थल( पिथौरागढ़)। विलुप्त हो रहे हथकरघा को पुनर्जीवित करने के लिए मुनस्यारी हाउस जनजातीय महिला समूह की पहल पर हंस फाउंडेशन ने इसे फिर से चलन में लाने का बीड़ा उठाया है। इसके तहत हथकरघा बुनाई का व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण उद्योग केंद्र अल्मोड़ा और हिमाद्रि हंस हेंडलूम के माध्यम से शुरू किया गया। इसमें मुनस्यारी के जलथ गांव की जय मां काली स्वयं सहायता समूह, पंचाचूली महिला समूह, कृष्णा स्वयं सहायता समूह की 20 महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।
प्रशिक्षण का उद्घाटन हंस हैंडलूम के कार्यकारी अधिकारी राजेश जैन ने किया। उन्होंने कहा इस प्रशिक्षण से जहां महिलाएं स्वरोजगार के साथ आत्मनिर्भर होंगी वहीं विलुप्त हो रही हथकरघा बुनाई को नया बाजार मिलेगा। छह माह के प्रशिक्षण के दौरान ये महिलाएं परंपरागत हथकरघा पर मफलर, स्टाल, शाल, पशमीना, अंगोरा शाल बनाना सीखेंगी। मुनस्यारी हाउस जनजातीय महिला समूह के प्रभारी नवीन सिंह ने बताया कि हथकरघा से लोगों में परंपरागत हथकरघा को नया जीवन मिलेगा। प्रशिक्षण के मास्टर ट्रेनर जलथ गांव के पारंगत बुनकर गोकर्ण लस्पाल हैं। (संवाद)