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Rishikesh News: महिला आयोग की सरकार से हस्तक्षेप की अपील
Wed, 07 Jan 2026 01:33 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Wed, 07 Jan 2026 01:33 AM IST
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात करतीं उत्तराखंड राज्य महिला आयोग अध्यक्ष कुसुम कंडवाल।
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उत्तराखंड राज्य महिला आयोग ने वन भूमि मामले में प्रदेश सरकार से हस्तक्षेप करने की अपील की है। प्रदेश सरकार से इस प्रकरण में निर्दोष नागरिकों पर दर्ज हुए प्राथमिकी वापस लेने का भी निवेदन किया है।
उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने सचिवालय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। उन्होंने मुख्यमंत्री से बापूग्राम, गुमानीवाला, सुमन विहार, गीतानगर, मीरानगर, शिवाजीनगर, नंदू फार्म क्षेत्र में वन भूमि से संबंधित सर्वे और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान उत्पन्न परिस्थितियों को लेकर मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए हस्तक्षेप की अपील की है।
अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने बताया कि संपूर्ण घटनाक्रम किसी भी प्रकार के सुनियोजित विरोध या शासन-प्रशासन के प्रति अवमानना का परिणाम नहीं था, बल्कि परिस्थितिजन्य असमंजस एवं भय के वातावरण में उत्पन्न हुआ था। अनेक निर्दोष नागरिक भी इन मुकदमों की जद में आ गए हैं, जिनमें से कई अपने परिवार के एकमात्र भरण पोषणकर्ता हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपेक्षा जताते हुए कहा कि सरकार इस पूरे प्रकरण को मानवीय एवं संवेदनशील दृष्टिकोण से देखते हुए निर्दोष नागरिकों पर दर्ज प्राथमिकी को वापस लेने के निर्देश दें, जिससे प्रभावित परिवारों को मानसिक संबल मिले और शासन के प्रति जनता का विश्वास और अधिक सुदृढ़ हो।
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उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने सचिवालय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। उन्होंने मुख्यमंत्री से बापूग्राम, गुमानीवाला, सुमन विहार, गीतानगर, मीरानगर, शिवाजीनगर, नंदू फार्म क्षेत्र में वन भूमि से संबंधित सर्वे और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान उत्पन्न परिस्थितियों को लेकर मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए हस्तक्षेप की अपील की है।
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अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने बताया कि संपूर्ण घटनाक्रम किसी भी प्रकार के सुनियोजित विरोध या शासन-प्रशासन के प्रति अवमानना का परिणाम नहीं था, बल्कि परिस्थितिजन्य असमंजस एवं भय के वातावरण में उत्पन्न हुआ था। अनेक निर्दोष नागरिक भी इन मुकदमों की जद में आ गए हैं, जिनमें से कई अपने परिवार के एकमात्र भरण पोषणकर्ता हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपेक्षा जताते हुए कहा कि सरकार इस पूरे प्रकरण को मानवीय एवं संवेदनशील दृष्टिकोण से देखते हुए निर्दोष नागरिकों पर दर्ज प्राथमिकी को वापस लेने के निर्देश दें, जिससे प्रभावित परिवारों को मानसिक संबल मिले और शासन के प्रति जनता का विश्वास और अधिक सुदृढ़ हो।
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