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भैंसखाल को किसकी नजर लगी

Thu, 07 Jun 2018 10:54 PM IST
जीवन दानू/अमर उजाला, नाचनी
जीवन दानू/अमर उजाला, नाचनी Updated Thu, 07 Jun 2018 10:54 PM IST
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Who looked like buffalo skins
रामगंगा नदी से भैंसखाल इस तरह हो रहा तबाह, खंडहर होते घर - फोटो : अमर उजाला

रामगंगा के किनारे बसा भैंसखाल गांव अतीत में खेती, बागवानी से लेकर हर लिहाज से खुशहाल था। भैंसखाल में खुशबूदार बासमती के साथ ही बेहद स्वादिष्ट जमाली प्रजाति का धान पैदा होता था। वर्ष 1942 के बाद इस गांव पर रामगंगा ने तबाही मचानी शुरू कर दी। नतीजतन लोगों को कुमाऊं के विभिन्न हिस्सों में पलायन के लिए मजबूर कर दिया। अब भी भैंसखाल रामगंगा का कहर झेल रहा है। अब तक गांव की करीब 400 नाली जमीन रामगंगा की भेंट चढ़ गई है।

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बुजुर्ग बताते हैं कि सबसे पहले वर्ष 1942 में रामगंगा ने आबादी का रुख किया। रामगंगा भैंसखाल में जमीन, मकान को तबाह करने लगी। वर्ष 1942 से वर्ष 2002 तक लक्ष्मण सिंह पांगती, हयात सिंह, पुरमल सिंह, धरम सिंह, हयात सिंह, महेंद्र सिंह, प्रताप सिंह, भीम सिंह, उमेद सिंह, पान सिंह, नैन सिंह, जगत सिंह, नर सिंह, खड़क राय, धरम राय, गोपाल सिंह, शेर सिंह, हयात सिंह, खड़क सिंह, जोध सिंह, रतन सिंह, जसपाल सिंह, गोप सिंह, प्रताप सिंह, दयान सिंह के घर नदी की भेंट चढ़ गए। ये परिवार मुनस्यारी, हल्द्वानी, डीडीहाट, थल, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, कौसानी, शामा (बागेश्वर) में बस गए।
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भैंसखाल से पलायन कर थल पहुंचे नारायण सिंह पांगती (76) बताते हैं कि भैंसखाल में जगत सिंह पांगती, हयात सिंह पांगती, महिमन सिंह पांगती की दुकानें हुआ करती थीं। वर्ष 1960 में तीनों दुकानें बह गईं। गांव में दो चबूतरे थे, जिन पर चौपाल लगती थी, वह भी बह गए। कहते हैं कि किसी भी सरकार ने भैंसखाल को नदी के कहर से बचाने के लिए कुछ नहीं किया।
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आईएएस के मकान भी खतरे से घिरे
नाचनी। वर्ष 2013 के बाद भैंसखाल की स्थिति और भयावह हो गई। 2013 से 2017 के बीच खतरे की जद में आए कई मकानों को लोगों को छोड़ना पड़ा। रिटायर्ड आईएएस एसएस पांगती, बागेश्वर के सीडीओ श्याम सुंदर पांगती, भूपेंद्र सिंह पांगती, जगत सिंह, नारायण सिंह, कुंदन सिंह को अपने भवन छोड़ने पड़े। रिटायर्ड आईएएस एसएस पांगती, बागेश्वर के सीडीओ श्याम सुंदर पांगती ने मकानों को किराए पर दे रखा था, किराएदारों ने भी मकानों में रहना छोड़ दिया। ये सभी मकान खंडहर हो गए हैं। वर्तमान में भैंसखाल के छीपा तोक में श्यामू राम, नरेंद्र सिंह, कैलाश सिंह, रुद्र राम, पूरन मेहरा, पुष्कर सिंह, नीरज सिंह, भागीरथी देवी के मकान खतरे की जद में हैं।

बरसात शुरू होने से पहले होना है चैनलाइजेशन
नाचनी। नदी का रुख आबादी के विपरीत मूल स्थान पर करने के लिए वर्तमान में चैैनलाइजेशन का काम किया जा रहा है। बरसात शुरू होने से पहले 15 जून तक चैनलाइजेशन का काम करना है। पूर्व प्रधान पूरन सिंह मेहरा, अनिल सिंह, शेर सिंह, राम सिंह का कहना है कि नदी का रुख पलटने के लिए नदी में स्थित बोल्डर को तोड़ना जरूरी है। काम में ढिलाई हुई तो चैनलाइजेशन का काम रोक दिया जाएगा।


15 जून से पहले चैनलाइजेशन का काम पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। नदी का रुख पलटा दिया जाएगा, बोल्डर तोड़ा जाएगा। गांव की सुरक्षा के उपाय किए जाएंगे। -केएन गोस्वामी एसडीएम मुनस्यारी

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