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Rishikesh News: मां विंध्यवासिनी सिद्धपीठ में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

Sun, 14 Apr 2024 03:21 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 14 Apr 2024 03:21 AM IST
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Crowd of devotees gathering at Maa Vindhyavasini Siddhpeeth

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राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क क्षेत्र में यमकेश्वर ब्लॉक के अंतर्गत प्राचीन और ऐतिहासिक सिद्धपीठ मंदिर मां विंध्यवासिनी है। नवरात्र के दिनों में मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। सुबह से शाम तक मंदिर परिसर में मां के जयकारे, घंटी और शंखनाद की ध्वनि सुनाई दे रही है। मंदिर में विभिन्न प्रांतों के श्रद्धालु दर्शन के लिए आ रहे हैं। मान्यता है मंदिर में दर्शन करने से श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है।



ऋषिकेश से 15 किमी दूर बैराज-ताल बांधनी मोटर मार्ग पर मां विंध्यवासिनी का प्राचीन मंदिर है। मंदिर के पुजारी महंत विंध्यवासिनी दास ने बताया कि दुर्गा सप्तमी के 11वें अध्याय में वर्णित हैं कि मां विंध्यवासिनी मां योगमाया का स्वरूप हैं। कंस जब अपनी बहन देवकी को वसुदेव के साथ ससुराल छोड़ने जा रहे थे तब एक आकाशवाणी हुई कि देवकी का आठवां पुत्र कंस का वध करेगा। मौत के डर से कंस ने बहन देवकी और उसके पति वसुदेव को कारागार में बंदी बना दिया था।
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कारागार में देवकी ने एक के बाद सात पुत्रों को जन्म दिया। एक-एक करके कंस ने सभी को मार दिया। जब आठवां पुत्र के रूप में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ तो तब योगमाया की माया से कारागार से वसुदेव ने आठवें पुत्र की रक्षा के लिए उसे यशोदा के घर छोड़ दिया। उसी समय यशोदा के घर पर भी योगमाया ने जन्म लिया। उसे वसुदेव अपने साथ कारागार में ले गए थे। जब कंस को पता चला कि देवकी की आठवीं संतान हो गई तो वह कारागार पहुंचा और उसने देखा की देवकी की आठवीं संतान पुत्री हुई है। उसने बिना सोचे कन्या को भी पत्थर पर पटक दिया था। उस कन्या का एक पैर विंध्यवासिनी और दूसरा पैर यूपी के मिर्जापुर स्थित विंध्याचल पर्वत पर पड़ा। उसके बाद मां ने अष्टभुजा रूप धारण कर कंस को उसकी मौत की चेतावनी दी। ताल में बीन नदी बहती है। बीन नदी के शिखर पर माता का मंदिर होने से इस स्थान का नाम विंध्यवासिनी हो गया।
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