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Pithoragarh News: पति की मौत के मामले में पत्नी को 10 साल कारावास की सजा

Fri, 18 Aug 2023 11:11 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Fri, 18 Aug 2023 11:11 PM IST
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Wife gets 10 years in prison for husband's death
पिथौरागढ़। जिला सत्र न्यायाधीश शंकर राज ने दो वर्ष पूर्व हुई युवक की मौत के मामले की सुनवाई करते हुए मृतक की पत्नी को 10 साल के साधारण कारावास और 30,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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मामले के अनुसार पिथौरागढ़ के बांस तल्लाखेत गांव निवासी सुमित सिंह पिथौरागढ़ के भाटकोट स्थित एक निजी अस्पताल में नौकरी करता था। 22 अगस्त 2021 को अस्पताल के एक कमरे में उसका शव पड़ा मिला था। इस मामले में मृतक युवक की मां मनोरमा देवी ने पिथौरागढ़ थाने में बहू मनीषा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। मनोरमा देवी का कहना था कि उनके बेटे सुमित सिंह का विवाह बागेश्वर के चौरसों फटगली निवासी मनीषा के साथ हुआ था। शादी के कुछ दिन बाद ही मनीषा उनके बेटे को परेशान करने लगी। 22 अगस्त को सुमित और मनीषा महिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य परीक्षण करने गए। इसके बाद मनीषा ने गांव न आकर सुमित के कमरे में रहने की जिद की। उसी रात सुमित की संदिग्ध स्थिति में मौत हो गई। उसका शव अस्पताल के एक कमरे में लहूलुहान हालत में मिला।
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पुलिस ने इस मामले में मनीषा के खिलाफ आईपीसी की धारा 306 के तहत मुकदमा दर्ज किया। यह मामला जिला सत्र न्यायालय में चला। मनोरमा देवी ने न्यायालय में दिए बयान में बहू पर बेटे को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। मनोरमा देवी ने यह भी कहा कि उनकी बहू मनीषा अपने पेट में पल रहे बच्चे को उसके मित्र साहिल का बच्चा बताती थी। उन्होंने कहा कि मारपीट, उत्पीड़न और मानसिक तनाव के कारण ही उनके बेटे की मौत हुई है।
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दोनों पक्षों को सुनने के बाद जिला सत्र न्यायाधीश शंकर राज ने दोष सिद्ध करते हुए मनीषा को आईपीसी की धारा 306 के तहत 10 वर्ष के साधारण कारावास और 30,000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया। जुर्माना नहीं देने पर दो वर्ष के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी। यदि दोष सिद्ध जुर्माने की राशि जमा करती है तो इसमें से 20,000 रुपये मृतक की माता मनोरमा देवी को प्रतिकर के रूप में दी जाएगी। मामले की पैरवी डीजीसी प्रमोद पंत और एडीजीसी प्रेम भंडारी ने की।

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दोष सिद्ध मनीषा ने कहा कि वह 24-25 वर्ष की युवती है और लगभग दो साल से जेल में है। उसके साथ उसका दो साल का बच्चा भी है। लंबे समय तक जेल में रहने से उसके बच्चे का भविष्य खराब हो जाएगा। उसने जेल में बिताई गई अवधि से ही दंडित करने की याचना की। जिला शासकीय अधिवक्ता प्रमोद पंत ने तर्क दिया कि अभियुक्ता और उसके पति के बीच अक्सर झगड़ा होता रहता था। अभियुक्ता उसे प्रताड़ित करती थी। उसकी उपस्थिति में ही उसके पति की मृत्यु हुई। उसने अपने पति को बचाने का प्रयास तक नहीं किया।
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