{"_id":"6793eb00eb70aa97c206b299","slug":"aiims-set-an-example-by-performing-133-lakh-surgeries-in-rishikesh-news-c-5-1-drn1046-602848-2025-01-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"एम्स : 10 साल में 1.33 लाख सर्जरी कर कायम की मिसाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एम्स : 10 साल में 1.33 लाख सर्जरी कर कायम की मिसाल
Sat, 25 Jan 2025 01:03 AM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Sat, 25 Jan 2025 01:03 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
दस साल में एम्स ने एक लाख 33 हजार मरीजों का सफल ऑपरेशन कर एक मिसाल कायम की है। वहीं करीब 53 लाख मरीज यहां ओपीडी में पहुंचे हैं, जबकि 3 लाख से अधिक मरीज भर्ती कराए गए हैं।
10 साल पहले 2 जून 2014 को पहला ऑपरेशन करने के बाद से एम्स ऋषिकेश अब तक एक लाख 33 हजार से अधिक लोगों की सर्जरी कर उन्हें स्वास्थ्य लाभ दे चुका है। विश्व स्तरीय उच्च तकनीक आधारित स्वास्थ्य सुविधाओं को विकसित करते हुए संस्थान ने यह उपलब्धि हासिल की है।
इनमें तीन दिन के नवजात से लेकर 90 साल तक के वृद्ध की सर्जरी शामिल है। अपनी स्वास्थ्य समस्या को लेकर इन 10 वर्षों में 53 लाख 45 हजार लोग एम्स की ओपीडी पंहुचे। जिनमें से तीन लाख 84 हजार 400 रोगियों को अस्पताल में भर्ती कर उनका इलाज किया गया।
विज्ञापन
एम्स में दिसंबर 2013 से रोगियों को भर्ती किए जाने की सुविधा शुरू हुई थी। पहली सर्जरी रीढ़ की हड्डी में न्यूरो समस्या से जूझ रहे एक मरीज की हुई थी। वर्ष 2014 के दौरान बिना माॅड्यूलर के चार ऑपरेशन थियेटरों से शुरू होने वाले एम्स अस्पताल में अब 64 ऑपरेशन थियेटरों की लंबी श्रृंखला है। यहीं कारण है कि अब महीने में 1500 से अधिक छोटे-बड़े ऑपरेशन हो रहे हैं।
तीन दिन के नवजात की सर्जरी
कुछ ऐसे भी नवजात होते हैं जिनकी आहार नाल, सांस नली के साथ चिपकी रहती है। ऐसे बच्चे जन्म लेने के दौरान से ही न तो स्तनपान कर सकते हैं और न ही उनके मुंह से कोई तरल पेय अंदर जा सकता है। एम्स में ऐसे नवजातों की सर्जरी पिडियाट्रिक सर्जन करते हैं। इस विभाग द्वारा नौ जुलाई 2022 को ऐसी ही समस्या से ग्रसित एक नवजात की सर्जरी की गई जिसे किसी अन्य अस्पताल ने एम्स रेफर किया था। यह बच्चा एम्स में भर्ती करते समय मात्र चार घंटे का था। एक दिन बाद डाॅक्टरों ने इसकी सर्जरी कर दी थी। पिथौरागढ़ का यह बच्चा स्वस्थ होकर अब ढाई साल का हो गया है।
-- -
90 साल की वृद्धा की भी हो चुकी है सर्जरी
अति वृद्धावस्था वाले लोगों में पैर फिसलने की वजह से कूल्हा टूट जाने अथवा कूल्हा हिल जाने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। एम्स के ऑर्थोपेडिक विभाग के सर्जन ऐसे लोगों की सर्जरी कर कूल्हे का प्रत्यारोपण कर देते हैं। कूल्हा खिसक जाने से पीड़ित छिद्दरवाला की रहने वाली 89 साल से अधिक आयु की एक मरीज की सर्जरी एम्स में 2 मई 2020 को की गई थी।
-- -
अंगों का भी हो रहा प्रत्यारोपण
पिछले वर्ष कांवड़ यात्रा में आया एक कांवड़िया रुड़की के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। सिर पर गंभीर चोट की वजह से कोमा में जाने के बाद 30 जुलाई को डाॅक्टरों की टीम ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया था। बाद में परिजनों ने स्वेच्छा से अंग दान करने की सहमति दी। जिन्हें चंडीगढ़ और दिल्ली के अस्पतालों में भर्ती रोगियों को प्रत्यारोपित करने का कार्य भी एम्स ऋषिकेश द्वारा बखूबी निभाया जा चुका है।
-- -
