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...दीए की तरह खामोश जल रहा हूं मैं
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। साहित्यिक संस्था आवाज की ओर से हिंदी साहित्य के कवि बाबा नागार्जुन की जन्म स्मृति पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कवियों ने पर्यावरण, राजनीतिक व्यवस्था, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और समसामयिक विषयों पर अपनी कविताएं प्रस्तुत की। रविवार को रायवाला में आयोजित गोष्ठी का साहित्यकार रमेश चंद्र नैथानी, साहित्य सेवी अरुणा वशिष्ठ व कृपाल सिंह सरोज ने विधिवत शुभारंभ किया। इस मौके पर रमेश चंद्र नैथानी द्वारा रचित समर्पण काव्य संग्रह का विमोचन किया गया। काव्य गोष्ठी में कवि अशोक क्रेजी ने ‘अनजान हूं मैं सब जानता हूं, सूरज बनना तो कठिन है दीए की तरह खामोश जल रहा हूं मैं’ कविता पाठ पढ़ा।
आरके पोखरियाल ने ‘कभी सुख है कभी दुख है जीवन की इस बगिया में कभी गुलशन कभी पतझड़ आते हैं, नरेंद्र रयाल ने ‘इस कलम से हर तरफ मैं वार करना चाहता हूं, भारती के रूप का शृंगार करना चाहता हूं, सुभाष मलिक ने ‘हमारी भक्ति है गंगा, हमारी शक्ति है गंगा’ जबकि शुभम धरनाथ शुक्ला ने वीर रस की कविता प्रस्तुत कर समा बांधा।
डॉ. सुनील थपलियाल ने ‘अब तो जागो ओ नारी कल्याणी’, प्रबोध उनियाल ने ‘आओ हम सब फिर से घर-घर खेलते हैं, हिस्से में मां है या घर ये देखते हैं’, महेश चिटकारिया ने ‘मां तुम ममता की मूरत हो’, सत्येंद्र चौहान ने बिहार में चमकी बुखार पर तंज कसे। कहा ‘चमकी तुम पहले क्यों नहीं चमकी, चुनाव से पहले क्यों नहीं आ धमकी’, धनेश कोठारी ने ‘बेटियां बेटों से नहीं कम हैं’, डॉ. विक्रम अलंकार ने ‘देश की खातिर करें कुछ काम तो फिर बात बने’, आलम मुसाफिर ने अमन की दुआ करता हूं कविता प्रस्तुत की। इस अवसर पर कृपाल सिंह सरोज, कार्यक्रम संयोजिका अरुणा वशिष्ठ, रमाबल्लभ भट्ट, दिनेश डबराल, मनोज मलासी, पुष्पा ध्यानी, शीला पंत, विमला नैथानी आदि मौजूद थे।
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आरके पोखरियाल ने ‘कभी सुख है कभी दुख है जीवन की इस बगिया में कभी गुलशन कभी पतझड़ आते हैं, नरेंद्र रयाल ने ‘इस कलम से हर तरफ मैं वार करना चाहता हूं, भारती के रूप का शृंगार करना चाहता हूं, सुभाष मलिक ने ‘हमारी भक्ति है गंगा, हमारी शक्ति है गंगा’ जबकि शुभम धरनाथ शुक्ला ने वीर रस की कविता प्रस्तुत कर समा बांधा।
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डॉ. सुनील थपलियाल ने ‘अब तो जागो ओ नारी कल्याणी’, प्रबोध उनियाल ने ‘आओ हम सब फिर से घर-घर खेलते हैं, हिस्से में मां है या घर ये देखते हैं’, महेश चिटकारिया ने ‘मां तुम ममता की मूरत हो’, सत्येंद्र चौहान ने बिहार में चमकी बुखार पर तंज कसे। कहा ‘चमकी तुम पहले क्यों नहीं चमकी, चुनाव से पहले क्यों नहीं आ धमकी’, धनेश कोठारी ने ‘बेटियां बेटों से नहीं कम हैं’, डॉ. विक्रम अलंकार ने ‘देश की खातिर करें कुछ काम तो फिर बात बने’, आलम मुसाफिर ने अमन की दुआ करता हूं कविता प्रस्तुत की। इस अवसर पर कृपाल सिंह सरोज, कार्यक्रम संयोजिका अरुणा वशिष्ठ, रमाबल्लभ भट्ट, दिनेश डबराल, मनोज मलासी, पुष्पा ध्यानी, शीला पंत, विमला नैथानी आदि मौजूद थे।
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