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Pithoragarh News: 13 लाख रुपये प्रति किलो की बिक रहा यारसा गंबू
Thu, 20 Jul 2023 11:04 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Thu, 20 Jul 2023 11:04 PM IST
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मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। उच्च हिमालयी क्षेत्र के बुग्यालों में पाए जाने वाली शक्तिवर्धक कीड़ाजड़ी (यारसा गंबू) का इस बार अच्छा दाम मिलने से ग्रामीणों के चेहरे खिल गए है। वर्तमान में कीड़ाजड़ी का 13 लाख रुपये प्रति किलो का दाम तय हो चुका है। अभी और दाम बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
अमूमन मई में मुनस्यारी के पातों बुईं, साइंपोलू, लेंगा, कुल्थम, ढिलम, उच्छैती, धुरातोली, फाफा, बादनी, बसंतकोट, रिंगु, चुलकोट, तोमिक,गोल्फा, बोना, टांगा आदि गांवों के लोग कीड़ाजड़ी दोहन के लिए मय खाद्यान्न सामग्री उच्च हिमालयी बुग्यालों में जाते हैं। इस बार मौसम की बेरुखी से लगातार बर्फबारी की वजह से करीब एक माह तक ग्रामीण उच्च हिमालयी क्षेत्रों में खाली बैठे रहे। मौसम अनुकूल होने पर कीड़ाजड़ी दोहन कर 15 जुलाई से ग्रामीण अपने मूल गांवों को लौटने लगे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले सालों की अपेक्षा इस बार कीड़ाजड़ी का दोहन कम हुआ। इसके बाद भी पूरे क्षेत्र में करीब 50 से 60 किलो तक कीड़ाजड़ी मिलने की उम्मीद है।
बाक्स
दोहन की ठोस नीति बनाए सरकार
मुनस्यारी। उच्च हिमालयी क्षेत्र जिम्बा तोक से लौटे काश्तकार राजू तोमक्याल ने बताया कि जून प्रथम सप्ताह से कीड़ाजड़ी मिलनी शुरू गई। कहा कि सरकार को कीड़ाजड़ी दोहन और खरीद के लिए कोई ठोस नीति बनानी चाहिए ताकि इसकी कालाबाजारी न हो और काश्तकारों को वाजिब दाम मिल सकें। जिपं सदस्य जगत मर्तोलिया ने कहा कि उन्होंने कीड़ाजड़ी के विपणन के लिए सरकारी नीति बनाने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है। संवाद
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अमूमन मई में मुनस्यारी के पातों बुईं, साइंपोलू, लेंगा, कुल्थम, ढिलम, उच्छैती, धुरातोली, फाफा, बादनी, बसंतकोट, रिंगु, चुलकोट, तोमिक,गोल्फा, बोना, टांगा आदि गांवों के लोग कीड़ाजड़ी दोहन के लिए मय खाद्यान्न सामग्री उच्च हिमालयी बुग्यालों में जाते हैं। इस बार मौसम की बेरुखी से लगातार बर्फबारी की वजह से करीब एक माह तक ग्रामीण उच्च हिमालयी क्षेत्रों में खाली बैठे रहे। मौसम अनुकूल होने पर कीड़ाजड़ी दोहन कर 15 जुलाई से ग्रामीण अपने मूल गांवों को लौटने लगे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले सालों की अपेक्षा इस बार कीड़ाजड़ी का दोहन कम हुआ। इसके बाद भी पूरे क्षेत्र में करीब 50 से 60 किलो तक कीड़ाजड़ी मिलने की उम्मीद है।
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दोहन की ठोस नीति बनाए सरकार
मुनस्यारी। उच्च हिमालयी क्षेत्र जिम्बा तोक से लौटे काश्तकार राजू तोमक्याल ने बताया कि जून प्रथम सप्ताह से कीड़ाजड़ी मिलनी शुरू गई। कहा कि सरकार को कीड़ाजड़ी दोहन और खरीद के लिए कोई ठोस नीति बनानी चाहिए ताकि इसकी कालाबाजारी न हो और काश्तकारों को वाजिब दाम मिल सकें। जिपं सदस्य जगत मर्तोलिया ने कहा कि उन्होंने कीड़ाजड़ी के विपणन के लिए सरकारी नीति बनाने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है। संवाद
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