फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Rishikesh News ›   जीरो टालरेंस: नियम दरकिनार, तदर्थ उर्दू अनुवादक को बना दिया आबकारी निरीक्षक

जीरो टालरेंस: नियम दरकिनार, तदर्थ उर्दू अनुवादक को बना दिया आबकारी निरीक्षक

Sat, 02 Feb 2019 01:38 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 02 Feb 2019 01:38 AM IST
विज्ञापन
जीरो टालरेंस: नियम दरकिनार, तदर्थ उर्दू अनुवादक को बना दिया आबकारी निरीक्षक
ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। आबकारी विभाग में दो उर्दू अनुवादक की तदर्थ नियुक्ति और उनकी आबकारी निरीक्षक के पद पर पदोन्नति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इनमें से एक कार्मिक की पत्रावलियां भी रिकार्ड से गायब हैं। ऐसे में गड़बड़ी के आरोपों को बल मिल रहा है। खास बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद दोनों की तदर्थ सेवा समाप्त नहीं की गई।
विज्ञापन

शुजाअत हसन और राहिबा इकबाल की गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में अस्थाई तौर पर उर्दू अनुवादक/सह कनिष्ठ लिपिक पद पर वर्ष 1995 में तदर्थ नियुक्ति हुई थी। लेकिन, हकीकत यह है कि दोनों जगह यह पद थे ही नहीं। वर्ष 1996 में तत्कालीन आबकारी आयुक्त उत्तर प्रदेश ने दोनों की सेवा समाप्त कर दी थी। इसके बाद मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में गया और तदर्थ नियुक्ति पर स्टे हो गया। बाद में कार्मिकों ने कोर्ट में हलफनामा दिया कि वे विभाग के नियमों से संतुष्ट हैं, जिस पर कोर्ट ने मामले को खारिज कर दिया। इसी के साथ सेवा समाप्ति का आदेश दोबारा लागू हो गया। लेकिन, इसके बाद शासनादेश को दरकिनार कर दोनों का समायोजन किया गया। इसके बाद प्रधान सहायक और फिर वर्ष 2014-15 में आबकारी निरीक्षक पद पर पदोन्नति दी गई।
विज्ञापन

-----------
आयुक्त ने किया था आगाह
दस्तावेज खुलासा करते हैं कि शुजाअत हसन के समायोजन की कोई पत्रावली आयुक्त कार्यालय में नहीं है। जुलाई 2013 में तत्कालीन आबकारी आयुक्त ने अपर सचिव को पत्र के जरिए अवगत कराया था कि शुजाअत हसन की व्यक्तिगत मूल पत्रावली के कागजात नियुक्ति तिथि 17 मई 1995 से 17 जून 2003 तक गायब हैं। आयुक्त की चेतावनी के बावजूद न इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कराई गई और न ही कोई कार्रवाई की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन

-----------------
शासनादेश के विरुद्ध हुई नियुक्ति
ऋषिकेश। वर्ष 1994 में तत्कालीन सचिव उप्र शासन आरवी भास्कर ने उर्दू अनुवादकों के पद सृजित करने संबंधी शासनादेश जारी किया था। इसमें स्पष्ट था कि बुंदेलखंड, कुमाऊं और गढ़वाल मंडल में उर्दू अनुवादक के पद सृजित नहीं हैं। खास बात यह है कि 30 नवंबर 2018 को आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार स्टे के आधार पर जारी तदर्थ नियुक्तियां स्वत: समाप्त हो गई थीं। इसके बावजूद शुजाअत हसन और राहिबा सेवा में बने रहे।
----------------------------------
वर्ष 2014-15 में प्रमोशन लिस्ट जारी हुई थी। मेरे सामने जितने दस्तावेज आए उसके हिसाब से प्रोन्नति में कोई अनियमितता नहीं हुई। नियुक्ति, समायोजन और मुख्य सहायक के दस्तावेजों को कैसे तैयार किया गया इसकी जानकारी नहीं है। मैं डीपीसी (डिपार्टमेंटल प्रोमोशन काउंसिल) का मेंबर था। बात पुरानी हो गई है लिहाजा बहुत चीजें याद भी नहीं हैं।

-बीएस चौहान, संयुक्त आबकारी आयुक्त।
----------------------------------------
मेरा समायोजन और प्रोन्नति शासन की ओर से किया गया है। शासन के निर्णय पर मैं कुछ नहीं कह सकता। प्रोन्नति लोक सेवा आयोग से की गई है। मुझ पर द्वेष के कारण कुछ लोग आरोप लगा रहे हैं। मैं कहीं से भी गलत नहीं हूं।
-शुजाअत हसन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed