फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   Biometric verification before dialysis becomes a challenge for patients

Pithoragarh News: मरीजों के लिए डायलिसिस से पहले बायोमेट्रिक सत्यापन बना चुनौती

Tue, 08 Sep 2026 11:28 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Tue, 08 Sep 2026 11:28 PM IST
विज्ञापन
Biometric verification before dialysis becomes a challenge for patients
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में आयुष्मान योजना के तहत डायलिसिस करा रहे 40 से अधिक मरीजों को परेशानी हो रही है। उन्हें बायोमीट्रिक सत्यापन के लिए डेढ़ किलोमीटर दूर जिला अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
विज्ञापन

बेस अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा है लेकिन सत्यापन जिला अस्पताल में होता है। दोनों अस्पतालों के बीच की यह दूरी मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। कई मरीज किडनी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। वे शारीरिक रूप से कमजोर हैं जिनके लिए कुछ कदम चलना भी मुश्किल होता है। इस दोहरी प्रक्रिया के कारण उन्हें रोजाना काफी तकलीफें झेलनी पड़ रही हैं। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
विज्ञापन

-----
दो अस्पतालों के चक्कर लगाना बना मजबूरी
डायलिसिस वाले मरीजों को सबसे पहले एंबुलेंस या किसी अन्य वाहन से जिला अस्पताल लाया जाता है। यहां बायोमेट्रिक मशीन में उनके फिंगर प्रिंट का सत्यापन किया जाता है और फिर वापस बेस अस्पताल ले जाया जाता है। अत्यधिक शारीरिक कमजोरी, बार-बार इलाज आदि वजहों से कई बार फिंगरप्रिंट स्पष्ट नहीं आते और सत्यापन में समय लग जाता है। इस थकाऊ और लंबी प्रक्रिया से मरीज, तीमारदार और साथ आने वाले स्वास्थ्य कर्मी भी परेशान हैं। मरीजों, तीमारदारों का कहना है कि जब डायलिसिस की सुविधा बेस अस्पताल में दी जा रही है तो आयुष्मान के तहत सत्यापन की सुविधा भी वहीं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

----
बायोमेट्रिक सत्यापन बन गई अतिरिक्त समस्या
जानकारी के मुताबिक हंस फाउंडेशन के माध्यम से बेस अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही। इस सुविधा के लिए आयुष्मान कार्ड वाले मरीजों का बायोमेट्रिक सत्यापन जरूरी है। कार्ड का लाभ नहीं लेने पर संबंधित मरीज को प्रति डायलिसिस 700 रुपये जमा करने पड़ते हैं। आयुष्मान योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को निशुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध कराना है। ऐसे में बेस से जिला अस्पताल आकर बायोमेट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया ही उनके लिए अतिरिक्त परेशानी का कारण बन गई है।


हंस फाउंडेशन के माध्यम से बेस में डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध है। इसमें बेस अस्पताल की कोई भूमिका नहीं है। मरीजों को बेस में सभी सुविधा उपलब्ध हो जाएं इसके लिए प्रयास किए जाएंगे। -डॉ. एके सिंह, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, पिथौरागढ़
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article