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जलप्रलय के मंजर पर आस्था भारी

Mon, 09 May 2016 02:48 AM IST
नवीन नौटियाल /अमर उजाला, ऋषिकेश
नवीन नौटियाल /अमर उजाला, ऋषिकेश Updated Mon, 09 May 2016 02:48 AM IST
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aastha beat aapda
चारधाम यात्रा - फोटो : AmarUjala

वर्ष 2013 में उत्तराखंड में आए जलप्रलय ने दुनिया भर के लोगों को झकझोर कर रख दिया था। लेकिन इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी श्रद्धालुओं की आस्था को आपदा भी नहीं डिगा पाई। अपनी आंखों के सामने जलप्रलय से हुई भीषण तबाही और तीर्थयात्रियों की अनगिनत लाशें देख चुके राजस्थान के श्रद्धालुओं का बाबा केदारनाथ के प्रति विश्वास और आस्था डिगी नहीं है।

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आपदा का दंश झेल चुके कई तीर्थयात्री एक बार फिर से बाबा के दर्शन को निकल चुके हैं। रविवार को चारधाम यात्रा पर रवाना हुए इस दल ने अमर उजाला से आपदा के दौरान के अपने कटु अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि सब शिव की माया है। देवताओं की भूमि में भला मृत्यु से कैसा डर। मरना तो एक दिन सभी को है। श्रद्धालुओं ने कहा कि उन्हें केदार बाबा ने दोबारा बुलाया है।
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उस भीषण तबाही को मैं आज तक नहीं भूल पाया हूं। आपदा के वक्त मैं और मेरा परिवार चार दिन तक किसी अज्ञात स्थान पर फंसे रहे। अगर डर लगता तो दोबारा चारधाम यात्रा पर नहीं जाते।
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-जगदीश प्रसाद सोनी, राजस्थान

मुझे आज तक मौत का वह तांडव याद है। आज भी उस मंजर को याद करके शरीर डर से सिहर जाता है। लेकिन देवभूमि की यात्रा में दोबारा शामिल होना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।
-रूपा देवी, जयपुर

मैं पहले भी अपने परिवार के साथ चारधाम यात्रा में आ चुकी हूं। भयंकर जलप्रलय से मुझे डर जरूर लगा था, लेकिन फिर से यात्रा में जाने का कोई डर नहीं है।
-ममता, जयपुर

पहाड़ियों से आता भारी मात्रा में मलबा किसी दैत्य की तरह लग रहा था। चार दिन तक मौत के बीच जिंदगी के लिए जूझते समय डर जरूर लगा। लेकिन बाबा के ऊपर पूर्ण विश्वास है।
-राधेश्याम गुप्ता, जयपुर

मौत के उस मंजर को मैं जीवनभर नहीं भूल पाऊंगी। अपनी आंखों के सामने मैंने छोटे-छोटे बच्चों को मां के लिए रोता बिलखता देखा, मैं जीवन का मतलब ही भूल गई थी। लेकिन बाबा सबके रखवाले हैं।
-कंचन देवी, राजस्थान

बाबा के द्वार पर भारी तबाही देखने के बाद मन उदास जरूर हो गया था। इस बार यात्रा पर जाने से पहले परिवार वालों ने बहुत कुछ कहा, लेकिन मुझे बाबा केदार पर पूरा भरोसा है।

-रमा देवी, जयपुर

आपदा के वक्त मैंने अपने सामने मौत को तांडव करते हुए देखा। इससे भय जरूर लगा, लेकिन बाबा केदारनाथ पर पूरा भरोसा है कि बाबा सबकी रक्षा करेंगे।
-जगदीश प्रसाद सोनी, राजस्थान

मैं चारधाम यात्रा में छठी बार जा रहा हूं। आपदा के वक्त मैंने अपनी आंखों के सामने तबाही का मंजर देखा। मैं दो दिन तक गोविंद घाट पर फंसा रहा। फिर भी इसमें डरने वाली क्या बात है। जब बाबा अपने द्वार बुला रहे हैं।
-पवन जैन, दिल्ली

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