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कैलास के अछूते स्थलों पर पहुंचेंगी भूक्षेत्र यात्राएं
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 20 Apr 2016 01:21 PM IST
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कैलाश मानसरोवर यात्रा
- फोटो : फाइल फोटो
सहस्त्रों सालों से आबाद कैलास मानसरोवर परिक्षेत्र के ऐसे गांव जहां अभी तक दुनिया की कोई एजेंसी और संस्था शोध के लिए नहीं पहुंची, वहां विज्ञानियों की टीम कैलास भू क्षेत्र यात्रा लेकर जाएंगे।
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इन गांवों की सामाजिक, सांस्कृतिक और इको सिस्टम की विरासत का पता करेंगे। साथ ही इन गांवों की दिक्कतों को भी उजागर किया जाएगा। भारत, चीन और नेपाल की संयुक्त परियोजना के तहत पहली बार कैलास भूक्षेत्र यात्राएं शुरू की जा रही हैं। चीन और नेपाल के विज्ञानी अपने देशों में कैलास भू क्षेत्र यात्रा निकालेंगे।
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धार्मिक महत्ता के साथ कैलास परिक्षेत्र विश्व इको सिस्टम का महत्वपूर्ण घटक है, लेकिन कैलास परिदृश्य के अंदरूनी हालात और समय के साथ आए बदलाव को जानने का यह सिलसिला अब शुरू हुआ है। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर बीते साल कैलाश क्षेत्र के 10 गांवों की स्थिति देखी गई।
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इसमें पाया गया कि गांवों की 60 से 70 फीसदी आबादी पलायन कर गई है। इस पर विस्तृत योजना तैयार की गई। अब भारत, चीन और नेपाल सुनियोजित तरीके से अपने क्षेत्रों में भू-क्षेत्र यात्राओं का सिलसिला शुरू कर रहे हैं। भारतीय क्षेत्र में आने वाले कैलास परिदृश्य के कुटी इलाके में मई के पहले हफ्ते में भू क्षेत्र यात्रा रवाना होगी।
भू क्षेत्र यात्राओं के माध्यम से पुरातन सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत को तो खोजा ही जाएगा, साथ ही इन क्षेत्रों के विकास की संभावनाएं खोजी जाएंगी। यहां के इको सिस्टम और इको सिस्टम सर्विसेस की मौजूदा स्थिति का रिकार्ड तैयार किया जाएगा।
यह भी देखा जाएगा कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन ने कैलाश परिक्षेत्र पर कितना असर डाला है। भू क्षेत्र यात्रा के बाद यहां नए सिरे से शोध का सिलसिला शुरू हो सकता है, जिससे प्राकृतिक विरासत के तौर पर कैलाश परिक्षेत्र को सहेजने में आसानी होगी।
भारत में इस साल दो भू क्षेत्र यात्राएं निकाली जाएंगी। चीन और नेपाल के विज्ञानी अपने यहां भू क्षेत्र यात्रा निकालेंगे। उन क्षेत्रों में यात्राएं निकाली जाएंगी, जहां अभी तक किसी एजेंसी, संस्थान ने कोई शोध नहीं किया है। सामाजिक, सांस्कृतिक और इको सिस्टम की विरासत सहेजने के साथ यहां विकास की संभावनाएं तलाशी जाएंगी।
- डॉ. रणवीर सिंह रावल, नोडल अधिकारी कैलाश सेक्रेड लैंड स्केप परियोजना