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Rishikesh News: समकक्ष मुख्य धारा में आने की लड़ाई लड़ रही द्वितीय राजभाषा संस्कृत

Sun, 26 Nov 2023 11:24 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 26 Nov 2023 11:24 PM IST
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A meeting was held in Punjab Sindh region Sadhu
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Iसंस्कृत विद्यालय, महाविद्यालय, शिक्षक-कर्मचारी संयुक्त मोर्चा की बैठक आयोजित
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Iमांगों के समाधान को लेकर प्रदेश और केंद्र सरकार को भेजा ज्ञापनI



संस्कृत विद्यालय, महाविद्यालय, शिक्षक, कर्मचारी संयुक्त मोर्चा उत्तराखंड ऋषिकेश शाखा के पदाधिकारियों की पंजाब सिंध क्षेत्र साधु संस्कृत महाविद्यालय में बैठक आयोजित हुई। वक्ताओं ने द्वितीय राजभाषा संस्कृत शिक्षा के मूल केंद्र संस्कृत विद्यालय, महाविद्यालयों के अस्तित्व को बचाने के लिए अधोलिखित समस्याओं के निराकरण के संबंध में चर्चा की। अपनी मांगों के समाधान को लेकर प्रदेश और केंद्र सरकार को ज्ञापन भेजा।



समिति पदाधिकारियों ने कहा कि 75 वर्ष बाद भी केंद्र और प्रदेश में ब्रिटिशकाल से पोषित संस्कृत विद्यालय, महाविद्यालय आज भी सामान्य शिक्षा के विद्यालय, महाविद्यालयों के समकक्ष मुख्य धारा में आने की लड़ाई लड़ रहे हैं। जो संस्थाएं उत्तर प्रदेश के समय से महाविद्यालय स्तर में वर्गीकृत, मान्यता और अनुदानित हैं उन संस्थाओं को आज सनातन संस्कृति और संस्कृत की पोषक भाजपा सरकार के ही कार्यकाल में माध्यमिक स्तर के विद्यालय बना दिया गया है। जिन विद्यालयों को विभाग के पूर्व आदेशों के क्रम में इंटरमीडिएट स्तर की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई थी, उनको जूनियर स्तर तक सीमित कर दिया है।
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पांच दशकों से नए पद सृजित नहीं हुए हैं। संस्कृत विद्यालय, महाविद्यालयों में जो शिक्षक जिस पद पर सेवा में भर्ती हुए उसी पद पर सेवानिवृत होने के लिए बाध्य हैं। विभाग की ओर से पदोन्नति के कोई अवसर प्रदान नहीं किए गए हैं। अधिकांश संस्थानों में लिपिक, परिचारक तक के पद सृजित नहीं हैं। पदाधिकारियों ने शासन से निर्गत 16 और 23 अक्टूबर के आदेश को स्थगित करते हुए 17 फरवरी 2021 को 31 वर्गीकृत महाविद्यालयों के इतर शेष सभी संस्कृत विद्यालयों को पूर्व की भांति इंटरमीडिएट स्तर के वित्तीय मान्यता और सेवालाभ तत्काल प्रदान करने की मांग की है। इस मौके पर डाॅ. रामभूषण बिजल्वाण, डाॅ. संतोष मुनि, डाॅ. नवीन पंत, डाॅ. जनार्दन प्रसाद कैरवान, भगवती प्रसाद, रामप्रसाद थपलियाल आदि शामिल रहे।
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