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अब चमक सकती है घर-घर में बिजली
पिथौरागढ़/बिजेंद्र लुंठी
Updated Thu, 11 Apr 2013 03:31 PM IST
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हवा से बिजली बनाने का प्रयोग कामयाब रहा तो पहाड़ के ऐसे गांव जहां बिजली आज भी दुर्लभ बनी हुई है जगमग होंगे। साथ ही राज्य में जलविद्युत उत्पादन और इसके जरिये हो रहे पर्यावरणीय नुकसान के लिए भी यह योजना पुख्ता विकल्प साबित हो सकेगी।
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केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना में चेन्नई के पवन ऊर्जा प्रौद्योगिकी केंद्रर (सीवेट) ने पिथौरागढ़ समेत कई जिलों में हवा से बिजली बनाने पर काम शुरू किया है। राज्य में उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विभाग (उरेडा) ने इस योजना पर काम शुरू किया है।
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योजना के तहत प्रदेश में हवा के तीव्र वेग वाले स्थानों को चिह्नित करने का काम शुरू हो गया है। पिथौरागढ़ जिले की ही बात करें तो इस वक्त 12.50 मिलियन यूनिट बिजली की जरूरत है। लेकिन उपलब्ध केवल 12 मिलियन यूनिट ही है।
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इसी के मद्देनजर यहां से करीब 41 किमी. दूर सौरलेख में उरेडा ने विंड मॉनिटरिंग टावर लगाया है, जो हवा की तीव्रता को नापेगा। पिथौरागढ़ के अलावा चंपावत, चमोली, बागेश्वर, देहरादून, पौड़ी, उत्तराकाशी और अल्मोड़ा में भी यह संयत्र प्रयोग के तौर पर लगाए जा रहे हैं।
उरेडा के परियोजना अधिकार पीके गंगवार का कहना है कि सौरलेख में इस प्रायोगिक संयंत्र की मदद से 18 महीनों में इस जगह पर हवा की तीव्रता का पता लगाने का काम शुरू किया गया है। इस संयत्र में लगी चिप के सहारे सीवेट हर महीने हवा की तीव्रता को मापेगा।
विंड मास्ट से एक मेगावाट बिजली के उत्पादन के लिए हवा की तीव्रता आठ किमी. प्रति सेकेंड होनी चाहिए। अगर यहां हवा की गति मानकों के अनुरूप रही तो बिजली ऊर्जा के इस नए विकल्प से एक स्थान पर तीन से चार मेगावाट विद्युत उत्पादन हो सकेगा।