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Pithoragarh News: ऐसी सड़क का क्या फायदा, जब पुल ही नहीं बनाया
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मूनाकोट/पिथौरागढ़। मूनाकोट ब्लॉक के ग्राम पंचायत क्वारबन के लोग पुल के अभाव में सड़क होने के बावजूद तीन किमी पैदल चलने के लिए मजबूर हैं। डेढ़ साल पहले बनी सड़क पर डामरीकरण भी हो चुका है लेकिन पुल नहीं बना। इस कारण ग्राम पंचायत की 700 आबादी को तीन पैदल ही चलना पड़ रहा है।
पीएमजीएसवाई ने डेढ़ साल पहले बेलतड़ी-क्वारबन सड़क का निर्माण किया लेकिन सड़क निर्माण के दौरान भनाड़ी गाड़ पर पुल नहीं बनाया। इस कारण सड़क पर यातायात की सुविधा नहीं होने से लोगों को पैदल चलना पड़ रहा है। सबसे अधिक मुश्किल बीमार और गर्भवतियों को अस्पताल ले जाने में होती है। स्कूली बच्चे भी पैदल ही आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं।
लोगों को जरूरी सामान कंधों या खच्चरों पर लेकर जाना पड़ता है। लोग भनाड़ी गाड़ पर पुल निर्माण का इंतजार कर रहे हैं। पीएमजीएसवाई के सहायक अभियंता रमेश चंद ने बताया कि पुल निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया चल रही है। आठ बार निविदा निरस्त हो चुकी है। हर बार निर्धारित राशि से कम में निविदा लग रही है। 9वीं बार निविदा प्रक्रिया चल रही है।
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सड़क तो बनी लेकिन डेढ़ साल बाद भी पुल का निर्माण नहीं हो सका है। गांव की 700 की आबादी तीन किमी पैदल चलने के लिए मजबूर हैं। -योगेंद्र सिंह, प्रधान, क्वारबन।
1971 के युद्ध में शहीद केशर सिंह और बच्ची राम के गांव के लोग पैदल चलने के लिए मजबूर हैं। बीमार और बुजुर्गों को डोली के सहारे नजदीकी सड़क तक पहुुंचाते हैं। -श्याम सिंह, भूतपूर्व सैनिक, क्वारबन।
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पीएमजीएसवाई ने डेढ़ साल पहले बेलतड़ी-क्वारबन सड़क का निर्माण किया लेकिन सड़क निर्माण के दौरान भनाड़ी गाड़ पर पुल नहीं बनाया। इस कारण सड़क पर यातायात की सुविधा नहीं होने से लोगों को पैदल चलना पड़ रहा है। सबसे अधिक मुश्किल बीमार और गर्भवतियों को अस्पताल ले जाने में होती है। स्कूली बच्चे भी पैदल ही आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं।
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लोगों को जरूरी सामान कंधों या खच्चरों पर लेकर जाना पड़ता है। लोग भनाड़ी गाड़ पर पुल निर्माण का इंतजार कर रहे हैं। पीएमजीएसवाई के सहायक अभियंता रमेश चंद ने बताया कि पुल निर्माण के लिए निविदा प्रक्रिया चल रही है। आठ बार निविदा निरस्त हो चुकी है। हर बार निर्धारित राशि से कम में निविदा लग रही है। 9वीं बार निविदा प्रक्रिया चल रही है।
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सड़क तो बनी लेकिन डेढ़ साल बाद भी पुल का निर्माण नहीं हो सका है। गांव की 700 की आबादी तीन किमी पैदल चलने के लिए मजबूर हैं। -योगेंद्र सिंह, प्रधान, क्वारबन।
1971 के युद्ध में शहीद केशर सिंह और बच्ची राम के गांव के लोग पैदल चलने के लिए मजबूर हैं। बीमार और बुजुर्गों को डोली के सहारे नजदीकी सड़क तक पहुुंचाते हैं। -श्याम सिंह, भूतपूर्व सैनिक, क्वारबन।