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परिवार व्यवस्था कमजोर होने से आपस में टूट रहा तालमेल
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश । बजरंग मुनि सामाजिक शोध संस्थान की ओर से उग्रवाद, कट्टरवाद और आतंकवाद विषय पर गोष्ठी का आयोजन किया गया। देहरादून रोड स्थित प्रबंध कार्यालय में आयोजित गोष्ठी में मौलिक विचारक बजरंग मुनि ने कहा कि आज दुनिया के हर व्यक्ति में धीरे-धीरे कट्टरवाद बढ़ता जा रहा है। जब हम इस कट्टरवाद के कारणों को जानने की कोशिश करते हैं तो यह बात निर्विवाद रूप से हमारे सामने आती है। पूर्व में परिवार व्यवस्था, स्वतंत्रता और सहजीवन के संतुलन को सिखाने का सबसे अच्छा आधार हुआ करती थी। आज वही परिवार व्यवस्था न केवल कमजोर हो रही है बल्कि आपस का तालमेल भी टूट रहा है।
कट्टरवाद सिर्फ व्यक्ति के विचारों तक सीमित होता है। उग्रवाद हिंसक टकराव में बदल जाता है। आतंकवाद एक पक्षीय हिंसा में होता है। हम इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि उग्रवादी अपने निश्चित लक्ष्य पर आक्रमण करता है। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक आचार्य पंकज ने कहा कि उग्रवाद को रोकने के लिए कानून के अनुसार भय और दंड का सहारा लिया जा सकता है। आतंकवाद और उग्रवाद का प्रारंभ कट्टरवाद से ही होता है। यदि कट्टरवाद को प्रारंभ से ही नियंत्रित कर लिया जाए तो न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी। कट्टरवाद सिर्फ समाज ही रोक सकता है, और समाज की पहली इकाई परिवार है।
इस मौके पर अभ्युदय द्विवेदी ने कहा कि आतंकवाद को सिर्फ कुचला जा सकता है चाहे वह बुद्धिजीवियों की ओर से कराया गया हो या भावना प्रधान लोगों की ओर से हो। इस अवसर पर योगाचार्य अंकित नैथानी, उत्तम असवाल, पीके. वात्सल्य, जनार्दन कैरवान, राजीव थपलियाल, दीपक दरगन, केके. पांडेय, एनआरआई सी. भसीन, नरेश वर्मा आदि मौजूद थे।
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कट्टरवाद सिर्फ व्यक्ति के विचारों तक सीमित होता है। उग्रवाद हिंसक टकराव में बदल जाता है। आतंकवाद एक पक्षीय हिंसा में होता है। हम इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि उग्रवादी अपने निश्चित लक्ष्य पर आक्रमण करता है। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक आचार्य पंकज ने कहा कि उग्रवाद को रोकने के लिए कानून के अनुसार भय और दंड का सहारा लिया जा सकता है। आतंकवाद और उग्रवाद का प्रारंभ कट्टरवाद से ही होता है। यदि कट्टरवाद को प्रारंभ से ही नियंत्रित कर लिया जाए तो न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी। कट्टरवाद सिर्फ समाज ही रोक सकता है, और समाज की पहली इकाई परिवार है।
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इस मौके पर अभ्युदय द्विवेदी ने कहा कि आतंकवाद को सिर्फ कुचला जा सकता है चाहे वह बुद्धिजीवियों की ओर से कराया गया हो या भावना प्रधान लोगों की ओर से हो। इस अवसर पर योगाचार्य अंकित नैथानी, उत्तम असवाल, पीके. वात्सल्य, जनार्दन कैरवान, राजीव थपलियाल, दीपक दरगन, केके. पांडेय, एनआरआई सी. भसीन, नरेश वर्मा आदि मौजूद थे।
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