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अब नहीं चेते, तो फिर मचेगी भारी तबाही
नवीन नौटियाल /अमर उजाला, ऋषिकेश
Updated Thu, 09 Jun 2016 02:56 AM IST
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तटबंध का नहीं हुआ निर्माण
- फोटो : अमर उजाला
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बरसात में आबादी क्षेत्रों से सट कर बहने वाली नदियों से होने वाली जलप्रलय से बचाने के लिए सरकारी विभाग के इंतजाम धरातल पर नजर नहीं आ रहे हैं। उल्टा राजा पार्क प्रशासन और सिंचाई विभाग एक दूसरे पर सवाल उठाकर अपनी जिम्मेदारी से बच रहे है। वहीं ग्रामीणों को बारिश के बाद नदियों में उफान से बड़े खतरे का डर सता रहा है। ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
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बता दें कि हर साल बरसात में सौंग नदी का पानी किनारों पर बसे छिद्दरवाला, साहबवाला, जोगीवाला, प्रतीतनगर, टिहरी फार्म आदि गांवों में भारी तबाही मचाता है। मानसून सिर पर है इसके बावजूद भी प्रशासन ने अभी तक कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए हैं। उल्टा गांव को बाढ़ से होने वाली तबाही से बचाने के लिए जिम्मेदार विभाग बड़ी घटना घटने पर ही तुरंत हरकत में आने की बात कर रहा है। सरकारी तंत्र एक दूसरे पर तटबंध का कार्य न होने के लिए जिम्मेदार मानकर अपनी जिम्मेदारी से बच रहे है।
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गौहरी माफी ग्राम प्रधान सरिता रतूड़ी ने बताया कि कई बार प्रशासन से इस संबंध में त्वरित कार्रवाई करने की मांग की गई। लेकिन हर बार विभाग बहाने बनाकर अपना पल्ला झाड़ लिया। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री हरीश रावत से बाढ़ सुरक्षा की गुहार लगाई है। कहा अगर जल्द तट बंध निर्माण नहीं किया गया तो ग्रामीण सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।
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इसलिए लटका है काम
तट बंध निर्माण का काम जनवरी 2014 में 5 करोड़ 96 लाख रूपये की लागत से शुरू हुआ। 61 लाख 72 हजार 115 रुपये का काम भी हो गया था। इसी बीच एक एनजीओ ने काम वाले स्थल को राजाजी नेशनल पार्क के अंतर्गत बताते हुए एनजीटी में याचिका दायर की। एनजीटी के आदेश पर 28 अप्रैल 2014 को रोक लगा दी गई। एनजीटी में चली लंबी सुनवाई के बाद 31 मार्च 2016 को एनजीटी ने तट बंध निर्माण की स्वीकृति दे दी है। स्वीकृति मिलने के तीन माह बाद भी कार्यदायी संस्था ने काम शुरू नहीं किया है। इसका कारण सिंचाई विभाग बजट का लैप्स होना बता रहा है।
ग्रामीणों की सुनो
बरसात के समय सौंग नदी का पानी घरों तक पहुंच जाता है। लेकिन प्रशासन बाढ़ से होने वाले खतरे का पता तब चलेगा। जब यहां किसी बड़े अधिकारी के परिवार को एक रात बाढ़ के डर के साए में काटनी पड़ेगी।
कांति देवी, ग्रामीण
हर साल बाढ़ का पानी खेती योग्य भूमि को बहा ले जाता है। हर बार नेेेता भी यहां आकर तटबंध निर्माण के झूठे वादे करके चले जाते हैं। बरसात में ग्रामीणों को नदी के जलस्तर पर नजर रख कर रात काटने को मजबूर होना पड़ता है।
दनेश्वरी देवी, ग्रामीण
बाढ़ नियंत्रण को तटबंध निर्माण पहले ही हो जाना चाहिए था। लेकिन हर बार हमारे गांव को प्रशासन नजर अंदाज कर देता है। मैं नौकरी के सिलसिले में बहार रहता हूं। बरसात के समय मुझे बाढ़ का खतरा इस कदर सताता है कि हर एक घंटे में परिवार से बाढ़ स्थिति की जानकारी लेनी पड़ती है।
रोहित नौटियाल,ग्रामीण
प्रशासन कह रहा है कि बाढ़ नियंत्रण को आया पैैसा लैप्स हो गया। पैसा कहां गया इसकी जांच होनी चाहिए। अगर जल्द निर्माण शुरू नहीं किया गया तो आंदोलन किया जाएगा।
विनोद रावत, अध्यक्ष, युवा शक्ति जनजागरण समिति
इनका कहना है...
बाढ़ नियंत्रण के लिए सिंचाई विभाग को पार्क के साथ मिलकर काम करना चाहिए। पिछली बार पार्क प्रशासन की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था की गई थी। इस बार इस तरह की व्यवस्था की ज्यादा जरूरत नहीं है। अगर कोई बड़ी बात होती है। तो प्रशासन तुरंत हरकत में आ जाएगा।
नीना ग्रेवाल, निदेशक राजाजी पार्क
तटबंध निर्माण को आया पैसा लैप्स हो चुुका है। विभाग के पास तटबंध निर्माण या वैकल्पिक व्यवस्था के लिए बजट नहीं है। सौंग नदी किनारे गांव को बाढ़ से बचाने के लिए राजाजी पार्क विभाग को पत्र लिख दिया गया है।
संजय पाठक, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग देहरादून
तटबंध निर्माण में लगी रोक को हटाने के लिए न्यायालय में लडाई लड़ी गई। तटतंध निर्माण के लिए स्वीकृत धनराशि अधिकारियों की लापरवाही के कारण लैप्स होना दुर्भाग्यपूर्ण है। इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। बिना काम के ठेकेदारों को विभाग ने पैसा कैसे आंवटित कर दिया।
संजय पोखरियाल, कांग्रेस प्रदेश संगठन सचिव