इलाज की आवश्यकता को देखते हुए अस्पताल में ओटी व्यवस्था रात-दिन संचालित की जा रही हैं। वर्ल्ड क्लास स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में संस्थान की दृढ़ संकल्पिता का ही परिणाम है एम्स में अब अंग प्रत्यारोपण की सुविधा भी उपलब्ध है। गम्भीर बीमारी से जूझ रहे लोगों का जीवन बचाने के लिए अब राज्य से बाहर के अस्पतालों की ओर रुख करने की आवश्यकता नहीं है। - प्रो. मीनू सिंह, कार्यकारी निदेशक, एम्स ऋषिकेश
10 साल पहले 2 जून 2014 को पहला ऑपरेशन करने के बाद से एम्स ऋषिकेश अब तक एक लाख 33 हजार से अधिक लोगों की सर्जरी कर उन्हें स्वास्थ्य लाभ दे चुका है। विश्व स्तरीय उच्च तकनीक आधारित स्वास्थ्य सुविधाओं को विकसित करते हुए संस्थान ने यह उपलब्धि हासिल की है।
विज्ञापन
इनमें तीन दिन के नवजात से लेकर 90 साल तक के वृद्ध की सर्जरी शामिल है। अपनी स्वास्थ्य समस्या को लेकर इन 10 वर्षों में 53 लाख 45 हजार लोग एम्स की ओपीडी पंहुचे। जिनमें से तीन लाख 84 हजार 400 रोगियों को अस्पताल में भर्ती कर उनका इलाज किया गया।
विज्ञापन
एम्स में दिसंबर 2013 से रोगियों को भर्ती किए जाने की सुविधा शुरू हुई थी। पहली सर्जरी रीढ़ की हड्डी में न्यूरो समस्या से जूझ रहे एक मरीज की हुई थी। वर्ष 2014 के दौरान बिना माॅड्यूलर के चार ऑपरेशन थियेटरों से शुरू होने वाले एम्स अस्पताल में अब 64 ऑपरेशन थियेटरों की लंबी श्रृंखला है। यहीं कारण है कि अब महीने में 1500 से अधिक छोटे-बड़े ऑपरेशन हो रहे हैं।
तीन दिन के नवजात की सर्जरी
कुछ ऐसे भी नवजात होते हैं जिनकी आहार नाल, सांस नली के साथ चिपकी रहती है। ऐसे बच्चे जन्म लेने के दौरान से ही न तो स्तनपान कर सकते हैं और न ही उनके मुंह से कोई तरल पेय अंदर जा सकता है। एम्स में ऐसे नवजातों की सर्जरी पिडियाट्रिक सर्जन करते हैं। इस विभाग द्वारा नौ जुलाई 2022 को ऐसी ही समस्या से ग्रसित एक नवजात की सर्जरी की गई जिसे किसी अन्य अस्पताल ने एम्स रेफर किया था। यह बच्चा एम्स में भर्ती करते समय मात्र चार घंटे का था। एक दिन बाद डाॅक्टरों ने इसकी सर्जरी कर दी थी। पिथौरागढ़ का यह बच्चा स्वस्थ होकर अब ढाई साल का हो गया है।
90 साल की वृद्धा की भी हो चुकी है सर्जरी
अति वृद्धावस्था वाले लोगों में पैर फिसलने की वजह से कूल्हा टूट जाने अथवा कूल्हा हिल जाने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। एम्स के ऑर्थोपेडिक विभाग के सर्जन ऐसे लोगों की सर्जरी कर कूल्हे का प्रत्यारोपण कर देते हैं। कूल्हा खिसक जाने से पीड़ित छिद्दरवाला की रहने वाली 89 साल से अधिक आयु की एक मरीज की सर्जरी एम्स में 2 मई 2020 को की गई थी।
अंगों का भी हो रहा प्रत्यारोपण
पिछले वर्ष कांवड़ यात्रा में आया एक कांवड़िया रुड़की के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। सिर पर गंभीर चोट की वजह से कोमा में जाने के बाद 30 जुलाई को डाॅक्टरों की टीम ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया था। बाद में परिजनों ने स्वेच्छा से अंग दान करने की सहमति दी। जिन्हें चंडीगढ़ और दिल्ली के अस्पतालों में भर्ती रोगियों को प्रत्यारोपित करने का कार्य भी एम्स ऋषिकेश द्वारा बखूबी निभाया जा चुका है।
इलाज की आवश्यकता को देखते हुए अस्पताल में ओटी व्यवस्था रात-दिन संचालित की जा रही हैं। वर्ल्ड क्लास स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में संस्थान की दृढ़ संकल्पिता का ही परिणाम है एम्स में अब अंग प्रत्यारोपण की सुविधा भी उपलब्ध है। गम्भीर बीमारी से जूझ रहे लोगों का जीवन बचाने के लिए अब राज्य से बाहर के अस्पतालों की ओर रुख करने की आवश्यकता नहीं है। - प्रो. मीनू सिंह, कार्यकारी निदेशक, एम्स ऋषिकेश