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रंभा नदी के 20 मीटर के दायरे से हटेंगे निर्माण

Thu, 26 Dec 2019 01:00 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 26 Dec 2019 01:00 AM IST
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Construction will be removed from the 20 meter radius of Rambha river
रंभा नदी का निरीक्षण करती वन विभाग, राजस्व और पेयजल की टीम। - फोटो : RISHIKESH
ऋषिकेश। रंभा नदी के किनारे बने अवैध अतिक्रमणों को हटाने की तैयारियों में वन विभाग जुट गया है। इसके लिए विभाग अतिक्रमणकारियों को नोटिस भेजने की तैयारी कर रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार करीब 20 मीटर के दायरे में हुए अतिक्रमण हटाया जाना है। इसके बाद ही यहां बह रहे सीवर को टेप करने के लिए कार्य शुरू किया जाएगा।
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बता दें, वर्तमान में नमामि गंगे योजना के अंतर्गत पेयजल विभाग की ओर से लक्कड़घाट में आईएनडी ऋषिकेश 26 एमएलडी एसटीपी प्लांट का निर्माण कार्य जोरों पर है। इसमें तीर्थनगरी के अधिकांश सीवरेज को टेप करने का कार्य भी किया जा रहा है। इसके तहत रंभा नदी में गिर रहे सीवर को भी टेप किया जाना है।
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बुधवार को जिलाधिकारी देहरादून के निर्देशानुसार वन, पेयजल और राजस्व विभाग ने संयुक्त रूप से रंभा नदी का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पाया कि पशुलोक से पहले रंभा नदी नाले के रूप में तब्दील हो चुकी है। साथ ही यहां नाले के उपर वन विभाग की भूमि पर कई अवैध निर्माण हैं। इन घरों का सारा सीवर रंभा नदी में डाला जा रहा है।
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पेयजल विभाग के प्रोजेक्ट इंजीनियर अरविंद चतुर्वेदी ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर रंभा नदी में गिर रहे सीवर को टेप करने के लिए कमेटी बनाई गई है। इस दौरान निरीक्षण में यहां कई प्रकार की खामियां पाई गई हैं। वन विभाग के रेंज अधिकारी आरपीएस नेगी ने बताया कि रंभा नदी के उपर ही अधिकांश लोगों ने घर बना लिए हैं। इसके तहत इन सभी अवैध अतिक्रमणों को चिह्नित करने की कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद रंभा नदी से अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस भेजा जाएगा। करीब 20 मीटर चौड़ाई तक रंभा नदी से अतिक्रमण हटाया जाना है। इस मौके पर नायाब तहसीलदार करण सिंह, राजस्व निरीक्षक सतीश जोशी भी मौजूद रहे।
संजय गांधी के नाम पर होगी झील की पहचान
ऋषिकेश। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के छोटे भाई संजय गांधी की लोकप्रियता के चलते रंभा नदी का नाम संजय झील पड़ा था। हालांकि सरकारी अभिलेखों में संजय झील का नाम अभी काले की ढाल जलस्रोत के नाम दर्ज है।
वर्ष 1975 में इमरजेंसी बाद स्व. संजय गांधी कांग्रेस के प्रमुख चेहरा बनकर उभरे थे। इस दौरान इनकी लोकप्रियता पूरे भारत में चरम पर थी। युवा कांग्रेस के निर्माण में संजय गांधी का अहम रोल माना जाता है। उस समय इस झील का भी कोई विशेष नाम नहीं था। काले की ढाल के नाम से ही यह जगह पुकारी जाती थी, लेकिन संजय गांधी की प्रसिद्धि के चलते इस झील को संजय झील के नाम से पुकारा जाने लगा। जो बाद में संजय झील के नाम से प्रसिद्ध हो गई। वन विभाग के अभिलेखों में भी झील का नाम अभी काले की ढाल जलश्रोत के नाम पर दर्ज है।
शिव सती के प्रेम की साक्षी है रंभा नदी
ऋषिकेश। भारत नदियों का देश है, यहां की हर नदी के साथ कोई न कोई पौराणिक कथा जुड़ी है। ऐसी ही एक नदी है रंभा नदी। कहते हैं माता सती के पिता प्रजापति दक्ष ने एक बहुत बड़े यज्ञ को आयोजित किया था। इसमें अपने दामाद शिव को नहीं बुलाया और उन्हें वैरागी कहकर अपमानित किया था। जिस पर माता सती को भगवान शिव का यह अपमान सहन नहीं हुआ और उन्होंने यज्ञ में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए। तब भगवान शिव ने अपनी जटाओं से वीरभद्र की उत्पत्ति की। भगवान शिव ने वीरभद्र को दक्ष प्रजापति के यज्ञ का विनाश और उनको दंडित करने का आदेश दिया। वीरभद्र ने आदेशानुसार यज्ञ को भंग किया और दक्ष का सिर धड़ से अलग किया। मगर शिव का क्रोध तब भी शांत नहीं हुआ। जिस पर सभी देवगण चिंतिंत हो उठे। इस पर इंद्र ने शिव के रौद्र रूप को शांत करने के लिए स्वर्गलोक से रंभा नामक अप्सरा भेजी। वह भी भगवान शिव के क्रोध को सहन न कर सकी और शिव की क्रोधाग्नि में भस्म हो गई। कहते हैं तभी से रंभा शिव-सती के प्रेम और त्याग की साक्षी बनकर यहां नदी के रूप में बह रही है। केदारखंड में भी इसका वर्णन आता है।
चंद्रभागा का धोबी घाट संजय झील मेें हुआ शिफ्ट
ऋषिकेश। संजय झील में बना धोबी घाट पूर्व में कभी नगर पालिका ने छह लाख रुपये की लागत से चंद्रभागा दुर्गा मंदिर के समीप बनवाया था। धोबी घाट के लिए जलसंस्थान के पानी न उपलब्ध करा पाने के कारण यहां से इसे हटाना पड़ा। वर्तमान में यहां पर सामुदायिक केंद्र बना है। आज भी संजय झील के धोबी घाट में धोए जाने वाले कपड़ों का पानी गंगा में जाता है।

विरोध के कारण नहीं बन सका पक्षी विहार
ऋषिकेश। संजय झील के सौंदर्यीकरण की जगह इसमें वन विभाग ने पक्षी विहार बनाने की योजना भी तैयार की थी, लेकिन स्थानीय जन प्रतिनिधियों के विरोध के चलते योजना को मूर्त रूप नहीं मिल पाया और संजय झील में पक्षी विहार नहीं बन पाया।
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