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एम्स में गोल्डन कार्ड से मरीज का छह लाख का इलाज
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सीआरटी-डी डिवाइस
- फोटो : RISHIKESH
ऋषिकेश। हार्ट फेलियर की समस्या से जूझ रहे नैनीताल निवासी एक व्यक्ति के उपचार में एम्स ऋषिकेश के चिकित्सकों ने मरीज को बिना बेहोश किए सफलतापूर्वक सीआरटी-डी मशीन प्रत्यारोपित की है। राज्य का यह पहला मामला है, जिसमें एम्स में हुए इलाज पर किसी गोल्डन कार्ड धारक को 6 लाख रुपये का लाभ मिला है। मरीज स्वस्थ है अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
पुलिस लाइन, नैनीताल निवासी 62 वर्षीय मोहम्मद हासिम पिछले एक साल से हार्ट फेलियर की समस्या से ग्रसित थे। रोगी को सांस फूलने और हृदय की पंपिंग एक समान नहीं होने से उसे अक्सर बेहोशी आने की शिकायत थी। मरीज का सफलतापूर्वक उपचार करने वाले एम्स के कॉर्डियोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. बरुण कुमार ने बताया कि रोगी का जीवन बचाने के लिए उसके शरीर में स्पेशल पेसमेकर की तरह कार्य करने वाली एक सीआरटी-डी डिवाइस लगाई जानी बेहद जरूरी थी। सीआरटी-डी प्रत्यारोपित करने वाले चिकित्सकों की टीम में सीनियर रेजिडेंट डॉ. शिशिर, स्टाफ नर्सिंग ऑफिसर हंसराज, इन्दू, विपिन, हरिमोहन, अंकित आदि शामिल थे।
एम्स निदेशक प्रो रवि कांत ने मरीज को डिवाइस प्रत्यारोपण की जटिल प्रक्रिया को सकुशल अंजाम देने वाले चिकित्सकों की टीम के कार्य की सराहना की है। इस बाबत आयुष्मान भारत योजना के उत्तराखंड राज्य समन्वयक अतुल जोशी ने एम्स में हुए इस उपचार के बारे में बताया कि गोल्डन कार्ड धारक किसी भी व्यक्ति के उपचार में 5 लाख से अधिक धनराशि खर्च होने वाला यह राज्य में पहला मामला है।
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पुलिस लाइन, नैनीताल निवासी 62 वर्षीय मोहम्मद हासिम पिछले एक साल से हार्ट फेलियर की समस्या से ग्रसित थे। रोगी को सांस फूलने और हृदय की पंपिंग एक समान नहीं होने से उसे अक्सर बेहोशी आने की शिकायत थी। मरीज का सफलतापूर्वक उपचार करने वाले एम्स के कॉर्डियोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. बरुण कुमार ने बताया कि रोगी का जीवन बचाने के लिए उसके शरीर में स्पेशल पेसमेकर की तरह कार्य करने वाली एक सीआरटी-डी डिवाइस लगाई जानी बेहद जरूरी थी। सीआरटी-डी प्रत्यारोपित करने वाले चिकित्सकों की टीम में सीनियर रेजिडेंट डॉ. शिशिर, स्टाफ नर्सिंग ऑफिसर हंसराज, इन्दू, विपिन, हरिमोहन, अंकित आदि शामिल थे।
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एम्स निदेशक प्रो रवि कांत ने मरीज को डिवाइस प्रत्यारोपण की जटिल प्रक्रिया को सकुशल अंजाम देने वाले चिकित्सकों की टीम के कार्य की सराहना की है। इस बाबत आयुष्मान भारत योजना के उत्तराखंड राज्य समन्वयक अतुल जोशी ने एम्स में हुए इस उपचार के बारे में बताया कि गोल्डन कार्ड धारक किसी भी व्यक्ति के उपचार में 5 लाख से अधिक धनराशि खर्च होने वाला यह राज्य में पहला मामला है।
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