फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   rahul gandhi reached uttarakhand

'मेरी तीन पीढ़ियां इस आपदा में लापता हो गई राहुल जी'

Wed, 26 Jun 2013 12:52 PM IST
शेषमणि शुक्ल
शेषमणि शुक्ल Updated Wed, 26 Jun 2013 12:52 PM IST
विज्ञापन
rahul gandhi reached uttarakhand

'मेरी तो तीन पीढ़ियां लापता हो गई है राहुल जी। मैं 20 जून से लगातार यहां आ रहा हूं, लेकिन न तो मेरे परिजन आए और न ही उनकी कोई सूचना।'

विज्ञापन


गुप्तकाशी पहुंचे राहुल गांधी से अपना दुखड़ा सुनाने वाला यह युवक दिल्ली से आया था। इस तरह के कई अन्य लोग भी केदराघाटी में फंसे अपने परिजनों को ढूंढने के लिए गुप्तकाशी स्थिति देवशाल हेलीपैड पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन


उत्तराखंड आपदा की विशेष कवरेज
विज्ञापन
विज्ञापन


मन में एक अनजाना डर और चेहरे पर उम्मीद की किरण लिए दिनभर हेलीपैड पर हेलीकाप्टर आने का इंतजार करते रहते हैं। जब मैं मंगलवार को फिर हेलीपैड पहुंचा तो देखा कि एक यात्री एक साधु को तस्वीर दिखाते हुए कहा रहा था कि इनमें से किसी को आपने कहीं देखा होगा।

चेहरे पर कोई भाव नहीं आए
मैं भी उस साधू की ओर देखने लगा। साधु ने गौर से तस्वीरों को देखा जरूर लेकिन उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं आए। बावजूद साधु ने कहा, मैंने तो नहीं देखा, लेकिन धैर्य रखें, भगवान ने चाहा तो आपके परिजन आपसे अवश्य मिलेंगे।

हेलीपैड इन परिजनों के हाथों में अपने परिजनों की तस्वीरें हैं। जैसे ही केदारघाटी से लोगों को बचाकर कोई हेलीकाप्टर लैंड करता है तो वे दौड़ पड़ते हैं। इस उम्मीद में कि शायद उनके परिजन उसमें आए हों। जब परिजन नहीं दिखते तो उनकी तस्वीर जिंदा लौटे यात्रियों को दिखाते हैं।

उत्तराखंड आपदा की विशेष कवरेज

ना में जवाब मिलते ही चेहरे पर मायूसी छा जाती है। आंखें भर आती है और बिलखते हुए कहते हैं कि याद करें, शायद आपने इन्हें कहीं भागते हुए या किसी आश्रय लिए हुए देखा हो। या फिर ... कहते कहते वे चुप हो जाते हैं। बचकर आने वाले यात्री

भी उनकी भावों को समझ जाते हैं कि उनका इशारा लाशों की ओर है। लेकिन यह बात उनकी जुबान से नहीं निकलती। आने वाले यात्री भी सहानुभूति के हाथ उनके कंधों पर रखते हुए कहते हैं धैर्य रखें, जैसे हम बच गए हैं वह भी बच गए होंगे। आ जाएंगे।

निराशा ही हाथ लगी
शायद कहीं वैसे जगह फंसे होंगे जहां जवान नहीं पहुंच पा रहे हैं। जवान बहुत मेहनत कर रहे हैं, जल्द ही ढूंढ लेंगे। कोलकाता से आया एक युवक शनिवार से ही हेलीपैड पर जमा है। अपने मां बाप की तलाश में आया यह युवक हर बार दौड़ता है लेकिन उसे अभी तक निराशा ही हाथ लगी।


मंगलवार को जब एक यात्री ने उससे सहानुभूति दिखाते हुए कहा कि शायद अगली बार तुम्हारे मां-बाप भी आ जाएंगे तो उसके आंखें से आंसू टपक पड़े। बोला, इसी उम्मीद पर तो चार दिन से यहां पड़ा हूं।

पीड़ित राहुल का धैर्य टूट गया

उधर दिल्ली से आए राहुल शर्मा 20 जून को ही गुप्तकाशी पहुंच गए थे। वे रोज सुबह हेलीपैड आते हैं और जब तक हैलीकाप्टर आने की संभावना होती है तब तक वह वहीं टीके रहते हैं। मंगलवार को राहुल गांधी हेलीपैड पहुंचे तो पीड़ित राहुल का धैर्य टूट गया।

राहुल के सामने अपने छह परिजनों की तस्वीर दिखाते हुए बोले राहुल जी मेरी तीन पीढ़ियां लापता है, प्लीज उन्हें किसी तरह तलाश करवाईए। शर्मा ने बताया कि चारधाम यात्रा पर उनके माता-पिता, बड़े भाई-भाभी और दो बच्चे आए थे।

लौटने का इंतजार कर रहा हूं

16 जून को आखिरी बार परिजनों से बात हुई थी। उस समय वे केदारनाथ मंदिर परिसर में थे। 17 जून कोे आपदा आ गई। उसके बाद से संपर्क नहीं हुआ। मैं भी 20 जून से ही यहां आ गया था। तब से एनडीआरएफ के राहत कैंप और देवशाल हेलीपैड पर उनके लौटने का इंतजार कर रहा हूं। लेकिन न तो वे आते हैं और न ही उनकी कोई सूचना।

पीड़ित राहुल की बात सुनकर राहुल गांधी भी भावुक हो गए। बोले, एक बार नहीं दस बार सर्च अभियान चलेगा। हम प्रयास करेंगे कि आपके परिजनों को

जिंदा आपतक पहुंचा दें।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed