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सीसीटीवी कैमरे नहीं होने से उलझी पुलिस की जांच
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। रविवार देर रात पशुलोक क्षेत्र में साक्षी ज्वैलर्स के बाहर जहां सराफ वीरेंद्र सिंह चौहान को गोली मारी गई, वहां पुलिस को एक भी सीसीटीवी कैमरा नहीं मिला। बड़ी बात तो यह है कि जिस बिल्डिंग पर यह प्रतिष्ठान है, उसके पूरे कैंपस में एक भी सीसीटीवी कैमरा उपलब्ध नहीं है। अगली बिल्डिंग में दो सीसीटीवी कैमरे जरूर लगे हैं, लेकिन उनका एंगल दूसरी दिशा में है। ऐसे में यदि साक्षी ज्वैलर्स के बाहर सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था होती तो नकाबपोश बदमाशों की पहचान आसानी से हो सकती थी।
दूसरी ओर इस क्षेत्र में एक किलोमीटर दायरे में पथ प्रकाश की व्यवस्था ही नहीं है। इसी अंधेरे का फायदा उठाते हुए बदमाशों ने व्यापारी को गोली मारकर बैग लेकर आसानी से फरार हो गए। दरअसल सराफ वीरेंद्र सिंह चौहान का प्रतिष्ठान साक्षी ज्वैलर्स जिस क्षेत्र निर्मल बाग-ए वीरभद्र मार्ग पशुलोक में स्थित है। वह नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत नहीं आता है। यहां अगर कोई लाइट लगाई भी गई है तो वह स्थानीय लोगों ने व्यक्तिगत खर्चे पर लगाई है। ऐसे में यहां रात्रिकाल के दौरान यहां अंधेरा छा जाता है। यह जगह आपराधिक प्रवृत्ति वाले लोगों के सबसे मुफीद हो चुकी है।
कोट्स
घटना स्थल पर पथ प्रकाश की व्यवस्था न होने के कारण दूरस्थ लगे सीसीटीवी की फुटेज भी स्पष्ट नहीं दिख पा रही है। इससे पुलिस को बदमाशों की पहचान करने में कठिनाईयां हो रही है। फिर भी पुलिस ने पांच टीम गठित कर मुखबिर तंत्र को सक्रिय कर दिया है। मुख्य मार्गों सहित हरिद्वार तक के सीसीटीवी फुटेज मंगाई गई है, जल्द खुलासा होने की उम्मीद है।
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- रितेश शाह, कोतवाल ऋषिकेश।
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टेंडर निरस्त न होता तो जगमगाता शहर
- मेयर की ओर से स्ट्रीट लाइटों का टेंडर निरस्त करने पर पार्षदों ने उठाए सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश। शहर के कई इलाकों में स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए नगर निगम ने बीते फरवरी में टेंडर पारित किया था। बोर्ड से पारित होने के बाद अपनाई गई टेंडर प्रक्रिया अचानक निरस्त कर दी गई। लिहाजा, शहर के अधिकांश क्षेत्र अंधेरे में डूबा हुआ है। टेंडर निरस्त होने के मामले में मेयर अनिता ममगाईं का कहना है कि आचार संहिता के कारण टेंडर को लंबे समय तक लंबित नहीं रखा जा सकता था, लिहाजा टेंडर निरस्त करना पड़ा। इस घटना को लेकर सियासी हलकों में भी तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं।
कई पार्षदों का कहना है कि जब टेंडर पास हो चुका था तो पथ प्रकाश की व्यवस्था सुचारु करने में कोई अड़चन नहीं थी। आरोप यह भी लग रहे हैं कि निजी स्वार्थों के चलते टेंडर जानबूझकर निरस्त करवाया गया। कुछ पार्षदों का तर्क यह भी है कि जब टेंडर हो चुका था तो निरस्त करने की बजाए उसे विस्तार दिया जा सकता था। जब बस अड्डे की पार्किंग ठेके को आचार संहिता के चलते विस्तार दिया जा सकता है, तो पथ प्रकाश के टेंडर को निरस्त करने की क्या मजबूरी रही होगी।
