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लापता सीआरपीएफ का जवान कोलकाता में शहीद
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। 11 मार्च से लापता श्यामपुर निवासी सीआरपीएफ के जवान जयेंद्र सिंह पुंडीर कोलकाता में शहीद हो गए हैं। सोमवार को पार्थिव शरीर को सीआरपीएफ के जवान और अधिकारी उनके घर लेकर पहुंचे। यहां ऋषिकेश के चंद्रेश्वर नगर श्मशान घाट पर सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। सीआरपीएफ ने जयेंद्र सिंह पुंडीर को अंतिम सलामी दी।
शहीद जयेंद्र सिंह पुंडीर के पार्थिव शरीर को विमान में कोलकाता से दिल्ली लाया गया। वहां से सीआरपीएफ के वाहन में अंतिम दर्शन के लिए श्यामपुर लाया गया। घर से उनकी अंतिम यात्रा शुरू की गई। जिसमें सैकड़ों लोग शहीद जयेंद्र सिंह अमर रहे का नारा लगाते हुए चंद्रेश्वर नगर स्थित श्मशान घाट पहुंचे। जहां भारी संख्या में लोगों ने पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित शहीद को नमन किया। बड़े भाई रविंद्र सिंह ने शहीद जयेंद्र की चिता को मुखाग्नि दी। लोगों ने नम आंखों से शहीद को अंतिम विदाई दी। सीआरपीएफ ने सहायक कमांडेंट संतोष कुमार की अगुवाई में जयेंद्र सिंह पुंडीर को अंतिम सलामी दी। सहायक कमांडेंट ने कहा कि सीआरपीएफ शहीद जयेंद्र के परिवार का हरसंभव सहयोग करेगी।
11 मार्च को त्रिपुरा से घर आ रहे थे जयेंद्र
शहीद के पिता विक्रम सिंह पुंडीर ने बताया कि बीते 11 मार्च को त्रिपुरा से घर आते समय कोलकाता रेलवे स्टेशन से उनका बेटा जयेंद्र लापता हो गया था। उसके बाद वह कोलकाता के लिए रवाना हुए। वहां पहुंचने के बाद रेलवे पुलिस से संपर्क किया गया, लेकिन रेलवे पुलिस का कोई सहयोग नहीं मिल पाया। सिविल पुलिस ने जयेंद्र को ढूंढने में पूरा सहयोग किया। उन्होंने बताया कि 24 मार्च को कोलकाता के उलवेरिया थाने से संदेश आया था कि कोई व्यक्ति कोलकाता से 30 किमी दूर जंगल में बेहोशी की हालत में मिला है, जो डॉक्टरों की देखरेख में है। वहां पहुंचने पर जयेंद्र की पहचान हुई, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। मौत के कारणों का पता नहीं चल पाया है। विक्रम सिंह ने लूट की वारदात से इनकार किया है। उनका कहना है कि बेटे की जेब में उसका मोबाइल फोन व पर्स में पैसे मौजूद थे। केवल सीआरपीएफ का आईकार्ड नहीं मिल पाया है। फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों का पता चल पाएगा।
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शहीद जयेंद्र सिंह पुंडीर के पार्थिव शरीर को विमान में कोलकाता से दिल्ली लाया गया। वहां से सीआरपीएफ के वाहन में अंतिम दर्शन के लिए श्यामपुर लाया गया। घर से उनकी अंतिम यात्रा शुरू की गई। जिसमें सैकड़ों लोग शहीद जयेंद्र सिंह अमर रहे का नारा लगाते हुए चंद्रेश्वर नगर स्थित श्मशान घाट पहुंचे। जहां भारी संख्या में लोगों ने पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित शहीद को नमन किया। बड़े भाई रविंद्र सिंह ने शहीद जयेंद्र की चिता को मुखाग्नि दी। लोगों ने नम आंखों से शहीद को अंतिम विदाई दी। सीआरपीएफ ने सहायक कमांडेंट संतोष कुमार की अगुवाई में जयेंद्र सिंह पुंडीर को अंतिम सलामी दी। सहायक कमांडेंट ने कहा कि सीआरपीएफ शहीद जयेंद्र के परिवार का हरसंभव सहयोग करेगी।
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11 मार्च को त्रिपुरा से घर आ रहे थे जयेंद्र
शहीद के पिता विक्रम सिंह पुंडीर ने बताया कि बीते 11 मार्च को त्रिपुरा से घर आते समय कोलकाता रेलवे स्टेशन से उनका बेटा जयेंद्र लापता हो गया था। उसके बाद वह कोलकाता के लिए रवाना हुए। वहां पहुंचने के बाद रेलवे पुलिस से संपर्क किया गया, लेकिन रेलवे पुलिस का कोई सहयोग नहीं मिल पाया। सिविल पुलिस ने जयेंद्र को ढूंढने में पूरा सहयोग किया। उन्होंने बताया कि 24 मार्च को कोलकाता के उलवेरिया थाने से संदेश आया था कि कोई व्यक्ति कोलकाता से 30 किमी दूर जंगल में बेहोशी की हालत में मिला है, जो डॉक्टरों की देखरेख में है। वहां पहुंचने पर जयेंद्र की पहचान हुई, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। मौत के कारणों का पता नहीं चल पाया है। विक्रम सिंह ने लूट की वारदात से इनकार किया है। उनका कहना है कि बेटे की जेब में उसका मोबाइल फोन व पर्स में पैसे मौजूद थे। केवल सीआरपीएफ का आईकार्ड नहीं मिल पाया है। फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों का पता चल पाएगा।
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