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उतराखंड की संस्कृति से जुड़ेगा चीन का दूजाइंग शहर

Sun, 03 Mar 2019 02:02 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 03 Mar 2019 02:02 AM IST
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उतराखंड की संस्कृति से जुड़ेगा चीन का दूजाइंग शहर
ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। चीन के दूजाइंग शहर और ऋषिकेश में काफी समानताएं होने के चलते दोनों शहरों के बीच संस्कृति का आदान प्रदान करने की सहमति बनी है। दोनों शहरों की सांस्कृतिक अहमियत को देखते हुए इसे वैश्विक रूप से जुड़वां शहरों (ट्वीन सिटी) के रूप में पहचान दिलाने की सहमति पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज और दूजाइंग शहर के कार्यकारी उप महापौर ली गूयांघुई के बीच बनी है। भविष्य में चीन में होने वाले योग महोत्सव में इसका असर भी दिखेगा।
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जीएमवीएन के गंगा रिसोर्ट में चल रहे अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव में चीन के दूजाइंग शहर से नौ सदस्यीय दल महोत्सव में हिस्सा लेने पहुंचा है। दूजाइंग शहर के कार्यकारी उप महापौर ने योग की वैश्विक राजधानी के तौर पर ऋषिकेश का भौगोलिक और सांस्कृतिक अध्ययन भी किया। इसी के बाद दल ने पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज से मुलाकात की। ली गूयांघुई ने पर्यटन मंत्री को बताया कि वह उत्तराखंड के योग, संस्कृति और पर्यटन को दुजाइंग से जोड़ना चाहते हैं। दोनों प्राचीन संस्कृतियों को विश्व में नई पहचान मिले इसके लिए साझा पहल की जरूरत है। उन्होंने बताया कि चाइना का दूजाइंग शहर मिंग ज्यांग नदी किनारे बसा हुआ है। यहां के लोग इस नदी को गंगा की तर्ज पर पूजतें हैं। मिंग ज्यांग नदी का अस्तित्व 1800 वर्ष पुराना है।
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गढ़वाली व्यंजनों का स्वाद चखाया
समझौते को औपचारिक रूप से हरी झंडी मिलने के बाद विमानपत्तन सलाहकार ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के निर्देश पर चीनी दल का सम्मान किया। इस दौरान दल को तीर्थनगरी की खूबियों से रूबरू कराने के बाद गढ़वाली व्यंजनों का स्वाद चखाया गया। विमानपत्तन सलाहकार अक्षत गोयल ने चीनी दल का नेतृत्व कर रहे ली गूयांघुई को स्मृति चिन्ह भेंट किया। इसके बाद दल के सदस्यों ने देहरादून रोड स्थित एक होटल में चैंसु-भात, मंडवे की रोटी और कंडाली का साग, फाणु भात, झंगोरे की खीर जैसे गढ़वाली व्यंजनों का लुत्फ उठाया। दल में ली गूयांघुई के अलावा यांग जूबेन, ल्यू गेंग, झांग जिबेंग, चैंग सोटोंग, ल्यू यी, डाई जेंगयांग, वांग हाऊ, डोंग हेंगयांग शामिल रहे।
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