हरीश रावत के लिए एक और फ्लोर टेस्ट है राज्यसभा चुनाव
- मंत्री नहीं बन पाने वाले विधायक बिगाड़ सकते हैं खेल
- कैबिनेट विस्तार को चुनाव बाद तक टालने की कोशिश
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विस्तार
हाल ही में सियासी संकट से उबरे मुख्यमंत्री हरीश रावत के सामने अब एक नया संकट खड़ा है। कैबिनेट विस्तार और राज्यसभा चुनाव दोनों एक दूसरे से जुड़ गए हैं, क्योंकि कैबिनेट विस्तार 11 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव को प्रभावित कर सकता है।
कांग्रेस के भीतर एक लॉबी इस संभावित संकट को टालने के लिए कैबिनेट विस्तार, राज्यसभा चुनाव के बाद कराने पर जोर दे रही है। जबकि इस समय मंत्री बनाने के लिए सरकार पर पूरा दबाव है।
राज्य कैबिनेट में दो बर्थ रिक्त हैं, लेकिन दावेदार आधा दर्जन से भी ज्यादा हैं। विस्तार इस समय मुख्यमंत्री के लिए सिरदर्द बना हुआ है। नवप्रभात, हीरा सिंह बिष्ट, राजेंद्र भंडारी, गणेश गोदियाल, अनुसूइया प्रसाद मैखुरी, मयूख महर, ममता राकेश और फुरकान अहमद तगड़े दावेदारों में हैं। इसके अलावा भले ही बसपा मंत्रीपद से परहेज करने की बात कहे, मगर बसपाइयों में लालसा बनी हुई है।
मंत्री न बनाने पर हो सकती है विधायकों की नाराजगी
सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि मंत्री केवल दो ही बनाए जा सकते हैं, जो दो मंत्री बनेंगे वो तो ठीक, लेकिन राज्यसभा चुनाव से पहले यदि दूसरे दावेदारों ने आंख दिखानी शुरू कर दी तो कांग्रेस और मुख्यमंत्री दोनों के लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगी।
यह भी सच है कि उपरोक्त ज्यादातर विधायक सियासी संकट में इसलिए भी हरीश रावत के साथ खड़े रहे, क्योंकि मंत्री पद पाने की महत्वाकांक्षा सभी ने पाल रखी थी। हालांकि ये सभी कांग्रेस के प्रति निष्ठा होने का दावा करते हैं, लेकिन अब सच यही है कि ज्यादातर को मंत्री पद चाहिए।
अब दिक्कत यह है कि जिन्हें मंत्री नहीं बनाया, वह नाराज हो सकते हैं। इनकी नाराजगी का प्रभाव राज्यसभा चुनाव पर न पड़ जाए। सभी बडे़ नेताओं को क्रास वोटिंग का डर है। इसलिए यही राय बन रही है कि राज्यसभा चुनाव के बाद ही मंत्रिमंडल विस्तार किया जाए। वैसे भी यह चुनाव हरीश सरकार के लिए एक और फ्लोर टेस्ट माना जा रहा है।