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अनदेखी के कारण वीरान हुआ लच्छू प्लाट
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ब्यूरो/अमर उजाला, श्यामपुर। ग्राम सभा साहब नगर में कई दशक पहले सौंग नदी ने अपना रुख बदला तो करीब ढाई सौ बीघा भूमि नदी के टापू की जद में आ गई। करीब 20 परिवारों के मकान भी इस लच्छू सिंह प्लॉट (टापू ) में बने हुए थे। पीड़ितों की सहायता के लिए न सरकार ने कोई कदम उठाया और ना ही किसी संस्था ने संज्ञान लिया। आखिरकार ग्रामीणों ने जमीन छोड़ पलायन करना शुरू कर दिया। आज लच्छू प्लाट बस्ती की चहलपहल नहीं बल्कि अपनी वीरानेपन से सुर्खियों में है।
सौंग नदी से सटा गांव साहबनगर आज भी बाढ़ की जद में है। कई दशक पहले इसकी शुरुआत हुई थी। सौंग नदी उफान पर आने के कारण साहब नगर गांव का कुछ हिस्सा जोकि लच्छू प्लॉट के नाम से था, नदी के टापू में फंस गया। तब वहां रह रहे करीब बीस परिवारों को अपने रोजमर्रा की जरूरतों के लिए नदी पार कर साहब नगर आना पड़ता था। जब नदी में पानी अधिक हो जाता तो राजाजी पार्क के जंगल से होते हुए सत्यनारायण के पास हाईवे पर आने के लिए मजबूर होना पड़ता था। ऐसे में खतरनाक जानवरों का भी खतरा बना रहता था। इसी कारण इन परिवारों ने करीब एक दशक से धीरे धीरे लच्छू प्लॉट से पलायन करना शुरू कर दिया। मौजूदा हालात ये हैं कि यहां खंडहरों के निशान शेष हैं।
आती जाती सरकारों ने संवेदना नहीं दिखाई
कई बार इन लोगों ने सरकार से मांग की कि उन्हें कहीं विस्थापित किया जाए या फिर ऐसी व्यवस्था की जाए कि वह लच्छू प्लॉट में अपने पुराने घरों में रह सकें। लेकिन किसी जिम्मेदार ने इन लोगों की पीड़ा नहीं देखी। लच्छू प्लॉट से पलायन करने वाले करण सिंह पोखरियाल, सुंदर कंडवाल, धर्मा देवी, नर बहादुर थापा, विमला थापा, रोशन सिंह कुडियाल आदि का कहना है कि सरकार हमें कहीं विस्थापित करें। नदी के टापू में जो हमारी भूमि थी, उसके बदले हमें कहीं ओर जमीन मुहैया कराई जाए।
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कोट्स
एक दशक पहले तक इस टापू में परिवार विषम परिस्थितियों में भी रह रहे थे। एक ओर जंगल दूसरी ओर नदी की धारा के कारण धीरे-धीरे सभी परिवारों ने अपनी वर्षों पुरानी जमीन छोड़ दी। हमारी मांग है कि इन परिवारों को कहीं विस्थापित किया जाय या फिर नदी में पुल बनाकर या कोई अन्य व्यवस्था कर उनको लच्छू प्लॉट में ही स्थापित किया जाए।
देवेंद्र सिंह नेगी, जिला पंचायत सदस्य श्यामपुर।
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सौंग नदी से सटा गांव साहबनगर आज भी बाढ़ की जद में है। कई दशक पहले इसकी शुरुआत हुई थी। सौंग नदी उफान पर आने के कारण साहब नगर गांव का कुछ हिस्सा जोकि लच्छू प्लॉट के नाम से था, नदी के टापू में फंस गया। तब वहां रह रहे करीब बीस परिवारों को अपने रोजमर्रा की जरूरतों के लिए नदी पार कर साहब नगर आना पड़ता था। जब नदी में पानी अधिक हो जाता तो राजाजी पार्क के जंगल से होते हुए सत्यनारायण के पास हाईवे पर आने के लिए मजबूर होना पड़ता था। ऐसे में खतरनाक जानवरों का भी खतरा बना रहता था। इसी कारण इन परिवारों ने करीब एक दशक से धीरे धीरे लच्छू प्लॉट से पलायन करना शुरू कर दिया। मौजूदा हालात ये हैं कि यहां खंडहरों के निशान शेष हैं।
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आती जाती सरकारों ने संवेदना नहीं दिखाई
कई बार इन लोगों ने सरकार से मांग की कि उन्हें कहीं विस्थापित किया जाए या फिर ऐसी व्यवस्था की जाए कि वह लच्छू प्लॉट में अपने पुराने घरों में रह सकें। लेकिन किसी जिम्मेदार ने इन लोगों की पीड़ा नहीं देखी। लच्छू प्लॉट से पलायन करने वाले करण सिंह पोखरियाल, सुंदर कंडवाल, धर्मा देवी, नर बहादुर थापा, विमला थापा, रोशन सिंह कुडियाल आदि का कहना है कि सरकार हमें कहीं विस्थापित करें। नदी के टापू में जो हमारी भूमि थी, उसके बदले हमें कहीं ओर जमीन मुहैया कराई जाए।
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एक दशक पहले तक इस टापू में परिवार विषम परिस्थितियों में भी रह रहे थे। एक ओर जंगल दूसरी ओर नदी की धारा के कारण धीरे-धीरे सभी परिवारों ने अपनी वर्षों पुरानी जमीन छोड़ दी। हमारी मांग है कि इन परिवारों को कहीं विस्थापित किया जाय या फिर नदी में पुल बनाकर या कोई अन्य व्यवस्था कर उनको लच्छू प्लॉट में ही स्थापित किया जाए।
देवेंद्र सिंह नेगी, जिला पंचायत सदस्य श्यामपुर।