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नई तहसीलों के खुलने से जनता को कोई लाभ नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Fri, 27 Jan 2017 10:17 PM IST
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गणाईगंगोली का तहसील कार्यालय
- फोटो : अमर उजाला
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शासन ने पिछले दो वर्ष के भीतर जिले में जितनी भी नई तहसीलों का गठन किया, उनसे अब तक आम लोगों को कोई लाभ नहीं मिल पाया है। तहसील कार्यालय के नाम पर सिर्फ बोर्ड टांगे गए हैं। कार्यालयों में न तो स्टाफ है और न अधिकारी ही नियुक्त हो पाए हैं। नई तहसीलों के गठन से लोगों की समस्या दोगुना बढ़ गई है। उनको अब भी पुरानी तहसीलों पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है।
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शासन ने जिले के गणाईगंगोली, बंगापानी, कनालीछीना, देवलथल, थल, तेजम में नए तहसील कार्यालय खोले हैं। इन तहसीलों का संचालन पुरानी तहसीलों के स्टाफ के माध्यम से ही कराना पड़ रहा है। तहसीलदार के पद रिक्त होने के कारण इन तहसीलों में या तो नायब तहसीलदार बैठाए गए हैं या फिर रजिस्ट्रार कानूनगो के हवाले यह तहसील की गई हैं। लोगों को जमीन संबंधी कागजात बनाने, प्रमाणपत्र बनाने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। सरकार ने ठीक चुनाव से पहले लोगों को खुश करने के लिए तहसील तो खोल दी, लेकिन उनमें न्यूनतम ढांचागत सुविधाएं जुटाने की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया।
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आज भी गणाईगंगोली के लोगों को तहसील संबंधी मुख्य कामों के लिए गंगोलीहाट, कनालीछीना, देवलथल और थल के लोगों को डीडीहाट जाना पड़ता है। बंगापानी तहसील से जोड़े गए कुछ गांवों के लोगों को धारचूला और कुछ को मुनस्यारी जाकर काम कराने पड़ते हैं। नई तहसीलों में ऑनलाइन प्रमाणपत्र बनाने में भी दिक्कत आ रही है।
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पुरानी तहसीलों में तहसीलदार नहीं
जिले की पुरानी तहसीलों का कामकाज नायब तहसीलदारों के सहारे चलाना पड़ रहा है। पिथौरागढ़ और गंगोलीहाट तहसील को छोड़कर अन्य कहीं पर भी तहसीलदार तैनात नहीं हैं। डीडीहाट, धारचूला, मुनस्यारी, बेड़ीनाग में तहसीलदार का काम नायब तहसीलदारों से चलाना पड़ रहा है। तहसीलदारों के ट्रांसफर और रिटायरमेंट होने के बाद नई तैनाती नहीं हो पाई है।
नए विकासखंड वर्षों से नहीं खुले
जिले में नए विकासखंडों की मांग लंबे समय से उठ रही है। विकासखंड खोलने की मंजूरी केंद्र सरकार देती है। राज्य सरकार की ओर से केंद्र सरकार को सिर्फ प्रस्ताव भेजे जाते हैं। 1960 में जिला गठन के समय जितने भी ब्लॉक थे, उसके बाद एक भी नया ब्लॉक यहां नहीं खुल पाया है, जबकि लोग ब्लॉक को विकास के लिए ज्यादा जरूरी मानते हैं।