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यमकेश्वर ब्लॉक में भालू का आतंक
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यमकेश्वर ब्लॉक में भालूू की दहशत थमने का नाम नहीं ले रही है। भालू एक के बाद एक ग्रामीणों के मवेशियों को अपना शिकार बना रहा है। इससे ग्रामीणों का वन विभाग के खिलाफ आक्रोश बढ़ रहा है। ग्रामीण वन विभाग से भालू को पकड़ने के लिए क्षेत्र में गश्त और पिंजरा लगाने की मांग कर रहे हैं।
बीते शनिवार को यमकेश्वर ब्लॉक के ग्राम पंचायत फल्दाकोट में भालू ने इंद्रपाल की एक दुधारू गाय को अपना निवाला बना दिया। पीड़ित ग्रामीण ने कहा कि उन्होंने अपनी दुधारू गाय गोशाला के अंदर बांधी थी। शनिवार देर रात गोशाला के अंदर अजीबोगरीब आवाज होने के कारण वह गोशाला की ओर भागे। गोशाला के अंदर देखा तो खूूंटे पर उनकी गाय मृत पड़ी थी। गोशाला के आसपास देखा तो एक भालू जंगल की ओर भाग रहा था। स्थानीय ग्रामीण परमवीर पयाल, कोमल पयाल, संतोष पयाल, प्रियंका कंडवाल, नंदकिशोर कंडवाल, धर्मानंद, सुंदर प्रकाश, कमलेशकांत कुकरेती, सतेंद्र सिंह, दिनेश सिंह और रविंद्र जुगलान ने बताया कि बीते छह महीने से भालू यमकेश्वर ब्लॉक के कई गांवों में जाकर ग्रामीणों के कई मवेशियों को अपना निवाला बना चुका है। इस बारे में कई बार वन विभाग को सूचित किया जा चुका है। उसके बावजूद भी समस्या जस की तस बनी हुई है।
मामला संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा है तो संबंधित रेंज के अधिकारी को निर्देशित कर क्षेत्र में वन कर्मियों को गश्त लगाने के निर्देश दिए जाएंगे।
-अमरीष कुमार, प्रभागीय वनाधिकारी लैंसडौन।
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बीते शनिवार को यमकेश्वर ब्लॉक के ग्राम पंचायत फल्दाकोट में भालू ने इंद्रपाल की एक दुधारू गाय को अपना निवाला बना दिया। पीड़ित ग्रामीण ने कहा कि उन्होंने अपनी दुधारू गाय गोशाला के अंदर बांधी थी। शनिवार देर रात गोशाला के अंदर अजीबोगरीब आवाज होने के कारण वह गोशाला की ओर भागे। गोशाला के अंदर देखा तो खूूंटे पर उनकी गाय मृत पड़ी थी। गोशाला के आसपास देखा तो एक भालू जंगल की ओर भाग रहा था। स्थानीय ग्रामीण परमवीर पयाल, कोमल पयाल, संतोष पयाल, प्रियंका कंडवाल, नंदकिशोर कंडवाल, धर्मानंद, सुंदर प्रकाश, कमलेशकांत कुकरेती, सतेंद्र सिंह, दिनेश सिंह और रविंद्र जुगलान ने बताया कि बीते छह महीने से भालू यमकेश्वर ब्लॉक के कई गांवों में जाकर ग्रामीणों के कई मवेशियों को अपना निवाला बना चुका है। इस बारे में कई बार वन विभाग को सूचित किया जा चुका है। उसके बावजूद भी समस्या जस की तस बनी हुई है।
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मामला संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा है तो संबंधित रेंज के अधिकारी को निर्देशित कर क्षेत्र में वन कर्मियों को गश्त लगाने के निर्देश दिए जाएंगे।
-अमरीष कुमार, प्रभागीय वनाधिकारी लैंसडौन।