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अस्ताचलगामी सूर्य को दिया अर्घ्य
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पथरीबाग क्षेत्र में छठ पूजा करती महिलाएं। संवाद
- फोटो : DEHRADUN
ऋषिकेश। कांच की बांस के बहंगीया, बहंगी लचकत जाए, होई न बलम जी कहरिया, बहंगी घाटे पहुंचाए....के गीत के साथ बड़ी संख्या में छठ व्रती त्रिवेणी तट पर पहुंचे। निर्जल व्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर उनकी भगवान भाष्कर का आशीर्वाद प्राप्त किया। बृहस्पितवार को छठ व्रती उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का परायण करेंगे।
बुधवार को मुनिकीरेती, तपोवन, लक्ष्मणझूला, स्वर्गाश्रम और त्रिवेणीघाट पर पूर्वांचल क्षेत्र के लोगों की भीड़ उमड़ी। गाजे बाजे के साथ निर्जल व्रती महिलाएं पारंपरिक वेश-भूषा में सजकर गंगा घाटों और तटों की ओर पहुंचे। सिर पर बांस की टोकरी और उसमें विभिन्न प्रकार की फल, सब्जियां और व्यंजनों लेकर त्रिवेणी तीर पहुंचे। व्रतियों ने गंगा नदी में उतरकर तट पर विधिविधान के साथ पूूजा अर्चना की। उसके बाद उन्होंने अस्तांचल सूर्य को अर्घ्य दिया। व्रतियों ने इस दौरान डूबते हुए सूर्य और छठी मैया से अपने परिवार की सुख समृद्धि एवं खुशहाली के लिए प्रार्थना की। पूजा अर्चना करने के बाद वे लोग अपने-अपने घरों की ओर रवाना हुए। 11 नवंबर को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर व्रतियां अपने व्रत का विधिविधान के साथ समापन करेंगे।
सार्वजनिक छठ पूज समिति की ओर से त्रिवेणीघाट पर देरशाम सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें भोजपुरी लोकगीत, बिरहा मुकाबला की प्रस्तुति हुई। महुआ चैनल वाराणसी के छोटे लाल बनारसी और महुआ चैनल जौनपुरी के सोनू सरगम ने अपने गीतों की प्रस्तुतियां दी। छठ महापर्व पर श्रृंखलाबद्ध गीतों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का जमकर मनोरंजन किया।
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बुधवार को मुनिकीरेती, तपोवन, लक्ष्मणझूला, स्वर्गाश्रम और त्रिवेणीघाट पर पूर्वांचल क्षेत्र के लोगों की भीड़ उमड़ी। गाजे बाजे के साथ निर्जल व्रती महिलाएं पारंपरिक वेश-भूषा में सजकर गंगा घाटों और तटों की ओर पहुंचे। सिर पर बांस की टोकरी और उसमें विभिन्न प्रकार की फल, सब्जियां और व्यंजनों लेकर त्रिवेणी तीर पहुंचे। व्रतियों ने गंगा नदी में उतरकर तट पर विधिविधान के साथ पूूजा अर्चना की। उसके बाद उन्होंने अस्तांचल सूर्य को अर्घ्य दिया। व्रतियों ने इस दौरान डूबते हुए सूर्य और छठी मैया से अपने परिवार की सुख समृद्धि एवं खुशहाली के लिए प्रार्थना की। पूजा अर्चना करने के बाद वे लोग अपने-अपने घरों की ओर रवाना हुए। 11 नवंबर को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर व्रतियां अपने व्रत का विधिविधान के साथ समापन करेंगे।
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सार्वजनिक छठ पूज समिति की ओर से त्रिवेणीघाट पर देरशाम सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें भोजपुरी लोकगीत, बिरहा मुकाबला की प्रस्तुति हुई। महुआ चैनल वाराणसी के छोटे लाल बनारसी और महुआ चैनल जौनपुरी के सोनू सरगम ने अपने गीतों की प्रस्तुतियां दी। छठ महापर्व पर श्रृंखलाबद्ध गीतों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का जमकर मनोरंजन किया।

छठ पर्व पर त्रिवेणी घाट गंगा में डुबते सूर्य को अर्घ्य देती महिला।- फोटो : RISHIKESH
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