कोट्स
टेंडर प्रक्रिया के लिए विज्ञापन पर खर्च हुआ पैसा जाया हो गया है। इसकी भरपाई कैसे की जाएगी, इस पर विचार किया जाएगा। आचार संहिता के बाद दोबारा टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
- अनिता ममगाईं, मेयर, नगर निगम
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दूसरी ओर इस क्षेत्र में एक किलोमीटर दायरे में पथ प्रकाश की व्यवस्था ही नहीं है। इसी अंधेरे का फायदा उठाते हुए बदमाशों ने व्यापारी को गोली मारकर बैग लेकर आसानी से फरार हो गए। दरअसल सराफ वीरेंद्र सिंह चौहान का प्रतिष्ठान साक्षी ज्वैलर्स जिस क्षेत्र निर्मल बाग-ए वीरभद्र मार्ग पशुलोक में स्थित है। वह नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत नहीं आता है। यहां अगर कोई लाइट लगाई भी गई है तो वह स्थानीय लोगों ने व्यक्तिगत खर्चे पर लगाई है। ऐसे में यहां रात्रिकाल के दौरान यहां अंधेरा छा जाता है। यह जगह आपराधिक प्रवृत्ति वाले लोगों के सबसे मुफीद हो चुकी है।
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घटना स्थल पर पथ प्रकाश की व्यवस्था न होने के कारण दूरस्थ लगे सीसीटीवी की फुटेज भी स्पष्ट नहीं दिख पा रही है। इससे पुलिस को बदमाशों की पहचान करने में कठिनाईयां हो रही है। फिर भी पुलिस ने पांच टीम गठित कर मुखबिर तंत्र को सक्रिय कर दिया है। मुख्य मार्गों सहित हरिद्वार तक के सीसीटीवी फुटेज मंगाई गई है, जल्द खुलासा होने की उम्मीद है।
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- रितेश शाह, कोतवाल ऋषिकेश।
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टेंडर निरस्त न होता तो जगमगाता शहर
- मेयर की ओर से स्ट्रीट लाइटों का टेंडर निरस्त करने पर पार्षदों ने उठाए सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश। शहर के कई इलाकों में स्ट्रीट लाइट लगाने के लिए नगर निगम ने बीते फरवरी में टेंडर पारित किया था। बोर्ड से पारित होने के बाद अपनाई गई टेंडर प्रक्रिया अचानक निरस्त कर दी गई। लिहाजा, शहर के अधिकांश क्षेत्र अंधेरे में डूबा हुआ है। टेंडर निरस्त होने के मामले में मेयर अनिता ममगाईं का कहना है कि आचार संहिता के कारण टेंडर को लंबे समय तक लंबित नहीं रखा जा सकता था, लिहाजा टेंडर निरस्त करना पड़ा। इस घटना को लेकर सियासी हलकों में भी तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं।
कई पार्षदों का कहना है कि जब टेंडर पास हो चुका था तो पथ प्रकाश की व्यवस्था सुचारु करने में कोई अड़चन नहीं थी। आरोप यह भी लग रहे हैं कि निजी स्वार्थों के चलते टेंडर जानबूझकर निरस्त करवाया गया। कुछ पार्षदों का तर्क यह भी है कि जब टेंडर हो चुका था तो निरस्त करने की बजाए उसे विस्तार दिया जा सकता था। जब बस अड्डे की पार्किंग ठेके को आचार संहिता के चलते विस्तार दिया जा सकता है, तो पथ प्रकाश के टेंडर को निरस्त करने की क्या मजबूरी रही होगी।
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टेंडर प्रक्रिया के लिए विज्ञापन पर खर्च हुआ पैसा जाया हो गया है। इसकी भरपाई कैसे की जाएगी, इस पर विचार किया जाएगा। आचार संहिता के बाद दोबारा टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
- अनिता ममगाईं, मेयर, नगर निगम