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बर्बरीक का साहस देख भावुक हुए दर्शक
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश
उत्तराखंड लोक संस्कृति संरक्षण समिति और सेवा टीएचडीसी की ओर से आयोजित पांडव नृत्य के तीसरे दिन ‘बोल बर्बरीक बोल’ नाटक का मंचन किया गया। इसमें बर्बरीक का साहस और बलिदान देखकर दर्शक भावुक हो गए।
बृहस्पतिवार को चौदहबीघा में आयोजित पांडव नृत्य के तीसरे दिन का शुभारंभ विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल और नगर पंचायत अध्यक्ष माधव अग्रवाल ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में पौराणिक पांडव नृत्य के तहत ‘बोल बर्बरीक बोल’ नाटक की प्रस्तुति केदार घाटी के सुदूरवर्ती गांव गड़गू के पाश्वा पांडवों की ओर से दी गई। इसमें युधिष्ठर के रूप में अखिलेश सेमवाल, भीम के रूप में केशर सिंह, अर्जुन के रूप में जसपाल सिंह, सहदेव के रूप में मदन राणा, नकुल के रूप में सुरेंद्र सिंह, बर्बरीक के रूप में रोशन सिंह, नागार्जुन के रूप में विरेंद्र सिंह, द्रोपदी के रूप में शोभा सिंह, सुभद्रा के चरित्र में नारायण सिंह, माता कुंती के रूप में रामेश्वरी देवी, हनुमान के रूप में देवेंद्र सिंह ने अभिनय कर नाटक को जीवंत किया। समिति के अध्यक्ष आशाराम व्यास ने बताया कि बर्बरीक महाभारत युद्ध का सबसे बड़ा वीर माना जाता है। इस अवसर पर चंद्रवीर पोखरियाल, एसएस कोठियाल, रोशनी राणा, विशालमणि पैन्यूली, सुनील थपलियाल, मीडिया प्रभारी रवि शास्त्री, रमाबल्लभ भट्ट, विशेश्वरी उनियाल, पूनम जोशी, निर्मला उनियाल, दीपा भट्ट, सरिता भंड़ारी, आरती चौहान, बीना जोशी, दिनेश डबराल, नरेंद्र मैठाणी, रामकृष्ण पोखरियाल आदि मौजूद रहे।
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उत्तराखंड लोक संस्कृति संरक्षण समिति और सेवा टीएचडीसी की ओर से आयोजित पांडव नृत्य के तीसरे दिन ‘बोल बर्बरीक बोल’ नाटक का मंचन किया गया। इसमें बर्बरीक का साहस और बलिदान देखकर दर्शक भावुक हो गए।
बृहस्पतिवार को चौदहबीघा में आयोजित पांडव नृत्य के तीसरे दिन का शुभारंभ विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल और नगर पंचायत अध्यक्ष माधव अग्रवाल ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में पौराणिक पांडव नृत्य के तहत ‘बोल बर्बरीक बोल’ नाटक की प्रस्तुति केदार घाटी के सुदूरवर्ती गांव गड़गू के पाश्वा पांडवों की ओर से दी गई। इसमें युधिष्ठर के रूप में अखिलेश सेमवाल, भीम के रूप में केशर सिंह, अर्जुन के रूप में जसपाल सिंह, सहदेव के रूप में मदन राणा, नकुल के रूप में सुरेंद्र सिंह, बर्बरीक के रूप में रोशन सिंह, नागार्जुन के रूप में विरेंद्र सिंह, द्रोपदी के रूप में शोभा सिंह, सुभद्रा के चरित्र में नारायण सिंह, माता कुंती के रूप में रामेश्वरी देवी, हनुमान के रूप में देवेंद्र सिंह ने अभिनय कर नाटक को जीवंत किया। समिति के अध्यक्ष आशाराम व्यास ने बताया कि बर्बरीक महाभारत युद्ध का सबसे बड़ा वीर माना जाता है। इस अवसर पर चंद्रवीर पोखरियाल, एसएस कोठियाल, रोशनी राणा, विशालमणि पैन्यूली, सुनील थपलियाल, मीडिया प्रभारी रवि शास्त्री, रमाबल्लभ भट्ट, विशेश्वरी उनियाल, पूनम जोशी, निर्मला उनियाल, दीपा भट्ट, सरिता भंड़ारी, आरती चौहान, बीना जोशी, दिनेश डबराल, नरेंद्र मैठाणी, रामकृष्ण पोखरियाल आदि मौजूद रहे।
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