{"_id":"672a8ea1968c702168047b88","slug":"40-to-50-percent-of-diseases-spread-from-animals-to-humans-rishikesh-news-c-5-1-drn1013-540615-2024-11-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rishikesh News: पशुओं से इंसानों में फैलती हैं 40 से 50 प्रतिशत बीमारियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rishikesh News: पशुओं से इंसानों में फैलती हैं 40 से 50 प्रतिशत बीमारियां
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंडित ललित मोहन शर्मा श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय परिसर में मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी (एमएलटी) विभाग में एक दिवसीय स्वास्थ्य संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें एक स्वास्थ्य की अवधारणा विषय पर वक्ताओं ने व्याख्यान दिए।
गोष्ठी में रायबरेली एम्स के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. भोलानाथ ने बताया कि वन हेल्थ के तहत न सिर्फ हमें अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने की जरूरत है, बल्कि हमारे आसपास रहने वाले पशु, पक्षियों की बीमारियां और पर्यावरण में होने वाले बदलाव पर भी ध्यान देने की जरूरत है। करीब 40 से 50 प्रतिशत बीमारियां पशुओं से इंसानों में फैलती हैं। इसी प्रकार पर्यावरण में होने वाले प्रतिकूल प्रभावों से भी हमारे स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। वन हेल्थ की अवधारणा से स्वास्थ्य समस्याओं की रोकथाम में मदद, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और आर्थिक विकास में सुधार होता है। एक स्वास्थ्य अवधारणा के लिए आवश्यक कदम सहयोग, समन्वय, शोध, विकास नीति, कानूनी ढांचे का विकास, जन जागरूकता और शिक्षा पर जोर दिया गया। प्रभारी निदेशक एवं एमएलटी विभाग के समन्वयक प्रो. गुलशन कुमार ढींगरा ने कहा कि यह एक वैश्विक स्वास्थ्य पहल है, जो मानव, पशु और पर्यावरण के स्वास्थ्य के बीच अंतरसंबंधों को समझने और सुधारने पर केंद्रित है। गोष्ठी में शालिनी कोटियाल, सफिया हसन, अर्जुन पालीवाल, डॉ. बिंदू, डॉ. दिनेश सिंह आदि शामिल रहे।
विज्ञापन
गोष्ठी में रायबरेली एम्स के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. भोलानाथ ने बताया कि वन हेल्थ के तहत न सिर्फ हमें अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने की जरूरत है, बल्कि हमारे आसपास रहने वाले पशु, पक्षियों की बीमारियां और पर्यावरण में होने वाले बदलाव पर भी ध्यान देने की जरूरत है। करीब 40 से 50 प्रतिशत बीमारियां पशुओं से इंसानों में फैलती हैं। इसी प्रकार पर्यावरण में होने वाले प्रतिकूल प्रभावों से भी हमारे स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। वन हेल्थ की अवधारणा से स्वास्थ्य समस्याओं की रोकथाम में मदद, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और आर्थिक विकास में सुधार होता है। एक स्वास्थ्य अवधारणा के लिए आवश्यक कदम सहयोग, समन्वय, शोध, विकास नीति, कानूनी ढांचे का विकास, जन जागरूकता और शिक्षा पर जोर दिया गया। प्रभारी निदेशक एवं एमएलटी विभाग के समन्वयक प्रो. गुलशन कुमार ढींगरा ने कहा कि यह एक वैश्विक स्वास्थ्य पहल है, जो मानव, पशु और पर्यावरण के स्वास्थ्य के बीच अंतरसंबंधों को समझने और सुधारने पर केंद्रित है। गोष्ठी में शालिनी कोटियाल, सफिया हसन, अर्जुन पालीवाल, डॉ. बिंदू, डॉ. दिनेश सिंह आदि शामिल रहे।
विज्ञापन