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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   Winter in Munsyari

ठंड की दस्तक के साथ ही बढ़ने लगी शिविरों में रह रहे आपदा पीड़ितों की चिंता

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 24 Sep 2020 11:33 PM IST
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Winter in Munsyari
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्र हंसलिंग, राजरंभा, पंचाचूली में सीजन का पहला ? - फोटो : PITHORAGARH
मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। हिमनगरी मुनस्यारी में ठंड ने दस्तक दे दी है। इससे टेंटों में रह रहे आपदा प्रभावितों के सामने एक बार फिर संकट हो गया है।
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18 जुलाई को मुनस्यारी के धापा, बलौंता, गनघरिया, जोशा गांव में भीषण आपदा आई थी। इसमें दर्जनों मकान जमींदोज हो गए थे। इस आपदा को 67 दिन बीत चुके हैं। घरों के ध्वस्त होने और विस्थापन न होने के कारण आपदा प्रभावित परिवार स्कूलों, पंचायत घरों और टेंटों में रहने को मजबूर हैं। ठंड अब दस्तक देने लगी है। खुद ही शरणार्थी बने कृषि और पशुपालन पर निर्भर इन परिवारों के सामने अपने मवेशियों को रखने की समस्या है। लोगों का कहना है कि मुनस्यारी में जाड़ों में तापमान माइनस में चला जाता है। ऐसे में किस तरह दिन गुजारेंगे इसी को सोचकर चिंतित हैं।
जोशा के प्रधान राजेश रोशन ने बताया कि बरम दौरे में मुख्यमंत्री को गांव की विषम परिस्थिति बताई गई थी लेकिन मुख्यमंत्री ने केवल आश्वासन देकर इतिश्री कर ली। उन्होंने बताया कि छह परिवार टेंट, पांच परिवार स्कूलों एवं दो परिवार पंचायत घर में ही रहने को मजबूर हैं। ठंड बढ़ने के साथ साथ प्रभावितों एवं जानवरों के सामने दिक्कत होगी। उन्होंने प्रशासन से शीघ्र विस्थापन की मांग की है। धापा के सामाजिक कार्यकर्ता मुन्ना ढोकटी का कहना है कि विस्थापन की शीघ्र जरूरत है। अन्यथा सर्दी में लोगों की परेशानियां बढ़ जाएंगी। उन्होंने कहा कि गांव की पेयजल योजना ध्वस्त हो गई थी। इससे जल संकट का सामना भी करना पड़ रहा है।
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गांव की पूरी जमीन कई जगह पर फट गई है। दरारें पड़ी हैं। ऐसी परिस्थिति में मकान नहीं बनाए जा सकते। परिजन टेंट में रात गुजारने को मजबूर हैं। विस्थापन की उम्मीद के सहारे रह रहे हैं।
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- हयात सिंह
दिन में जैसे-तैसे मवेशियों के चारे का प्रबंध कर रहे हैं। अब ठंड बढ़नी शुरू हो गई है। जाड़े में खुद के एवं मवेशियों के रहने के बारे में सोचकर मन दुखी हो रहा है। समस्या सुलझाई जानी चाहिए।
- भागी देवी
सेरासुरईधार के कुछ लोग दूसरों के घर में रह रहे हैं। मवेशियों को रखने की दिक्कत है। जाड़ों में यहां माइनस डिग्री में तापमान चला जाता है। ठंड में मवेशियों के रहने एवं चारे के प्रबंधन में दिक्कत आएगी।

- मंगल सिंह दसौनी
धापा गांव के कई लोग स्कूल में सपरिवार रह रहे हैं। सरकार जल्दी विस्थापन कर देती तो घर बनाने का प्रयास करते। खेती तो इस आपदा ने पूरी तरह चौपट कर दी है। बरसाती नाले से पेयजल भी कम हो गया है।
- हंसा देवी
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