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Rishikesh News: रोग से मुक्ति के लिए लक्ष्मण ने तपोवन में किया था तपस्या
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I- लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक करने से पूरी होती है मनोकामनाएं
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तपोवन स्थित लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि के दिन जलाभिषेक करने से मनोकामनाएं पूरी होती है। शिवरात्रि के दिन यहां सुबह से लेकर शाम तक जलाभिषेक के लिए शिवभक्तों की भीड़ रहती है। मंदिर में कई दिन पहले से रुद्राभिषेक और जलाभिषेक का सिलसिला शुरू हो जाता है।
ऋषिकेश मुख्य बाजार से करीब दो किमी दूर ग्राम पंचायत तपोवन है। केदारखंड के 23 अध्याय में वर्णित है कि त्रेता युग में राम के छोटे भाई लक्ष्मण को राजक्षमा (कुष्ठ) रोग हो गया था। इस रोग से मुक्ति पाने के लिए लक्ष्मण तपोवन आए थे। तपोवन में उन्होंने गंगा तट किनारे रेत का शिवलिंग बनाया था। शिवलिंग को साक्षात भगवान शिव मानकर उन्होंने कई वर्षों तक यहां भगवान शिव की तपस्या की थी।
लक्ष्मण की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने दर्शन देकर उन्हें राजक्षमा रोग से मुक्ति दी थी। लक्ष्मण ने भगवान शिव से रेत के शिवलिंग में विराजमान होने का वरदान मांगा था। तब भगवान शिव उस रेत के शिवलिंग में विराजमान हो गए। तब से यह स्थान लक्ष्मणेश्वर के नाम से विख्यात हो गया।
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जो भी शिवभक्त सच्चे मन से इस मंदिर में आकर जलाभिषेक और दर्शन करते हैं। भगवान शिव उनकी मनोकामना पूरी करते हैं। मंदिर के महंत स्वामी जगदीश प्रपन्नाचार्य महाराज ने बताया कि महाशिवरात्रि पर्व पर मंदिर में शिवभक्त जलाभिषेक और पूजा अर्चना करने के लिए पहुंचते हैं। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लग जाती है।
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तपोवन स्थित लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि के दिन जलाभिषेक करने से मनोकामनाएं पूरी होती है। शिवरात्रि के दिन यहां सुबह से लेकर शाम तक जलाभिषेक के लिए शिवभक्तों की भीड़ रहती है। मंदिर में कई दिन पहले से रुद्राभिषेक और जलाभिषेक का सिलसिला शुरू हो जाता है।
ऋषिकेश मुख्य बाजार से करीब दो किमी दूर ग्राम पंचायत तपोवन है। केदारखंड के 23 अध्याय में वर्णित है कि त्रेता युग में राम के छोटे भाई लक्ष्मण को राजक्षमा (कुष्ठ) रोग हो गया था। इस रोग से मुक्ति पाने के लिए लक्ष्मण तपोवन आए थे। तपोवन में उन्होंने गंगा तट किनारे रेत का शिवलिंग बनाया था। शिवलिंग को साक्षात भगवान शिव मानकर उन्होंने कई वर्षों तक यहां भगवान शिव की तपस्या की थी।
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लक्ष्मण की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने दर्शन देकर उन्हें राजक्षमा रोग से मुक्ति दी थी। लक्ष्मण ने भगवान शिव से रेत के शिवलिंग में विराजमान होने का वरदान मांगा था। तब भगवान शिव उस रेत के शिवलिंग में विराजमान हो गए। तब से यह स्थान लक्ष्मणेश्वर के नाम से विख्यात हो गया।
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जो भी शिवभक्त सच्चे मन से इस मंदिर में आकर जलाभिषेक और दर्शन करते हैं। भगवान शिव उनकी मनोकामना पूरी करते हैं। मंदिर के महंत स्वामी जगदीश प्रपन्नाचार्य महाराज ने बताया कि महाशिवरात्रि पर्व पर मंदिर में शिवभक्त जलाभिषेक और पूजा अर्चना करने के लिए पहुंचते हैं। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लग जाती है।