फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Rishikesh News ›   A two-day workshop was organized for training and practice

Rishikesh News: चिकित्सकों को दिया ब्रोंकोस्कोपी प्रक्रिया का प्रशिक्षण

Tue, 12 Dec 2023 11:49 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 12 Dec 2023 11:49 AM IST
विज्ञापन
A two-day workshop was organized for training and practice
Iएम्स में बच्चों की पल्मोनरी जांचों के प्रशिक्षण व तकनीकों के अभ्यास के लिए दो दिवसीय कार्यशाला आयोजित
विज्ञापन

I

I
I

Iअस्थमा और तपेदिक के उपचार प्रबंधन में विभिन्न जांचों पर हुई चर्चाI

एम्स में बाल चिकित्सा ब्रोंकोस्कोपी और बच्चों की अन्य पल्मोनरी जांचों के प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीकों के अभ्यास के लिए दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। पहले दिन चिकित्सकों को ब्रोंकोस्कोपी प्रक्रिया का प्रशिक्षण और दूसरे दिन तपेदिक एवं अस्थमा के उपचार के लिए नवीनतम तकनीकों का अभ्यास करवाया गया।



एम्स के पीडियाट्रिक विभाग की पीडियाट्रिक पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर यूनिट की ओर से आयोजित कार्यशाला में बाल चिकित्सा विशेषज्ञों ने बताया कि ब्रोंकोस्कोपी प्रक्रिया फाइबर ऑप्टिक कैमरे के माध्यम से वायुमार्ग और फेफड़ों की संरचनाओं को सीधे देखने की विशेष चिकित्सीय प्रक्रिया है। एम्स की कार्यकारी निदेशक और बाल चिकित्सा पल्मोनोलॉजी स्वास्थ्य सेवाओं की संस्थापक प्रो. मीनू सिंह ने कहा कि बच्चों के फेफड़ों में छोटे वायुमार्गों के कारण ब्रोंकोस्कोपी एक जटिल प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया को करने के लिए विशेष निपुणता की आवश्यकता होती है। छोटे बच्चों की सांस नली में फंसे भोज्य पदार्थ या किसी टुकड़े आदि के फंस जाने पर ब्रोंकोस्कोपी प्रक्रिया से जानकारी मिलती है। साथ ही वायु नलिकाओं में फंसे ऐसे टुकड़ों या भोज्य पदार्थ को इस विधि से हटाया भी जा सकता है।
विज्ञापन


कहा कि एम्स ऋषिकेश में छोटे बच्चों के श्वास रोग से संबंधित विभिन्न रोगों के इलाज के लिए एक विशेष पीडियाट्रिक पल्मोनरी व क्रिटिकल केयर यूनिट स्थापित है। इस यूनिट में उच्च स्तर की आधुनिक तकनीकों सहित बेहतर इलाज के लिए प्रशिक्षित पीडियाट्रिक पल्मोनरी बाल चिकित्सा विशेषज्ञ उपलब्ध हैं। पीडियाट्रिक पल्मोनरी डिवीजन के डाॅ. लोकेश तिवारी ने बताया कि कार्यशाला में प्रतिभाग करने वाले प्रशिक्षुओं को फेफड़ों के सिमुलेशन मॉडल पर ब्रोंकोस्कोपी करने की प्रक्रिया सीखने और जानवरों के फेफड़ों पर इस विधि का अभ्यास करने का अवसर मिला है। कार्यशाला के दूसरे दिन बच्चों में अस्थमा और तपेदिक के उपचार प्रबंधन में विभिन्न जांचों पर चर्चा की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन




प्रशिक्षुओं को स्पाइरोमेट्री, फेफड़े के अल्ट्रासाउंड, नाइट्रिक ऑक्साइड के उत्सर्जन का परीक्षण और श्वसन पथ का आंकलन करने के लिए दोलन तकनीक (एफओटी) के उपयोग सहित विभिन्न प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण देकर अभ्यास करवाया गया। इस मौके पर दिल्ली से डॉ. कृष्ण चुघ, कानपुर से डॉ. रश्मी कपूर, कोलकता से डॉ. पल्लब चटर्जी, मुंबई से डॉ. परमार्थ चंदने, प्रो. लोकेश तिवारी, प्रो. गिरीश सिंधवानी, डॉ. मयंक मिश्रा आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed