH
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ऋषिकेश। आपदा प्रबंधन के तहत क्षतिग्रस्त रानीपोखरी पुल से निर्धारित दूरी पर 550 मीटर वैकल्पिक मार्ग (काजवे) तैयार किया जाएगा। जिलाधिकारी डॉ. आर राजेश कुमार काजवे निर्माण के लिए विशेष अनुमति जारी करेंगे। नदी में रिवर ट्रेनिंग और पेड़ों के कटान को लेकर फंसे पेंच के चलते जिलाधिकारी ने यह निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निरीक्षण से पहले जिलाधिकारी डॉ. आर राजेश कुमार क्षतिग्रस्त रानीपोखरी पुल पर पहुंचे। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता हरिओम शर्मा ने जिलाधिकारी को बताया कि पुल से निर्धारित दूरी से रानीपोखरी में पेट्रोल पंप से एयरपोर्ट तिराहे तक 550 मीटर कॉजवे के निर्माण की योजना तैयार की गई थी। उन्होंने कहा कि काजवे निर्माण का कार्य शुरू भी कर दिया गया था। लेकिन रिवर ट्रेनिंग पर रोक और काजवे के रास्ते में आ रहे पेड़ों कटान को लेकर वन विभाग की आपत्ति के चलते काजवे निर्माण का मामला अधर में लटक गया है। अधिकारियों ने जिलाधिकारी को बताया कि न्यायालय ने नदी में रिवर ट्रेनिंग पर रोक लगाई है। अधिकारियों ने जिलाधिकारी को बताया कि इसके चलते काजवे निर्माण में दिक्कत आ रही है। जिलाधिकारी डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि यातायात को सुचारू करना प्रशासन और विभाग की प्राथमिकता में है। इसलिए काजवे निर्माण को लेकर हर संभव रास्ता निकालना होगा। इसपर अधिकारियों ने कहा कि अगर आपदा प्रबंधन तहत विशेष अनुमति जारी की जाती है तो सभी बाधाएं दूर हो जाएगी। जिलाधिकारी ने कहा कि आज (मंगलवार) को विशेष अनुमति जारी कर दी जाएगी।
प्रमुख अभियंता ने लिया काजवे साइट का जायजा
- प्रमुख अभियंता लोनिवि हरिबओम शर्मा ने पुल के रास्ते में आ रहे पेड़ों का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया मंगलवार से पेड़ों पर निशान लगाने का काम शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पुल को तोड़कर नए पुल का निर्माण होना है इसलिए काजवे और क्षतिग्रस्त पुल के बीच एक निर्धारित दूरी रखी गई है। उन्होंने मामले में विभागीय पक्ष रखते हुए कहा कि दिसंबर 2020 में 40 लाख के बजट से रानीपोखरी पुल पर अनुरक्षण संबंधी कार्य किए थे। प्रमुख अभियंता ने बताया नदी के प्रचड वेग के चलते पुल के दो पिलर क्षतिग्रस्त हुए, जिससे पुल के दो हिस्से ढह गए। हालांकि उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने मामले की जांच के समिति गठित की है।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निरीक्षण से पहले जिलाधिकारी डॉ. आर राजेश कुमार क्षतिग्रस्त रानीपोखरी पुल पर पहुंचे। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता हरिओम शर्मा ने जिलाधिकारी को बताया कि पुल से निर्धारित दूरी से रानीपोखरी में पेट्रोल पंप से एयरपोर्ट तिराहे तक 550 मीटर कॉजवे के निर्माण की योजना तैयार की गई थी। उन्होंने कहा कि काजवे निर्माण का कार्य शुरू भी कर दिया गया था। लेकिन रिवर ट्रेनिंग पर रोक और काजवे के रास्ते में आ रहे पेड़ों कटान को लेकर वन विभाग की आपत्ति के चलते काजवे निर्माण का मामला अधर में लटक गया है। अधिकारियों ने जिलाधिकारी को बताया कि न्यायालय ने नदी में रिवर ट्रेनिंग पर रोक लगाई है। अधिकारियों ने जिलाधिकारी को बताया कि इसके चलते काजवे निर्माण में दिक्कत आ रही है। जिलाधिकारी डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि यातायात को सुचारू करना प्रशासन और विभाग की प्राथमिकता में है। इसलिए काजवे निर्माण को लेकर हर संभव रास्ता निकालना होगा। इसपर अधिकारियों ने कहा कि अगर आपदा प्रबंधन तहत विशेष अनुमति जारी की जाती है तो सभी बाधाएं दूर हो जाएगी। जिलाधिकारी ने कहा कि आज (मंगलवार) को विशेष अनुमति जारी कर दी जाएगी।
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प्रमुख अभियंता ने लिया काजवे साइट का जायजा
- प्रमुख अभियंता लोनिवि हरिबओम शर्मा ने पुल के रास्ते में आ रहे पेड़ों का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया मंगलवार से पेड़ों पर निशान लगाने का काम शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पुल को तोड़कर नए पुल का निर्माण होना है इसलिए काजवे और क्षतिग्रस्त पुल के बीच एक निर्धारित दूरी रखी गई है। उन्होंने मामले में विभागीय पक्ष रखते हुए कहा कि दिसंबर 2020 में 40 लाख के बजट से रानीपोखरी पुल पर अनुरक्षण संबंधी कार्य किए थे। प्रमुख अभियंता ने बताया नदी के प्रचड वेग के चलते पुल के दो पिलर क्षतिग्रस्त हुए, जिससे पुल के दो हिस्से ढह गए। हालांकि उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने मामले की जांच के समिति गठित की है।
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